उदयपुर। इतिहास भी समय काल और परिस्थिति के अनुसार करवटें लेता रहता है। कभी यह सत्ता के साथ चलता है तो कभी अपनी राह खुद बनाता है। इस सिलसिले में कुछ चीजें गुम हो जाती हैं तो कुछ अचानक प्रकट हो जाती हैं। कुछ अपना हक खो देती हैं तो कुछ सवाल बनकर हक मांगना शुरू कर देती हैं। धोली बोवड़ी भी कहीं उसमें से तो नहीं। आज की पहले क्या आने वाले दिनों में मुदïदा बनेगी या इतिहास मंथन करते-करते अपनी गति से प्रवाहित होता रहेगा, यह देखने वाली बात होगी। उदयपुर शहर की कुछ विशिष्ट कलात्मक बावडिय़ों में शुमार दिल्ली दरवाजे के अंदर बनी धौली बावड़ी को वर्ष 1964 में राज्य सरकार ने भरवा दिया था। आज इस क्षेत्र को धौली बावड़ी के नाम से जाना जाता है लेकिन धौली बावड़ी ही गायब है। शहर विधायक ताराचंद जैन से क्षेत्रवासियों ने रविशंकर टांक और सुरेन्द्र टांक के नेतृत्व में मुलाकात कर इस बावड़ी के पुनरुद्धार की मांग की। इस पर विधायक ताराचंद जैन ने आश्वासन दिया कि बावड़ी को पुनरुद्धार करने का उनका पूरा प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि यह उदयपुर शहर की विरासत है और उसका पुनरुद्धार होने से नगर के सौन्दर्य में वृद्धि होगी। धौलीबावड़ी निवासी रविशंकर टांक के अनुसार सन 1882 में उदयपुर शहर में देहली भेट अन्दर तत्कालीन महाराणा सज्जन सिंह ने एक बावड़ी का निर्माण कराया था। यह तीन मंजिला बावडी राजनगर के सफेद मार्बल से बनाई गई थी। बावड़ी का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर दिनांक 29 जुलाई 1882 को महाराणा सज्जन सिंह जी बग्घी में बैठकर विशेष रूप से बावड़ी को देखने आये। (सन्दर्भ: हकीकत बहिड़ा महाराणा सज्जन सिंह, पृष्ठ सं. 455), बावड़ी को देखते ही महाराणा सज्जन सिंह ने कहा कि अरे या तो धोलीबावड़ी है। तभी से इस बावड़ी का व इसके आस-पास का क्षेत्र धोलीबावड़ी के नाम से जाना जाता है। यह तीन मंजिला बावड़ी सफेद मार्बल से निर्मित है। बावड़ी में दोनों मंजिलों पर आलिये (निच्य) बने हुए है। यह बावड़ी आस-पास के क्षेत्र में जल स्त्रोत थी। विधायक को बताया गया कि वर्ष 1964 में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस बावड़ी में मरी हुई बकरी डाल दी। दावा कर आरोप लगाया गया कि असामाजिक तत्वों के दबाव में तब ऐतिहासिक व सुन्दर बावडी को मिट्टी से भरवा दिया गया। यह एक सोची समझी राजनीतिक चाल थी। तब गम्भीर विरोध नहीं हो सका। बावड़ी की पेरापेट वाल को तोड़ कर उसमे मलवा भरा गया था। बावड़ी को पुन: जागृत करने से जल संरक्षण एवम् विरासत संरक्षण का ऐतिहासिक कार्य होगा व उदयपुर शहर में पर्यटन की दृष्टि से भी एक अच्छा कार्य हो सकेगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सुविवि में उपराष्ट्रपति धनखड़ का कार्यक्रम हुआ ‘प्रीपोन, दिल्ली में कोहरा हो सकता है वजह उप राष्ट्रपति की यात्रा से ‘फेल’ हुआ उदयपुर का ट्रैफिक सिस्टम, जाम में फंसे लोगों ने प्रशासन को कोसा