24 News Update उदयपुर। बस बॉडी निर्माण से जुड़े परंपरागत कारीगरों और लघु उद्योगों की मुश्किलें अब कागजों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गई हैं। 1 सितम्बर 2025 से लागू किए गए नए बस बॉडी कोड ने जिन हाथों से दशकों से देश की परिवहन व्यवस्था को मजबूती दी, उन्हीं हाथों का काम छीनने का खतरा खड़ा कर दिया है। इसी चिंता के साथ श्री विश्वकर्मा मोटर बॉडी उद्योग एसोसिएशन उदयपुर ने मंगलवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नियमों में यथोचित राहत की मांग उठाई।बस बॉडी निर्माताओं का कहना है कि यह उद्योग केवल धंधा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही रोज़ी-रोटी है। सूक्ष्म और लघु इकाइयों पर आधारित यह क्षेत्र लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है, सरकार को राजस्व भी देता है, लेकिन नए कोड 119, 52 और 53 ने काम को इतना जटिल बना दिया है कि कई इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। करीब एक लाख लोग बेरोजगार हो रहे हैं।एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में यह सवाल भी उठाया कि आखिर एक सड़क दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी बस बॉडी निर्माण पर ही क्यों थोप दी गई। जैसलमेर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण बस दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी हादसे के पीछे चालक, सड़क की स्थिति, वाहन की गति, उसकी हालात और पर्यावरण जैसे कई कारण होते हैं, लेकिन बिना एफएसएल या तकनीकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बस बॉडी की गुणवत्ता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया। क्या यह निष्पक्ष मूल्यांकन है, या आसान रास्ता अपनाया जा रहा है—यह सवाल ज्ञापन के जरिए प्रशासन के सामने रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि सरकार एक तरफ पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी योजनाओं के जरिए परंपरागत कारीगरों को मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे कठोर नियम लागू कर दिए गए हैं जिनमें पंजीकरण, लाइसेंस, उच्च शुल्क, महंगे तकनीकी मानक और टेस्टिंग सुविधाओं की कमी छोटे उद्यमियों के बस से बाहर हो गई है। जिन इकाइयों ने सीमित संसाधनों और अल्प पूंजी से वर्षों तक काम किया, वे अब नियमों के बोझ तले दबती जा रही हैं। श्री विश्वकर्मा मोटर बॉडी उद्योग एसोसिएशन की ओर से सौंपे गए इस ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई तो न सिर्फ उद्योग प्रभावित होगा, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका भी संकट में आ जाएगी। ज्ञापन देने वालों ने मंत्री नितिन गडकरी के हथौड़े वाले बयान को वापस लेने की मांग की व कहा कि यह व्यापारियों का अपमान है। ज्ञापन पर एसोसिएशन के अध्यक्ष की ओर से हस्ताक्षर कर प्रशासन से आग्रह किया गया कि जमीनी हकीकत को समझते हुए नियमों में व्यवहारिक संशोधन किया जाए, ताकि सुरक्षा भी बनी रहे और परंपरागत कारीगरों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation इस्कॉन कोवे में नित्यानंद त्रयोदशी महोत्सव, भक्ति-कीर्तन और प्रवचन से गूंजेगा वातावरण न्यू उदयपुर मार्केट एसोसिएशन : चन्द्र प्रकाश सिंघवी अध्यक्ष, राजेश लोढ़ा सचिव निर्विरोध