24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। उदयपुर फाइल्स फिल्म और उसके निर्माता अमित जानी इन दिनों चर्चा में हैं। चर्चा फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि खुद जानी के बदले-बदले सुरों की वजह से है। यह वही निर्माता हैं, जिन्होंने कुछ ही दिन पहले फिल्म की असफलता का ठीकरा हिंदू समाज पर फोड़ते हुए खुद वीडियो जारी करके उन्हें “मरी हुई कौम” तक कह डाला था। मगर अब, जब फिल्म का विदेशी रिलीज़ और प्रचार-प्रसार सामने आ रहा है, तो वही अमित जानी हिंदू समाज और कन्हैयालाल के परिवार के नाम पर सहानुभूति बटोरते नज़र आ रहे हैं। अमित जानी की उदयपुर फाइल्स कन्हैयालाल टेलर की नृशंस हत्या पर आधारित है। फिल्म दर्शकों को खींचने में असफल रही व सुपर फ्लॉप बताई जाने लगी। नतीजा यह हुआ कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जानी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि जैसे ही मदनी ने फिल्म का विरोध किया, पूरा मुस्लिम समाज समर्थन में खड़ा हो गया, मगर हिंदू समाज चादर तानकर सोया रहा।उन्होंने हिंदुओं को “मरी हुई कौम” बताया, कहा कि हिंदू अश्लील फिल्मों पर टूट पड़ते हैं, मगर कन्हैयालाल की शहादत पर बनी फिल्म के लिए न पैसे निकाले न समय।” यहां तक कह दिया कि “हिंदू खुद अपना दुश्मन है, हिंदू मरने के लिए ही पैदा हुआ है।”अमित जानी के इन शब्दों से साफ था कि वे फिल्म की असफलता का ठीकरा हिन्दु समाज पर फोड़ रहे थे और इस प्रक्रिया में अपनी भड़ास को बेहद कड़वे और अपमानजनक शब्दों में निकाल रहे थे।अब उदयपुर में सुर बदल गएलेकिन सोमवार को जब वे उदयपुर आए तो तस्वीर ही बदल गई। वे कन्हैयालाल टेलर के घर पहुंचे, परिवार से मिले, और फिर एसपी योगेश गोयल से भेंट की। अब उनकी जुबान पर नया राग आ गया। मीडिया से कहा-“हमारी फिल्म की रिलीज़ के दौरान षड्यंत्र हुआ। सिनेमाघरों को धमकियां दी गईं। बॉलीवुड में माफिया काम कर रहा है। लेकिन अब 5 सितंबर से फिल्म विदेशों में रिलीज होगी और संदेश दुनिया तक जाएगा।”यह वही जानी हैं, जो कुछ ही दिन पहले कह रहे थे कि हिंदुओं ने फिल्म को असफल बनाया, और आज वही “बॉलीवुड माफिया” और “सिनेमाघरों पर दबाव” की बात कर रहे हैं। ऐसे दोमुहे सुर वाकई चिंता में डालने वाले हैं।अवसरवाद का अनोखा नमूनाजानी का यह दोहरा रवैया साफ तौर पर अवसरवाद को दर्शाता है। जब फिल्म नहीं चली तो उन्होंने हिंदू समाज को लानत-मलामत कहा। जब विदेशों में रिलीज़ और प्रचार की संभावना बनी तो वही हिंदू समाज और कन्हैयालाल के नाम का सहारा लेकर सहानुभूति बटोरनी शुरू कर दी। असल में, यह अमित जानी का असली हुनर है। मौके के अनुसार सुर बदलना। असफलता में गुस्से से हिंदुओं को कोसना और सफलता की आस में भावुकता व संवेदनशीलता का नकाब पहन लेना। एक ओर वे कहते हैं “हिंदू खुद अपना दुश्मन है”, दूसरी ओर वही व्यक्ति खुद को “बॉलीवुड माफिया का शिकार” बताता है। इस विरोधाभास में ही उनकी असलियत छिपी है। यह घोर अवसरवादिता है। यही उनका असली कौशल और कला है। अगर अवसरवाद को भी एक कला माना जाए तो निःसंदेह अमित जानी इस विधा के “महान कलाकार” हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation नव आगंतुक छात्राध्यापकों का दीक्षारंभ समारोह आयोजित, सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन जरूरी – प्रो. सारंगदेवोत सहायक लोको पायलटों ने NWREU की RPZ शाखा को सौंपा ज्ञापन, ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2800 करने और रिस्क अलाउंस की मांग, 8वें वेतन आयोग को भेजा गया विस्तृत प्रतिवेदन