24 News update उदयपुर। उदयपुर में भाजपा से जुड़े नेता और ओसवाल महासभा युवा अध्यक्ष अनिल जारोली को आखिरकार पुलिस ने गुरुवार को पॉलिटिकल रस्साकशी के बीच गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ही ली। महिला नेता और पूर्व पार्षद के घर में घुसकर दुष्कर्म के प्रयास, मारपीट और अभद्रता जैसे गंभीर आरोपों में दर्ज मामलों में लंबे समय से गिरफ्तारी टाल रहे जारोली पर हाईकोर्ट से मिली राहत 18 मई को खत्म हो गई थी। इसके बावजूद वह खुलेआम राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहा था, सोशल मीडिया पर सक्रिय था और स्थानीय नेताओं के साथ तस्वीरें व स्टेटस वायरल कर रहा था।जबकि पुलिस कार्रवाई नहीं कर पा रही थी।मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ कि हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक हटाने के बाद भी आरोपी कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे रहा। क्या बिना राजनीतिक रसूख के यह संभव है, क्या यह सुविधा हर आमजन को मुहैया है??? ऐसे हुई गिरफ्तारी सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में पुलिस अधीक्षक और आईजी को बाकायदा प्रतिवेदन देकर गिरफ्तारी की मांग की गई थी व कहा गया था कि रसूखदार हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी खुला घूम रहा है। इसके बाद घंटाघर थाने से जांच हटाकर महिला अनुसंधान सेल के पुलिस उप अधीक्षक छगन राजपुरोहित को सौंपी गई। बताया जा रहा है कि बुधवार को ही फाइल उनके पास पहुंची और गुरुवार को आरोपी की गिरफ्तारी हो गई। याने, राजनीतिक रसूख के प्रयास इस बार काम नहीं आए। जानकारी के अनुसार अनिल जारोली के खिलाफ वर्ष 2025 में घंटाघर थाने में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं। पहली एफआईआर में भाजपा की महिला नेता और निवर्तमान पार्षद ने आरोप लगाया था कि जारोली उनके घर में घुसा, हमला किया, अभद्र व्यवहार किया और दुष्कर्म का प्रयास किया। वहीं अगले दिन पीड़िता के परिवार पर घर में घुसकर हमला करने के आरोप भी सामने आए थे।मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए जारोली ने राजस्थान हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक ले ली थी। अपनी याचिका में उसने विवाद को पैसों के लेन-देन और कारोबारी विवाद से जुड़ा बताते हुए खुद को निर्दोष बताया था। हालांकि पीड़िता पक्ष ने अदालत में पूरे तथ्य और साक्ष्य पेश किए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले में विस्तृत जांच जरूरी है और 12 मई को गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी।इधर, अनिल जारोली ने पीड़िता के पति के खिलाफ भी पैसों की हेराफेरी का मामला दर्ज करवाया था, लेकिन जांच में वह मामला झूठा पाया गया और पुलिस ने उसमें एफआर लगा दी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जारोली का प्रभाव इतना था कि हाईकोर्ट की राहत खत्म होने के बाद भी वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में नेताओं के साथ दिखाई देता रहा। उसे बड़ी सादड़ी के एक प्रभावशाली भाजपा नेता का करीबी माना जाता है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि अनिल जारोली भाजपा उदयपुर ग्रामीण संगठन में पदाधिकारी रहने के साथ ओसवाल महासभा के युवा अध्यक्ष पद से भी जुड़ा हुआ है। मामले की जांच अब पुलिस उप अधीक्षक छगन राजपुरोहित कर रहे हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मेवाड़ के इतिहास को मिला जीवंत स्वरूप, 484वीं जयंती पर बना भव्य तैल चित्र बना चर्चा का केंद्र, इतिहासकारों ने बताया “बोलता चित्र” घासा पुलिस का नशे पर वार, एमडीएमए के साथ युवक गिरफ्तार