24 News Update उदयपुर, 17 अगस्त। सावन के अंतिम सोमवार को उदयपुर में भगवान शिव के प्रति आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि 11 हजार कावड़ भी कम पड़ गईं। शिव महोत्सव समिति की ओर से देश में सुख-शांति और अच्छी वर्षा की कामना को लेकर निकाली गई 21वीं कावड़ यात्रा में हजारों महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हुए। गंगोद्भव कुंड से गंगाजल लेकर श्रद्धालु करीब 21 किलोमीटर पैदल चलकर उभयेश्वर महादेव धाम पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
2006 में महज 51 कार्यकर्ताओं के साथ शुरू हुई यह यात्रा अब विराट धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है। इस बार समिति ने 11 हजार कावड़ तैयार कराई थीं, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि कावड़ कम पड़ गईं। इसके बाद कावड़ से वंचित श्रद्धालुओं को प्लास्टिक की थैलियों में गंगाजल उपलब्ध कराया गया। उभयेश्वर महादेव मंदिर परिसर में जलाभिषेक के लिए लोटों की व्यवस्था की गई।

गंगोद्भव कुंड से शुरू हुई यात्रा, पहाड़ों तक गूंजे महादेव के जयकारे
सुबह करीब 8 बजे 5000 वर्ष पुराने गंगा के चौथे पाये माने जाने वाले गंगोद्भव कुंड से कावड़ यात्रा रवाना हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं, जबकि पुरुष सफेद वस्त्रों में नजर आए। कई श्रद्धालु अपने घरों से स्वयं कावड़ बनाकर लाए थे। यात्रा जैसे-जैसे शहर से आगे बढ़ी, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से माहौल शिवमय होता गया। शहर के बाजारों से लेकर पहाड़ी रास्तों तक श्रद्धालुओं की कतार नजर आई। यात्रा आयड़, अशोक नगर, शक्तिनगर, देहलीगेट, तीज का चौक, मंडी की नाल, मोचीवाड़ा, घंटाघर, जगदीश चौक, गड़िया देवरा, चांदपोल, ब्रह्मपोल, दुधिया गणेशजी, रामपुरा, गोरेल्ला और मोरवानिया होते हुए उभयेश्वर महादेव पहुंची।
पहला कावड़िया करीब 10.45 बजे उभयेश्वर पहुंचा, जबकि शाम करीब 4 बजे तक कावड़ियों के पहुंचने का क्रम जारी रहा।

महिलाओं की भागीदारी रही खास
इस बार यात्रा में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में कंधों पर कावड़ लेकर 21 किलोमीटर की पदयात्रा में शामिल हुईं। बच्चे और युवा भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा में चलते रहे। आयोजन समिति के संयोजक एडवोकेट डॉ. रामकृपा शर्मा ने बताया कि यात्रा का स्वरूप लगातार बढ़ रहा है। इस बार तैयार की गई 11 हजार कावड़ श्रद्धालुओं की संख्या के सामने कम पड़ गईं।

सात पवित्र नदियों के जल से हुआ अभिषेक
यात्रा में खुले वाहन के आगे तांबे का बड़ा कलश रखा गया था। इसमें गंगोत्री, यमुनोत्री, माना बॉर्डर, सरस्वती, कैलाश मानसरोवर, भागीरथ नदी और मंदाकिनी के पवित्र जल को रखा गया। पूरे यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं ने कलश की पूजा-अर्चना की। उभयेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने के बाद इन सात पवित्र जलों से भगवान शिव का अभिषेक किया गया।

21 विद्वान पंडितों ने कराया महारुद्राभिषेक
उभयेश्वर महादेव मंदिर में पंडित ओमप्रकाश शर्मा के सान्निध्य में 21 विद्वान पंडितों ने हवनात्मक महारुद्राभिषेक कराया। समाजसेवी वरदीचंद चौधरी के सान्निध्य में जजमानों ने जोड़ों के साथ अभिषेक में भाग लिया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण कई कावड़ियों को अभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ा।

पूरे रास्ते पुष्पवर्षा, जगह-जगह सेवा शिविर
कावड़ यात्रा का शहर से लेकर उभयेश्वर तक विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने स्वागत द्वार लगाए। कई स्थानों पर कावड़ियों के लिए पानी, बिस्किट, कुल्फी, आइसक्रीम, नींबू पानी, फल, दूध, मिल्क रोज, फ्रूटी, केले, शर्बत और चाय की व्यवस्था की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों ने कावड़ियों की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। यात्रा के दौरान निजी बस और एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई।

25 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया
उदयपुर से उभयेश्वर तक आने वाले कावड़ियों और मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। उभयेश्वर सत्संग मंडल की ओर से मंदिर परिसर में भजन संध्या भी आयोजित की गई। माता की झांकियों के साथ भजनों की प्रस्तुति हुई। सात दिवसीय आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं का अध्यक्ष देवी सिंह सिसोदिया की ओर से उपरणा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया।

पुलिस का चाक-चौबंद इंतजाम
हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। यात्रा के आगे पुलिस वाहन, उसके पीछे मोटरसाइकिलों पर महिला पुलिसकर्मी और पैदल पुलिसकर्मी तैनात रहे। कावड़ियों की सुरक्षा के लिए यात्रा के आगे और पीछे पुलिस जाब्ता पैदल भी चलता रहा। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर यातायात दबाव और जाम की स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिसकर्मी लगातार व्यवस्था संभालते रहे।

सुबह 6 बजे से पहुंचने लगे थे कावड़िये
मीडिया प्रभारी कृष्णकांत कुमावत ने बताया कि कावड़िये सुबह करीब 6 बजे से ही अपने वाहनों से गंगुकुंड परिसर पहुंचना शुरू हो गए थे। यहां गंगु विकास समिति के अध्यक्ष महेश भावसार और कार्यकर्ताओं की ओर से श्रद्धालुओं के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। यात्रा शुरू होने के बाद भी श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। उभयेश्वर सत्संग मंडल और महादेव धर्मोत्सव समिति अध्यक्ष मान सिंह हाड़ा की टीम ने दोपहिया वाहनों के जरिए यात्रा की व्यवस्था संभाली।

इनकी रही मौजूदगी और भूमिका
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर महंत नारायण दास, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली, समाजसेवी वरदीचंद चौधरी, देवीलाल गुर्जर, दिनेश भट्ट, प्रेम सिंह शक्तावत, मनोहर चौधरी, अतिरिक्त महाधिवक्ता एडवोकेट डॉ. प्रवीण खंडेलवाल, कमलेन्द्र सिंह पंवार, महेश भावसार और अतुल चंडालिया मौजूद रहे। सभी ने सात पवित्र नदियों के जल से भरे तांबे के कलश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कावड़ यात्रा को रवाना किया। यात्रा में गोपाल औदिच्य, राजेश वैष्णव, रणजीत दिग्पाल, बलवीर दिग्पाल, डॉ. प्रकाश जैन, गिरीश शर्मा, गिरीश भारती, आनंदी लाल चित्तौड़ा और भगवती पालीवाल सहित कई लोग मौजूद रहे। पूरी यात्रा की व्यवस्थाओं में मान सिंह हाड़ा, नरेश वैष्णव, सुरेश रावत, उदय सिंह देवड़ा, ललित कुमावत, पुरुषोत्तम पारासर, नवीन व्यास, गोपाल कृष्ण रावल, सुमित सेठ, भूपेश रावल, अक्षय दत्त व्यास, वैदांत औदिच्य, संतोष शर्मा, पुष्कर लाल दवे, नितिश कुमावत, नरेंद्र रावत, देवराज और मनराज की भूमिका रही।

शहर के संगठनों ने किया स्वागत
सात दिवसीय कार्यक्रम संयोजक रामकृपा शर्मा ने बताया कि यात्रा मार्ग में आयड़ हिंदू संगठन, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग सेना मेवाड़, कमल टेंट हाउस, सिंधी समाज, उदयपुर कैटरिंग डीलर्स, श्रीराम बजरंग सेना, पीकोक इंडस्ट्रीज, विश्वकर्मा सुथार समाज, वाल्मीकि समाज, श्रीकृष्णा डेयरी, विप्र फाउंडेशन युवा प्रकोष्ठ, नरेंद्र स्टोन, भारतीय जनता पार्टी शहर एवं देहात, भाजपा अंबेडकर मंडल, विप्र सेना, मोची समाज, सर्राफा एसोसिएशन, चांदपोल व्यापार संघ, धर्मोत्सव समिति, जाड़ा गणेश व्यापार संघ, साहू समाज, इंडियन ग्रुप मल्लातलाई, नाकोड़ा टेंट, दुधिया गणेश व्यापार मंडल, मनीष टेंट, हिंदू मित्र संगठन, डाकोत समाज, प्रतिबद्ध संस्था के पार्षद गिरीश भारती, कन्हैया फिलिंग स्टेशन, कुमावत समाज, रामपुरा व्यापार मंडल, देविका इंटरप्राइजेज और देवनारायण कैटर्स सहित अनेक संगठनों ने स्वागत एवं सेवा व्यवस्था संभाली।

51 कार्यकर्ताओं से शुरू हुई यात्रा अब हजारों तक पहुंची
2006 में 51 कार्यकर्ताओं के साथ शुरू हुई कावड़ यात्रा का 21वें वर्ष में पहुंचकर हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा में बदल जाना इसके बढ़ते धार्मिक प्रभाव को दर्शाता है। इस बार 11 हजार कावड़ तैयार होने के बावजूद उनका कम पड़ जाना आयोजन में उमड़ी भीड़ का सबसे बड़ा संकेत रहा।


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