24 News Update उदयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ संकेत दे दिया है कि सिनेमा की चकाचौंध के पीछे छिपी कथित आर्थिक धोखाधड़ी को इस स्तर पर हल्के में नहीं लिया जा सकता। करोड़ों रुपये की ठगी के चर्चित मामले में फिल्ममेकर विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और सह-आरोपी मेहबूब अंसारी को अदालत से कोई राहत नहीं मिली। जस्टिस विनोद कुमार भारवनी की पीठ ने जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए माना कि जांच की मौजूदा अवस्था में बेल देना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत के समक्ष राज्य की ओर से रखे गए तर्कों ने यह तस्वीर उभारी कि मामला केवल कारोबारी असहमति का नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध का है। अभियोजन ने बताया कि जांच अभी निर्णायक मोड़ पर है, महत्वपूर्ण पूछताछ शेष है और गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका भी सामने आई है। ऐसे में आरोपियों को रिहा करना जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है।फर्जी बिल, अलग-अलग नाम और पैसों की घुमावदार राहजांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अलग-अलग नामों से फर्जी बिल तैयार कर शिकायतकर्ता से रकम ट्रांसफर करवाई। यह राशि विभिन्न खातों में पहुंचाई गई और फिर अपने ही खातों में डालकर निजी देनदारियां चुकाने में उपयोग की गई। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 4.23 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग खातों में मंगवाई गई, जिसमें से करीब 1.65 करोड़ रुपये सीधे आरोपियों के खातों में समाहित पाए गए।विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि सह-आरोपी मेहबूब अंसारी की भूमिका केवल नाममात्र नहीं, बल्कि सक्रिय और प्रभावी रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, यदि इस चरण में जमानत दी गई तो साक्ष्यों और गवाहों पर असर पड़ने का वास्तविक खतरा है। 30 करोड़ की कहानी, चार फिल्मों का सपनामामले की जड़ें उदयपुर में दर्ज उस एफआईआर से जुड़ी हैं, जिसमें इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और इंदिरा आईवीएफ के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने फिल्म उद्योग से जुड़े आठ लोगों पर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार इवेंट के जरिए संपर्क बना और बायोपिक के प्रस्ताव से बात आगे बढ़ी। मुंबई के स्टूडियो में हुई मुलाकातों के बाद चार फिल्मों का पैकेज सामने रखा गया—47 करोड़ की लागत, 100 से 200 करोड़ तक मुनाफे का वादा। आरोप है कि इस भरोसे के आधार पर विभिन्न कर्मचारियों और सहयोगियों के खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई। अलग-अलग चरणों में करीब 2.45 करोड़ रुपये और एक एंटरटेनमेंट कंपनी के जरिए 42.70 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। दो फिल्में रिलीज, दो अधूरी—और सवाल अधूरे नहींहकीकत यह रही कि चार में से केवल दो फिल्में रिलीज हो सकीं। तीसरी फिल्म आंशिक रूप से बनी और चौथी पर काम शुरू तक नहीं हुआ। शिकायत में आरोप है कि चौथी फिल्म के नाम पर करीब 25 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। यही वह बिंदु है जहां सपनों की पटकथा, अदालत की फाइलों में धोखाधड़ी के कथानक में बदल गई। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय में वेस्ट ज़ोन इंटर यूनिवर्सिटी बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आग़ाज़ 3 से गणेशपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिली शैक्षणिक सामग्री