24 News Update उदयपुर। करीब दो दशक तक कानून को चुनौती देता रहा एक शातिर आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। प्रकरण संख्या 72/2008 NDPS केस उदयपुर में वांछित, 10 हजार रुपये का इनामी एवं उद्घोषित स्थायी वारंटी संतोष उर्फ इंदरसिंह उर्फ लक्ष्मण सिंह बंजारा पुत्र रोडूलाल उर्फ रोडूसिंह निवासी देपालपुरा, थाना जावद, जिला नीमच (मध्यप्रदेश) को थाना हाथीपोल पुलिस ने 19 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी वर्ष 2008 से NDPS Act धारा 8/18 (तथा प्रकरण में 8/25 का भी उल्लेख) के तहत दर्ज मामले में फरार चल रहा था। 12 गांवों का मुखिया बन बैठा शातिर, पहचान बदल दीआरोपी की शातिरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने पुलिस से बचने के लिए अपनी पूरी पहचान ही बदल डाली। वोटर आईडी से लेकर अन्य दस्तावेजों में उसने अपना नाम इंदरसिंह से बदलकर लक्ष्मण सिंह करवा लिया। इतना ही नहीं, अपनी पत्नी सायबा देवी के निर्वाचन कार्ड में भी पति का नाम बदलकर लक्ष्मण सिंह दर्ज करवा दिया, ताकि किसी भी स्तर पर उसकी असली पहचान उजागर न हो सके। पहचान बदलने के बाद वह इलाके में प्रभावशाली व्यक्ति बनकर रह रहा था और करीब 12 गांवों का मुखिया तक बन बैठा था। गांव में पुलिस के लिए ‘नो एंट्री’, सामाजिक ढांचे ने भी दिया संरक्षणजांच में यह भी सामने आया कि आरोपी जिस बंजारा समाज से जुड़ा है, वहां सामाजिक परंपराओं के चलते बाहरी लोगों—खासतौर पर पुलिस—को सही जानकारी देना आसान नहीं होता। किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस को जानकारी देने पर सामाजिक दंड का डर रहता है। यही वजह रही कि पूर्व में कई बार पुलिस टीम गांव तक पहुंची, लेकिन स्थानीय सहयोग नहीं मिलने, आरोपी द्वारा पहचान बदल लेने और ग्रामीणों के संभावित विरोध/हमले के खतरे के कारण गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी। पांच दिन की रेकी…बंजारा बनकर शादी में घुसी पुलिस, साथ बैठकर खाया खानाइस बार हाथीपोल थाना पुलिस ने रणनीति बदली और बेहद गोपनीय तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। थानाधिकारी राजु राज देवी के निर्देशन में एएसआई शंभूसिंह, हेड कांस्टेबल हेमेंद्रसिंह (नं. 1979) और कांस्टेबल कैलाश रेबारी (नं. 1112) की विशेष टीम गठित की गई।टीम के पास शुरुआत में आरोपी का फोटो, मोबाइल नंबर या कोई स्पष्ट पहचान तक नहीं थी। इसके बावजूद टीम ने आरोपी के गांव से करीब 30 किलोमीटर दूर गोपनीय रूप से डेरा डालकर पांच दिनों तक लगातार रेकी की। पुलिसकर्मी कभी बंजारा तो कभी ठेकेदार बनकर इलाके में घूमते रहे।इसी दौरान सूचना मिली कि आरोपी गांव खेड़ी दायमा में आयोजित एक शादी समारोह में आने वाला है। इस पर टीम ने बंजारा वेशभूषा, हुलिया और भाषा शैली अपनाई और शादी में आम मेहमान बनकर शामिल हो गई। वहां लोगों को आरोपी को ‘इंदरसिंह’ कहकर बुलाते सुन पुलिस ने उसकी पहचान पुख्ता कर ली। टीम के जवानों ने शक से बचने के लिए शादी में साथ बैठकर खाना तक खाया और पूरी तरह माहौल में घुलमिल गए। सीधे शादी से नहीं उठाया…10 किलोमीटर दूर बिछाया जालपहचान की पुष्टि के बाद भी पुलिस ने जल्दबाजी नहीं दिखाई। शादी समारोह से आरोपी को उठाना जोखिमभरा था। ऐसे में टीम ने धैर्य रखा और सही मौके का इंतजार किया। जैसे ही आरोपी शादी से लौटकर अपने गांव की ओर निकला और करीब 10 किलोमीटर दूर पहुंचा, पुलिस ने पहले से बनाई गई रणनीति के तहत घेराबंदी कर उसे दबोच लिया और सुरक्षित उदयपुर ले आई। एसपी के निर्देश में बड़ी सफलतापूरी कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में चलाए जा रहे वांछित अपराधियों की धरपकड़ अभियान के तहत अंजाम दी गई। आरोपी पर एसपी द्वारा 10,000 रुपये का इनाम घोषित था। अब पूछताछ में खुलेंगे राजफिलहाल आरोपी को उदयपुर लाकर प्रकरण में गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि पुलिस से बचने के लिए उसने अपने नाम व पहचान से जुड़े दस्तावेज बदलवाए थे। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में और भी अहम खुलासे सामने आ सकते हैं। आरोपी को शीघ्र ही न्यायालय में पेश किया जाएगा। करीब 19 साल तक नाम, पहचान और सामाजिक ढांचे की आड़ में छिपा यह आरोपी आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया—एक बार फिर साबित हुआ कि फरारी कितनी भी लंबी क्यों न हो, कानून की पकड़ उससे भी लंबी होती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आरएनटी मेडिकल कॉलेज के नए प्राचार्य डॉ. राहुल जैन का खड़क जैन समाज ने किया सम्मान आपदा से सुरक्षा की तैयारी: रयॉन इंटरनेशनल स्कूल में अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल, छात्रों को सिखाई गई ‘PASS तकनीक’ और सुरक्षित निकासी प्रक्रिया