अरिहंतों से बढक़र अन्य कोई उपकारी नहीं : जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर महाराज 24 News Update उदयपुर। महावीर साधना एवं स्वाध्याय समिति अम्बामाता श्री वासुपूज्य जैन संघ में बिराजित जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज आदि ठाणा-5 की निश्रा में गुरुवार को विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हो रहे है। कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि गुरुवार को स्थानकवासी संप्रदाय में पुष्कर संप्रदाय के जिनेन्द्रमुनि आदि ठाणा-2 का महावीर साधना भवन में दो संतों का मिलन हुआ। धर्मसभा में जिनेन्द्र मुनिजी के प्रासंगिक प्रवचन के बाद जैनाचार्य रत्नसेनसूरीश्वर ने प्रवचन देते हुए कहा कि संसार में रही सभी आत्माओं का सबसे बडा शत्रु यदि कोई हो, तो वह है “कर्म “। कर्म के बन्धन के कारण ही सभी आत्माओ को चार गति रूप संसार में भटकना पडता है। इस भवभ्रमण का अंत करने का उपाय धर्म साधना है। सभी धर्म साधना का लक्ष्य कर्मों का नाश करना है। जितने प्रमाण में कर्मक्षय होता है, उतनी आत्मा निर्भय बनती है। सामान्य से पाप कर्म आत्मा को नीचे गिराता है और पुण्यकर्म आत्मा को ऊपर उठाता है। कर्म सिद्धांत के अनुसार कई पुण्य ऐसे भी है, जिनके साथ कुबुद्धि जुड़ी होने से वह स्व-पर को अहितकारी बनता है। परंतु सभी पुण्य में श्रेष्ठ पुण्य स्वरुप “तीर्थकर नाम कर्म” ऐसा पुण्य है, जिसके उदय में आने के बाद वह जगत् के सभी जीवों के लिए एकांत हितकारी बनता है। इस अवसर्पिणी काल में असंख्य आत्माएँ मोक्ष प्राप्त कर चुकी है, परंतु तीर्थंकर बनकर मोक्ष प्राप्त करने वाली आत्माएँ मात्र 24 ही हुई है। तीर्थंकर नाम कर्म के कारण ही परमात्मा को अरिहंत कहा जाता है। नवकार महामंत्र में मोक्ष प्राप्त हुई सिद्धात्माओं से भी अरिहंतों को पहले नमस्कार किया है, क्योंकि वे ही जगत् को शाश्वत सुख का मार्ग बताते है। उन्होंने जगत् के जीवों को ऐसा मार्ग बताया है, जहां जाने के बाद किसी भी प्रकार की समस्याएं ही न रहे। जहां पर न भूख है, न प्यास है, न वस्त्र की अपेक्षा है, न मकान की अपेक्षा है।क्योंकि वहाँ पर शरीर ही नहीं हैं। वह स्थान एक मात्र मोक्ष है। इस मोक्ष मार्ग को बताने वाले अरिहंतो के उपकार से बढक़र अन्य कोई भी उपकारी नहीं है। अरिहंतों के अभाव में उनके वचनों को बताने वाले गुरु भगवतों के वचनों को जिनवाणी कहा जाता है। इस जिनवाणी का श्रवण कर हमे उसे आचरण में लाकर सिध्द गति को प्राप्त करने के लिए सदा प्रयत्नशील बनना चाहिए।इस अवसर पर कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर, महावीर साधना एवं स्वाध्याय समिति अम्बामाता के अध्यक्ष प्रकाशचंद्र कोठारी, फतेहसिंह मेहता, ललित धुपिया, जसवंतसिंह सुराणा, राकेश चेलावत आदि समस्त कार्यकारिणी सदस्य भी उपस्थित रहे । Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation रेल दोहरीकरण कार्य के चलते अगस्त में कई ट्रेनें रद्द, दिल्ली सराय-उदयपुर सिटी का अटाली स्टेशन पर नहीं होगा ठहराव दिगम्बर जैन दसा नरसिंहपुरा महिला सशक्तिकरण उद्यमी मंच का गठन