24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर तथा भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले का समापन सोमवार को हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि बेगू विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ रहे, जिन्होंने किसानों से जैविक खेती, पारंपरिक ज्ञान और आत्मनिर्भर जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया।
डॉ. धाकड़ ने अपने संबोधन में कहा कि बदलाव की शुरुआत प्रत्येक किसान को अपने घर से करनी चाहिए। घरेलू उपयोग की सब्जियां और फसलें स्वयं उगाने से बाजार पर निर्भरता कम होगी और खर्च भी घटेगा। उन्होंने मनरेगा में किए गए सुधारों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि खेती-किसानी में परिवार के सदस्यों की भागीदारी बढ़ाई जाए, ताकि रोजगार घर पर ही सृजित हो और बाहरी मजदूरों पर निर्भरता कम हो। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में इस प्रकार के कृषि मेलों का आयोजन राजस्थान के प्रत्येक जिले में प्रतिवर्ष होना चाहिए, इसके लिए वे सरकार को सुझाव देंगे। साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार तभी सफल होंगे, जब वे सीधे किसानों तक पहुंचेंगे।
समारोह के विशिष्ट अतिथि विधायक उदयपुर शहर श्री ताराचंद जैन ने कहा कि किसान की मेहनत का पूरा प्रतिफल उसे मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में बढ़ती लागत और बिचौलियों के कारण किसानों की आय प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के अधिक उपयोग से लागत कम की जा सकती है और आय में वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने किसान उत्पादक समूहों के गठन, उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। साथ ही कृषक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनने और छोटे जोत वाले किसानों को कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित कर आधुनिक यंत्रों के उपयोग की सलाह दी।
समापन समारोह से पूर्व अतिथियों ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रदर्शित तकनीकों की जानकारी ली। इस अवसर पर श्री अशोक कुमार, डॉ. अरविंद वर्मा, डॉ. धृति सोलंकी, डॉ. मनोज कुमार महला, डॉ. सुनील जोशी, श्रीमती निधि धाकड़ सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एल. सोनी ने बताया कि तीन दिवसीय इस कृषि मेले में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा से 10 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया। मेले के समापन अवसर पर सह संयोजक डॉ. राजीव बैराठी ने आयोजित गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विशाखा बंसल ने किया, जबकि अंत में डॉ. आर.एल. सोनी ने सभी किसानों, अतिथियों, आयोजकों, प्रतिभागियों तथा प्रेस एवं मीडिया का आभार व्यक्त किया।
कृषक-वैज्ञानिक संवाद में समस्याओं का समाधान
मेले के दौरान आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में किसानों ने फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और विपणन से जुड़े प्रश्न पूछे। वैज्ञानिकों डॉ. वीरेन्द्र सिंह, डॉ. एन. एल. मीणा, डॉ. सी. एम. बलाई, डॉ. सी. एम. यादव, डॉ. रविकांत शर्मा, डॉ. एम. एल. ओझा, डॉ. हेमंत स्वामी एवं डॉ. श्रवण यादव ने सरल, व्यावहारिक और तुरंत अपनाने योग्य समाधान बताए। किसानों ने गेहूं में चूहों की समस्या, आम व नींबू में फूल नहीं आना, अनार में कीट प्रकोप, अफीम की जड़ में गांठ, संतरे की फसल, प्राकृतिक खेती के सर्टिफिकेट कोर्स और जानवरों के प्रकोप जैसे मुद्दे उठाए।
प्रतियोगिताएं एवं सम्मान
फसल, फल, फूल एवं सब्जी प्रदर्शन प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को 27 प्रथम और 19 द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें 26 सब्जी, 10 फसल और 10 फल उत्पादक शामिल रहे। कृषि मेले में विभिन्न विश्वविद्यालयों, कंपनियों और कृषि विज्ञान केंद्रों की 105 स्टॉलों को छह श्रेणियों में वर्गीकृत कर कुल 21 पुरस्कार दिए गए। लक्की ड्रॉ के माध्यम से 34 किसानों को नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा कृषि नवाचारों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने में योगदान देने वाले प्रेस एवं मीडिया कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले का समापन, जैविक खेती और आत्मनिर्भरता पर दिया गया जोर

Advertisements
