24 News Update जयपुर/चित्तौड़गढ़ — राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर की डिविजनल बेंच) ने चित्तौड़गढ़ निवासी युवक के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उसकी 2013 में हुई शादी को निरस्त (शून्य) घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि विवाह से पहले पत्नी की गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया की जानकारी पति और उसके परिवार से छिपाई गई, जो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत ‘धोखाधड़ी’ की श्रेणी में आती है।बीमारी छिपाने को माना धोखाधड़ीजस्टिस इंदरजीत सिंह और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सिजोफ्रेनिया केवल अस्थायी अवसाद नहीं, बल्कि एक गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार है, जो सक्रिय अवस्था में व्यक्ति को सामान्य वैवाहिक जीवन जीने से रोक सकता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने माना कि यह तथ्य विवाह के लिए ‘महत्वपूर्ण’ था और इसे छिपाना पति के साथ स्पष्ट धोखाधड़ी है। विवाह के बाद सामने आया सचयह मामला कोटा निवासी महिला और चित्तौड़गढ़ निवासी युवक के बीच 2013 में हुई शादी से जुड़ा है। शादी के बाद जब पत्नी ससुराल पहुंची तो उसके व्यवहार में असामान्यता देखी गई। पीहर से आए सामान में मनोचिकित्सक की पर्ची मिली, जिसमें सिजोफ्रेनिया के इलाज का उल्लेख था। पति का कहना था कि पत्नी की बीमारी के कारण विवाह के बाद शारीरिक संबंध संभव नहीं हुआ। वहीं, पत्नी ने आरोप लगाया कि पति व ससुरालवालों ने दहेज की मांग और उत्पीड़न किया तथा वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं, बल्कि शादी से कुछ दिन पहले परिजनों के एक्सीडेंट के बाद डिप्रेशन में थी।फैमिली कोर्ट ने खारिज किया था मामलाकोटा फैमिली कोर्ट नंबर-3 ने 28 अगस्त 2019 को पति की याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ पति ने राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पीठ में अपील की। रिकॉर्ड, गवाहों और मेडिकल सबूतों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि विवाह से पहले बीमारी की जानकारी छुपाई गई थी। पति को सभी मामलों से मिली राहतकोर्ट ने विवाह को शून्य घोषित करते हुए पति को भरण-पोषण, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के सभी मुकदमों से मुक्त कर दिया। आदेश की प्रति जिला न्यायालय भेज दी गई है। पति का पक्ष रखने वाले एडवोकेट उमाशंकर आचार्य ने बताया कि 2013 से चल रही यह कानूनी लड़ाई 31 जुलाई 2025 को समाप्त हुई और पीड़ित को न्याय मिला।कानूनी विशेषज्ञों की रायकानूनी जानकारों का कहना है कि राजस्थान में डिविजनल बेंच का यह पहला बड़ा फैसला है, जिसमें मानसिक बीमारी को विवाह शून्यता का आधार मानते हुए पति को आपराधिक और आर्थिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया है। यह निर्णय आने वाले समय में समान मामलों के लिए एक मिसाल बनेगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जयपुर नगर निगम मुख्यालय में बड़ा हादसा टला, कमिश्नर ऑफिस के बाहर जर्जर छत का प्लास्टर गिरा राज्यपाल ने किया “हार्टफुलनेस निबंध लेखन कार्यक्रम 2025” का पोस्टर विमोचन