गो-आधारित कृषि संस्कृति, परंपरा और सतत विकास का आधार- श्री गजेन्द्र सिंह
आत्मनिर्भर किसान ही सशक्त भारत की नींव है- डॉ. प्रताप सिंह
24 News Update उदयपुर. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। समारोह के अवसर पर श्री गजेंद्र सिंह, अखिल भारतीय संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ, श्री ताराचंद जैन, विधायक उदयपुर शहर, श्री उदयलाल डांगी, विधायक वल्लभनगर, डॉ. जे.पी. मिश्रा, निदेशक, अटारी जोन-द्वितीय, जोधपुर, डॉ. एस.के. शर्मा, सहायक महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली , डॉ. आर.बी. दुबे, कुलगुरु, स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर की गरिमामयी उपस्थित रही।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु एवं समस्त उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा राजस्थान कृषि महाविद्यालय के खेल मैदान में ’’कृषि उद्यमिता कृषक आर्थिक सशक्तिकरण आजीविका सुरक्षा’’विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले क्षेत्रीय कृषि मेला का शुभारंभ किया गया । श्री गजेन्द सिंह, अखिल भारतीय संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ उद्घाटन सत्र को विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग रही है। यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारत माता और धरती माता की पूजा एवं आराधना का माध्यम है। खेती सेवा, परमार्थ और सतत विकास का प्रतीक है। प्राकृतिक खेती को सशक्त बनाने में गो-आधारित कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस क्षेत्रीय कृषि मेले में 6 राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव तथा दादर एवं नगर हवेली के किसानो, कृषक उत्पादक संगठनो, कृषि उद्यमियो,कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि संबंधी कंपनियो भाग लिया। उन्होंनेअध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कृषि अनुसंधान का उद्देश्य तभी पूर्ण होता है जब कृषि तकनीक किसानों के खेत तक पहुँचें और उनकी आय में वृद्धि हो। उन्होंने किसानों से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत बीजों, जल संरक्षण तकनीकों, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एवं आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी, जलवायु, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पारंपरिक बीजों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम लागत में बेहतर एवं टिकाऊ उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कुलपति महोदय ने समन्वित कृषि प्रणाली पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसान के पास उपलब्ध भूमि, फसल एवं पशुधन का समुचित एवं संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल सरकारी नौकरी की ओर न देखें, बल्कि कृषि उद्यमिता को अपनाकर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करें।
विशिष्ट अतिथि श्री उदयलाल डांगी, विधायक वल्लभनगर ने किसानों को उन्नत कृषि एवं पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त नवीन तकनीकों को अपनाकर लाभकारी कृषि करने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि श्री ताराचंद जैन, विधायक उदयपुर शहर ने मेले में प्रदर्शित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वृहद कृषि मेले की सराहना करते हुए सफल आयोजन हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी।
डॉ. एस. के. शर्मा सहायक महानिदेशक (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों व् विश्वविद्यालयों में विकसित तकनीकी ज्ञान को प्रदर्शन एवं मेलों के माध्यम से किसानों तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय कृषि तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और सुरक्षित खाद्य व्यवस्था बड़ी चुनौतियाँ हैं। इनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक आधार पर संवर्धित एवं प्रबंधित खेती को अपनाना होगा । डॉ. शर्मा ने किसानों से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कृषि तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की।
डॉ. आर. बी. दुबे कुलगुरु स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि जैविक खेती के लिए विकसित किस्में ही जैविक खेती में कम लागत पर बेहतर परिणाम देती हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने खेत पर ही बीज उत्पादन करें, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़े और खेती की लागत कम हो।
डॉ. जे. पी. मिश्रा, निदेशक (अटारी) ने कहा कि इस कृषि मेले से किसानों को नवीन तकनीक सीखने के अनेक अवसर मिल रहे हैं। डेयरी एवं कृषि प्रसंस्करण से नए उत्पाद तैयार करके तथा गो-आधारित खेती को अपनाकर कम लागत में अधिक लाभ कमाया जा सकता है। डॉ. मिश्रा ने किसानों से गो-आधारित, कुक्कुट एवं समन्वित खेती मॉडल को अपने खेत और घर पर अपनाने का आह्वान किया।
इसके अतिरिक्त उद्घाटन अवसर पर इंजीनियर सुहास मनोहर सदस्य प्रबंध मंडल , श्री कृष्ण मुरारी भारती, अखिल भारतीय किसान संघ के प्रमुख, श्री अशोक कुमार, कुलसचिव, मैडम दर्शना गुप्ता,वित्त नियंत्रक तथा वरिष्ट अधिकारी परिषद के सदस्यों की उपस्थिति रही।
आरंभ में मुख्य आयोजन सचिव एवं निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ. आर.एल. सोनी ने स्वागत उदबोधन देते हुए मेले के आगामी तीन दिनों में होने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. राजीव बेराठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विशाखा बंसल ने किया।
तकनीकी पुस्तक का विमोचन : कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र भीलवाडा के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित पुस्तक “सफल कृषि उधमी” का विमोचन किया गया। साथ ही कृषकों के हित में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के लिए श्री सुरेश चंद्र मीना, सहायक निदेशक, दूरदर्शन तथा श्री वीरेंद्र परिहार, कार्यक्रम अधिकारी, कृषि दूरदर्शन राजस्थान, जयपुर को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।”
प्रमुख व्याख्यान : मेले के उद्घाटन सत्र के बाद, विभिन्न विषयो क्षेत्रों के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को ये व्याख्यान दिए गए। डॉ. के. के. यादव ने मृदा जांच एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया।, डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बागवानी द्वारा आजीविका सुरक्षा पर व्याख्यान दिया, डॉ. हेमलता शर्मा ने फसलों की उन्नत किस्मों द्वारा उत्पादकता में वृद्धि पर व्याख्यान दिया, एव डॉ. जगदीश चौधरी द्वारा समन्वित कृषि प्रणाली से आय वृद्धि पर व्याख्यान दिया गया ।
फसल प्रतियोगिता में सम्मानित किसान: फसल प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न फसलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। रबी मक्का फसल में बासंवाडा के किसान श्री मोहनलाल, गेहूं फसल में प्रतापगढ़ के श्री राजेंद्र, अरंडी फसल में राजसमंद के श्री लाल सिंह तथा चना फसल में बासंवाडा के श्री मांगेलाल ने प्रथम स्थान हासिल किया।

