24 News Update उदयपुर वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 का समापन अपने अंतिम दिन एक यादगार अंदाज़ में हुआ, जहाँ उदयपुर (ज़िंक सिटी) के प्रतिष्ठित खुले मंचों पर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत का समृद्ध संगम देखने को मिला। हिंदुस्तान ज़िंक के सहयोग से और सहर द्वारा परिकल्पित व प्रस्तुत यह फ़ेस्टिवल, राजस्थान सरकार तथा पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित इस फ़ेस्टिवल ने अपनी 10 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का समापन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संगीत विविधता का उत्सव मनाती प्रस्तुतियों के साथ किया। फ़ेस्टिवल के अंतिम दिन की शुरुआत मांझी घाट (अम्ब्राई घाट) पर सुबह 9:00 बजे से आयोजित संगीत प्रस्तुतियों के साथ हुई, जहाँ दर्शकों को दिन की एक शांत और भावपूर्ण शुरुआत का अनुभव मिला। सत्र की शुरुआत सिद्धार्थ बेलमन्नु ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति से की, जिसने श्रोताओं को सुकून भरे और चिंतनशील वातावरण में ले गया। इसके बाद स्पेन से आए फ्रॉम फ़ादर टू सन: फ़्लैमेंको की प्रस्तुति हुई-एक ऐसी विरासत जो पीढ़ियों से आगे बढ़ती आई है। उन्होंने घाट पर स्पेनिश फ़्लैमेंको की आत्मीय परंपराओं को जीवंत किया, जहाँ ताल, सुर और भावनाओं का सुंदर संगम झील के शांत वातावरण के बीच देखने को मिला। जैसे ही फ़ेस्टिवल दोपहर के सत्रों की ओर बढ़ा, फ़तेह सागर पाल पर दोपहर 3:30 बजे से शुरू हुई प्रस्तुतियों ने दिन में गहराई और वैश्विक रंग जोड़ा। पोलैंड के वोलोसी ने पोलिश लोक संगीत की अपनी ऊर्जावान व्याख्या से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोपहर के सत्र का समापन इंडियन ओशन की प्रस्तुति से हुआ, जो भारतीय फ़्यूज़न रॉक के अग्रदूत हैं। लोक, रॉक और आध्यात्मिक तत्वों के उनके विशिष्ट मिश्रण ने झील के किनारे मौजूद दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया। फ़ेस्टिवल का समापन शाम 6:00 बजे से गांधी ग्राउंड पर आयोजित प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जहाँ जोश से भरपूर और समकालीन संगीत ने उत्सव को सजीव अंत दिया। स्पेन के फ़्लैमेंको ड्रीम ने स्पेनिश जैज़ और पॉप के अपने उत्साहपूर्ण मिश्रण के साथ शाम की शुरुआत की। इसके बाद चिली के कैल माम्बो ने लैटिन तालों के ऊर्जावान संगम से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। फेस्टिवल की अंतिम प्रस्तुति देश के प्रसिद्ध संगीतकार और लाइव परफ़ॉर्मर अमित त्रिवेदी की रही, जिनकी लोकप्रिय बॉलीवुड रचनाएँ, विशिष्ट संगीत शैली और ऊर्जा से भरपूर लाइव परफ़ॉर्मेंस ने सुर और लय का शानदार संगम पेश किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों की ज़बरदस्त भागीदारी सुनिश्चित करते हुए वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 का भव्य और प्रभावशाली समापन किया। फ़ेस्टिवल के अंतिम दिन पर अपने विचार साझा करते हुए, अरुण मिश्रा, सीईओ, हिंदुस्तान ज़िंक, ने कहा, “हिंदुस्तान ज़िंक में हम कला और संस्कृति की उस शक्ति का उत्सव मनाते हैं, जो लोगों को एक साथ जोड़ती है। हमें इस प्रतिष्ठित तीन दिवसीय फ़ेस्टिवल के 10वें वर्ष का समर्थन करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जिसने ज़िंक सिटी—उदयपुर में वैश्विक कलाकारों और कालजयी परंपराओं को एक मंच पर लाया। राजस्थान की समृद्ध संगीत विरासत के साथ इन प्रतिभाओं का संगम देखना बेहद प्रेरणादायक रहा, जिसने राज्य की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को उजागर किया। इस वैश्विक संगम ने उदयपुर को एक प्रमुख संगीत केंद्र के रूप में और मजबूत किया है। हम आने वाले वर्षों में इस उल्लेखनीय साझेदारी को और गहराई देने तथा संगीत की इस परिवर्तनकारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।” फ़ेस्टिवल के समापन पर अपने विचार साझा करते हुए, सहर’ के फ़ाउंडर संजीव भार्गव ने कहा, “फ़ेस्टिवल का समापन हमेशा भावनात्मक होता है, खासकर तब जब हम वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल के दस वर्षों का सफ़र पूरा कर रहे हों। अंतिम दिन वही सब दर्शाता है, जिस पर यह फ़ेस्टिवल खड़ा है, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कलाकारों का एक साथ आना, उदयपुर के खुले स्थलों का जीवंत सांस्कृतिक मंचों में बदलना, और संगीत के ज़रिये लोगों का स्वाभाविक रूप से जुड़ना। आगे के सफ़र की ओर देखते हुए, यह संस्करण हमारे इस विश्वास को और मज़बूत करता है कि ऐसे माहौल में अनुभव किया गया वैश्विक संगीत, फ़ेस्टिवल से कहीं आगे तक यादों में बना रहता है।” तीन दिनों तक चले वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 में दुनिया भर के कलाकारों ने अपनी-अपनी अनोखी आवाज़ के साथ इस उत्सव को समृद्ध किया। नॉर्वे के 9 ग्रेडर नॉर्ड ने नॉर्वेजियन और तमिल फ़ोक रॉक का विशिष्ट संगम प्रस्तुत किया, वहीं अल्जीरिया के सोफियान सैदी ने अपनी भावपूर्ण राय (Rai) प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कैलाश खेर और कैलासा लाइव ने लोक–सूफ़ी संगीत और आत्मा को छू लेने वाली गायकी से श्रोताओं को बांधे रखा। सुबह की शुरुआत राधा बुबुक्वार की सधी हुई लाइट क्लासिकल प्रस्तुति से हुई, जबकि फ़्रांस की लेस इतिनेरेंटेस ने अपनी कोमल अकापेला शैली से संगीत में नज़ाकत जोड़ी। अमृत रामनाथ की समकालीन शास्त्रीय व्याख्याओं ने श्रोताओं को गहराई से जोड़ा, वहीं केप वर्डे की लुसिबेला ने मोर्ना और कोलाडेरा रचनाओं के ज़रिये भावनात्मक ऊष्मा जोड़ी। ताबा चाके की लोक-प्रेरित धुनों ने दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया, जबकि कैमरून की वैलेरी एकौमे ने अफ़्रो-पॉप की संक्रामक तालों से माहौल में जोश भर दिया। OAFF के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप्स और जोनिता गांधी की दमदार मंच उपस्थिति व गायकी की बहुआयामी क्षमता ने फ़ेस्टिवल को एक यादगार संगीत यात्रा में बदल दिया। वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल के समापन के साथ, उदयपुर ने एक प्रमुख सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में अपनी पहचान को फिर से सुदृढ़ किया। शास्त्रीय, लोक और समकालीन वैश्विक संगीत के विविध संगम के माध्यम से इस फ़ेस्टिवल ने अंतरराष्ट्रीय संगीत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में शहर की सजीव और महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। 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