24 News Update जयपुर। यह बात तो अब साबित हो चुकी है कि हम सब पॉलिटिकल वीआईपी वाले जमाने में जी रहे हैं। भाजपा कार्यालय पर बिजली क्या गई, बवाल मच गया। रेलमंत्री और उर्जा मंत्री की मौजूदगी में आखिर बत्ती गुल हो कैसे गए, यह नाक का सवाल बन गया। मगर वोट देने वाले जनता के घरों में जो अघोषित कटौति हो रही है, उसका क्या हिसाब किताब है?? उस पर तो भाजपाई जो अभी पावर में है, गुस्सा नहीं हो रहे हैं। स्थानीय इकाइयां भी गुस्सा होकर उबल नहीं रही, जांच कमेटी की मांग नहीं कर रही है???भाजपा प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मीडिया संवाद के दौरान तीन बार बिजली गुल हुई तो सरकार ने तत्काल संज्ञान लिया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जांच समिति गठित कर दी और स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी या अभियंता की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन इस घटनाक्रम ने प्रदेशभर में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब आम जनता रोजाना घंटों बिजली कटौती झेलती है, तब उसकी जवाबदेही कौन तय करता है? प्रदेश के कई जिलों में गर्मियों के दौरान रोजाना अनियोजित बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और फॉल्ट की शिकायतें आम हैं। शहरी क्षेत्रों में जहां 30 मिनट से लेकर 2-3 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें मिलती हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में कई बार निर्धारित आपूर्ति के अलावा अतिरिक्त कटौती भी लोगों की परेशानी बढ़ा देती है। छोटे व्यवसाय, दुकानदार, किसान, छात्र और घरेलू उपभोक्ता इसका सीधा असर झेलते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में कभी किसी स्तर पर जांच समिति गठित होती ही नहीं है। वीआईपी कार्यक्रम पर फौरन एक्शन, आम उपभोक्ताओं का फोन तक नहीं उठाते भाजपा कार्यालय की घटना में कुछ ही घंटों के भीतर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई, तकनीकी कारणों की जानकारी सार्वजनिक की गई और अतिरिक्त मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में जांच कमेटी बना दी गई। वहीं दूसरी ओर, किसी मोहल्ले या गांव में बार-बार ट्रांसफार्मर फुंकने, फीडर ट्रिप होने या घंटों बिजली नहीं आने की शिकायतें अक्सर शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन तक सीमित रह जाती हैं। यही नहीं कई बार तो बिजली दफ्तार वाले फोन तक नहीं उठाते। बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर किन पर?छोटे व्यापारी: बिजली जाने से दुकानें, वेल्डिंग यूनिट, मिलें और छोटे उद्योग प्रभावित होते हैं।छात्र: परीक्षा और ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बिजली बाधित होने से तैयारी प्रभावित होती है।किसान: सिंचाई के लिए निर्धारित समय पर बिजली नहीं मिलने से फसल प्रबंधन प्रभावित होता है।मरीज और बुजुर्ग: घरों में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, नेब्युलाइजर या अन्य उपकरणों पर निर्भर लोगों के लिए बिजली कटौती गंभीर समस्या बन सकती है।घरेलू उपभोक्ता: भीषण गर्मी में घंटों बिजली नहीं रहने से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। जवाबदेही का सवाल जब किसी वीआईपी कार्यक्रम में बिजली बाधित होती है तो तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच होती है, लेकिन आम नागरिकों की शिकायतों पर कितनी बार संबंधित अभियंता या अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है? कितनी बार किसी फीडर की बार-बार ट्रिपिंग या खराब रखरखाव पर विभागीय जांच बैठाई जाती है? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है। याने तकलीफ क्या केवल वीआईपी को ही होती है। आम आदमी को नहीं?? क्या हर बड़े पावर कट की होनी चाहिए जांच? ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में बार-बार बिजली बाधित हो रही है या लंबे समय तक आपूर्ति ठप रहती है तो उसके पीछे तकनीकी, रखरखाव या प्रबंधन संबंधी कारणों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। इससे न केवल समस्याओं का स्थायी समाधान निकलेगा बल्कि वितरण व्यवस्था की जवाबदेही भी बढ़ेगी। लोगों का कहना है कि सरकार जिस तत्परता से भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बिजली कटौती पर सक्रिय हुई, वही संवेदनशीलता आम उपभोक्ताओं के लिए भी दिखाई जानी चाहिए। यदि किसी इलाके में लगातार बिजली संकट बना रहता है तो वहां भी जांच, जवाबदेही और समयबद्ध सुधार की व्यवस्था होनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल अगर कुछ मिनट की बिजली कटौती पर जांच समिति बन सकती है, तो रोजाना हजारों उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाले लंबे पावर कट, ट्रिपिंग और खराब बिजली व्यवस्था पर स्वतः संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था कब बनेगी? यही सवाल आज प्रदेश की जनता पूछ रही है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ट्रैक्टर की किस्त चुकाने के लिए रची खौफनाक साजिश, देवर-देवरानी निकले मां-बेटी के हत्यारे SI भर्ती पेपर लीक में नया खुलासा: पिता ने 45 लाख में खरीदा था पेपर, बेटा गिरफ्तार; अब तक 145 आरोपी सलाखों के पीछे