उदयपुर, 30 नवम्बर 2025: राजस्थान विद्यापीठ के संघटक स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के संयुक्त प्रयास से आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज कृषि भवन के सभागार में भव्य समापन हुआ।
शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को तिलहनी फसलें, कृषि अवशेष और लैंटाना खरपतवार से बायोचार निर्माण की तकनीक सिखाना और उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ परम्परागत खेती के महत्व से अवगत कराना था।
कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा:
मुख्य अतिथि और कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कार्यक्रम में कहा कि अधिक पैदावार पाने के चक्कर में रासायनिक खादों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे आमजन में नई बीमारियां फैल रही हैं। उन्होंने परम्परागत खेती की ओर लौटने और आधुनिक तकनीक के साथ इसका संयोजन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं एवं सब्सिडी का लाभ उठाकर किसान टिकाऊ और जैविक खेती को अपनाएं।
जैविक खेती और मिट्टी संरक्षण पर जोर
अध्यक्षता करते हुए भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों को जैविक और प्राकृतिक विकल्प अपनाने की सलाह दी।
प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी डॉ. आई. जे. माथुर ने बताया कि मृदा प्रदूषण आज वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौती बन चुका है। बायोचार, कम्पोस्ट और अन्य जैविक तकनीकें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और प्रदूषण कम करने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही हैं।
विशिष्ट अतिथियों डॉ. युवराज सिंह राठौड़ और डॉ. डी. पी. सिंह ने प्रशिक्षुओं को बायोचार तकनीक के फसल प्रबंधन और कृषि उत्पादकता में उपयोग पर जोर दिया और इसके नियमित उपयोग की सलाह दी।
शिविर की उपयोगिता और भविष्य की दिशा
प्रशिक्षण शिविर कृषि अवशेष प्रबंधन, बायोचार निर्माण, जैविक खेती और टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कई किसान बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जैसे कि पॉली हाउस में सब्जियों की खेती, जिससे उन्हें बेहतर आय मिल रही है।
शिविर का संचालन डॉ. सौरभ राठौड़ ने किया, जबकि आभार डॉ. एन. एस. सोलंकी ने व्यक्त किया।
इस प्रशिक्षण शिविर से विद्यार्थियों को परम्परागत खेती के तरीकों और आधुनिक कृषि तकनीक के संयोजन पर विस्तृत ज्ञान प्राप्त हुआ, जो उन्हें भविष्य में सतत और लाभकारी खेती की दिशा में मार्गदर्शन करेगा।

