उदयपुर / मुंबई। हाई-प्रोफाइल विनिता जैन मौत मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने अहम स्पष्टीकरण देते हुए जांच की दिशा तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कहा है कि बंबई हाईकोर्ट की टिप्पणियां जांच को प्रभावित नहीं करेंगी और यह तय करना जांच एजेंसी का अधिकार होगा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) बनती है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हत्या की धारा FIR में जोड़ी जा सकती है और जांच उसी आधार पर आगे बढ़ेगी, लेकिन याचिकाकर्ता हिमांशु दिनेश जैन को दी गई अग्रिम जमानत जारी रहेगी। अतिरिक्त धाराओं के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने जांच चार माह में पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।
आपको बता दें िक उदयपुर निवासी हेमंत जैन की पुत्री विनिता जैन की 25 फरवरी 2025 को पुणे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पति हिमांशु जैन ने इसे आत्महत्या बताया, जबकि परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया। पहले संगवी पुलिस स्टेशन, पुणे में आत्महत्या का मामला दर्ज हुआ था।
मामले में मोड़ तब आया जब बंबई उच्च न्यायालय ने आत्महत्या की FIR को गलत मानते हुए BNS की धारा 103 के तहत हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया और जांच महिला उपाधीक्षक स्तर की अधिकारी की निगरानी में कराने को कहा।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए हिमांशु जैन सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से स्पष्ट करते हुए कहा है कि अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी ही निकालेगी और अदालतों की टिप्पणियां आगे की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेंगी। इस फैसले के बाद जहां एक ओर परिजन निष्पक्ष जांच की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं जांच एजेंसी के सामने चार माह में मामले की सच्चाई सामने लाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
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