24 News Update उदयपुर। शहर के सुखेर थाना क्षेत्र में ट्रेवल्स व्यवसायी के साथ हुई कथित मारपीट और लूट की घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित का आरोप है कि 12 से 15 युवकों ने बीच सड़क पर हमला कर उसका हाथ तोड़ दिया, 15 हजार रुपए और सोने की चेन लूट ली। बावजूद इसके पुलिस ने तत्काल लूट और गंभीर हमले का मामला दर्ज करने के बजाय आरोपियों को शांति भंग की कार्रवाई में पाबंद कर छोड़ दिया। तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें आरोपियों को अज्ञात बताया गया। पीड़ित पुष्पेंद्र सिंह पुत्र शिव सिंह, निवासी झल्लारा ने मीडिया को बताया कि 23 जुलाई की रात करीब 8:10 बजे वह न्यू आरटीओ स्थित अपने ट्रेवल्स कार्यालय से कार लेकर घर लौट रहे थे। शोभागपुरा स्थित सेरेमनी रिसोर्ट तिराहे के पास एक स्कॉर्पियो (RJ37 TA 1381) और थार (RJ13 CF 6506) ने उनकी कार को ओवरटेक कर रोक लिया। दोनों वाहनों में सवार 12 से 15 युवकों ने कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित के अनुसार हमलावरों ने कार में रखे 15 हजार रुपए निकाल लिए और छीना-झपटी के दौरान गले से सोने की चेन भी छीन ली। मारपीट इतनी गंभीर थी कि उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पुलिस सहायता के लिए 100 नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया तो आरोपियों ने मोबाइल छीनकर और अधिक मारपीट की तथा धमकी दी कि “पुलिस हमारे पास आती है, हम पुलिस के पास नहीं जाते।” पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर प्रश्न पीड़ित का आरोप है कि घटना के दिन ही सुखेर थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। अगले दिन 24 जुलाई को पुलिस ने कथित आरोपियों को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई (धारा 151) के तहत पाबंद कर छोड़ दिया। इसके बाद 25 जुलाई की शाम करीब 6 बजे एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें आरोपियों को अज्ञात दर्शाया गया। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तीन प्रमुख सवाल उठ रहे हैं— घटना के तुरंत बाद शिकायत मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में लगभग तीन दिन की देरी क्यों हुई? गंभीर मारपीट, फ्रैक्चर और नकदी-चेन छीने जाने के आरोपों के बावजूद प्रारंभिक कार्रवाई प्रतिबंधात्मक धाराओं तक ही क्यों सीमित रही?जिन लोगों को पहले पाबंद किया गया, बाद में दर्ज एफआईआर में उन्हें अज्ञात क्यों बताया गया? जांच अधिकारी का जवाब मामले की जांच कर रहीं एएसआई आशा ने दैनिक भास्कर को बताया कि संबंधित व्यक्तियों को पाबंद कर छोड़ा गया था। उनका कहना है कि अब एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पहले आरोपियों को छोड़ने और बाद में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करने के संबंध में उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।घटना के बाद यह मामला केवल मारपीट और लूट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई और विवेचना की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जांच का विषय होगा कि समय पर उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया और आरोपियों की पहचान को लेकर विरोधाभास क्यों सामने आया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजस्थान को मिला पहला समुराई स्पोर्ट्स नेशनल रेफरी, किशन सोनवाल ने रचा इतिहास विश्व हिंदू परिषद उदयपुर महानगर की नई कार्यकारिणी घोषित, संगठन विस्तार पर जोर