24 न्यूज अपडेट. अजमेर। अजमेर दरगाह के बाहर भीड़ में ’सिर तन से जुदा’ के नारे लगाने के मामले में फैसला आ गया हैं खादिम सहित सभी छह आरोपियों को एडीजे-4 कोर्ट ने बरी कर दिया है, 2 साल से कोर्ट में ट्रायल चल रहा था, 22 गवाह और 32 दस्तावेज पेश किए गए थे। मामला 17 जून 2022 का है, जब दरगाह में भड़काऊ नारेबाजी की गई थी। दरगाह के बाहर सिर तन से जुदा के लगे और कुछ ही दिन बाद 28 जून को उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल हत्याकांड को अंजाम दिया गया। सुबह मामले में मुख्य आरोपी गौहर चिश्ती सहित सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में लाया गया, जहां अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या 4 की न्यायाधीश रितु मीणा ने फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी गौहर चिश्ती सहित अन्य सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया। आरोपियों के वकील अजय वर्मा ने बताया कि न्यायालय ने किसी भी साक्ष्य को न्यायालय ने नहीं माना और आरोपियों को बरी करते हुए अपना फैसला सुनाया है। वहीं, अपर लोक अभियोजक गुलाम नजमी फारूकी ने बताया कि मामले को लेकर व पूरी कार्रवाई का अवलोकन करेंगे, उसके बाद वह उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे। सरकारी वकील गुलाम नजमी फारूकी ने बताया कि – जून 2022 में दरगाह की सीढ़ियों पर ’सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए थे। मामले में खादिम गौहर चिश्ती, अजमेर के रहने वाले ताजिम सिद्दीकी (31) पुत्र नईम खान, फखर जमाली (42) पुत्र सैयद मोहम्मद जुबैर जमाली, रियाज हसन दल (47) पुत्र हसन, मोईन खान (48) पुत्र स्व. शमसुद्दीन खान, नासिर खान (45) आरोपी थे। एक आरोपी अहसानुल्लाह फरार है। उस पर कोई फैसला नहीं सुनाया गया है। दरगाह थाने में जून 2023 मुकदमा दर्ज किया गया था। कोर्ट ने पूरा जजमेंट आउट नहीं किया है। आज कोर्ट परिसर छावनी में तब्दील रहा। बिना चेकिंग के कोर्ट के अंदर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी गई। आपको बता दें कि 17 जून 2023 को कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि दोपहर 3 बजे उनकी ड्यूटी निजाम गेट पर थी। उस दौरान मौन जुलूस निकाला जा रहा था। तब प्री-प्लान तरीके से खादिम सहित कुछ लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिए थे। उन्होंने रिक्शे पर लाउड स्पीकर लगाकर सिर तन से जुदा के नारे लगाए थे। उस दौरान 2500-3000 लोगों की भीड़ दरगाह के सामने थी। खादिम गौहर चिश्ती को मौन जुलूस से पहले समझाया भी गया था। इसके बाद भी भड़काऊ नारे लगाए गए। ऐसे में उस पर धार्मिक स्थल से हिंसा के लिए भीड़ को उकसाने और हत्या की अपील करने का मामला दर्ज किया गया था। गौहर चिश्ती से पूछताछ में कुछ भी काम की जानकारी सामने नहीं आई।
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