- भारतीय नववर्ष: वैज्ञानिक आधार और सांस्कृतिक महत्व की तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
- सनातन नवसंवत्सर का उत्सव: शहर में धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला -उदयपुर में 18 मार्च को भगवा वाहन रैली, 22 मार्च को भव्य शोभायात्रा और धर्मसभा
24 News Update उदयपुर। भारतीय नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक कालगणना का प्रतीक है। इस वर्ष उदयपुर में भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति द्वारा होने जा रहे नवसंवत्सर उत्सव को समाज में सकारात्मक परिवर्तन के संदेश से जोड़ते हुए “पंच परिवर्तन”के संकल्प के साथ मनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य स्व का भाव, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य जैसे मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
यह जानकारी समिति के संरक्षक प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने सोमवार को होटल हिस्टोरिया रॉयल में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि स्व का भाव के माध्यम से भारतीय संस्कृति, इतिहास, विज्ञान और परंपराओं के प्रति गौरव की भावना जागृत करने का संदेश दिया जाएगा। सामाजिक समरसता के अंतर्गत सभी वर्गों के बीच समानता, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के तहत वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार में संस्कार, नैतिकता और पारिवारिक एकता को सुदृढ़ करने पर बल दिया जाएगा, जबकि नागरिक कर्तव्य के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रहित में अपने दायित्वों के प्रति जागरूक रहने और समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया जाएगा।
समिति के संयोजक डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने बताया कि पिछले चार वर्षों से उदयपुर में भारतीय नववर्ष को सर्व समाज के सहयोग से भव्य रूप से मनाया जा रहा है। इस वर्ष भी 18 से 22 मार्च तक विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
18 मार्च को चार पहिया भगवा वाहन रैली
वाहन रैली के लिए प्रवेश फतहसागर के देवाली वाले छोर से नीमचमाता वाली पुलिया की और से रहेगा।
18 मार्च को सायं 3 बजे भगवा चार पहिया वाहन रैली महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर सब-सिटी सेंटर पर समाप्त होगी। प्रस्तावित मार्ग इस प्रकार रहेगा— महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर चेतक सर्कल, पंचवटी, सुखाड़िया सर्कल, फतहपुरा, आर.के. सर्कल, भुवाणा बायपास, सुखेर चौराहा, मीरा नगर 100 फीट रोड, मेवाड़ सर्कल (शोभागपुरा), आयड़ पुलिया, विवेकानंद चौराहा, ठोकर चौराहा, एफसीआई गोदाम, अटल सभागार, नारायण सेवा संस्थान, जादव नर्सरी (सेक्टर 6), हाड़ी रानी चौराहा – सवीना होते हुए समापन स्थल सब-सिटी सेंटर पहुंचेगी।
19 मार्च को मंदिरों में धार्मिक आयोजन
19 मार्च को शहर की 73 बस्तियों के प्रमुख मंदिरों में समाज जन द्वारा महाआरती, गंगा आरती, हनुमान चालीसा पाठ सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।
20 मार्च को चेटीचंड आयोजन
भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति उदयपुर 20 मार्च को सिंधी समाज के चेटीचंड पर्व के अवसर पर निकलने वाली शोभायात्रा में भी शामिल होगी। समिति के सदस्य इस अवसर पर भारतीय नववर्ष का संदेश देते हुए समाज के साथ सहभागिता करेंगे।
21 मार्च को घोष वादन
21 मार्च को शहर के प्रमुख मंदिरों में भव्य शंखनाद एवं घोष वादन का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत बोहरा गणेशजी मंदिर, जगदीश मंदिर, गुरुद्वारा सचखंड दरबार सिख कॉलोनी, रामदेव मंदिर ठक्कर बापा कॉलोनी, जैन मंदिर सेक्टर-4 और खेड़ा देवी मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम होंगे।
22 मार्च को भव्य शोभायात्रा और धर्मसभा
22 मार्च को दोपहर 3 बजे भव्य शोभायात्रा भंडारी दर्शक मंडप (गांधी ग्राउंड) से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण पहुंचेगी। इस शोभायात्रा में मातृशक्ति मंगल कलश धारण कर मंगलाचार गाते हुए शामिल होगी। विभिन्न समाजों की लगभग 100 झांकियां, अखाड़े, धार्मिक ध्वज, ढोल-नगाड़े और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
नगर निगम प्रांगण में धर्मसभा आयोजित होगी, जिसमें कैलाश टेकरी, खमनोर के पीठाधीश ज्ञानानन्द सरस्वती महाराज तथा मांकड़ादेव धाम, झाड़ोल के पीठाधीश ब्रह्मचारी गुलाबदास महाराज का सानिध्य और आशीर्वचन प्राप्त होगा।
सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम में रेपरिया बालम फेम अशोक मंडा विश्नोई की विशेष प्रस्तुति होगी। वे राजस्थानी लोक संगीत और आधुनिक हिप-हॉप के मिश्रण के लिए जाने जाते हैं।
प्रेस वार्ता में गुरुमैया महंत श्री कुलम आश्रम, सेगरा धूनी, रकमपुरा की भुवनेश्वरी दीदी माँ ने कालगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय कालगणना अन्य कैलेंडरों की तुलना में अधिक सटीक और व्यापक है। अन्य कैलेंडरों की तिथियां विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग समय पर बदलती हैं, जबकि हिन्दू तिथियां पूरे विश्व में एक साथ लागू होती हैं। उन्होंने कहा कि लाखों वर्षों की खगोलीय गणनाएं भी इसी आधार पर की जाती रही हैं।
संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मांकड़ादेव धाम के परम पूज्य ब्रह्मचारी श्री श्री गुरु गुलाबदास महाराज ने भी भारतीय नववर्ष के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि नई पीढ़ी को गीता और भारतीय धर्मग्रंथों के अध्ययन से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान परंपरा को समझने के लिए युवाओं का धर्मग्रंथों के अध्ययन की ओर अग्रसर होना समय की आवश्यकता है।
भारतीय नववर्ष क्यों विशेष है
भारतीय कालगणना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। विक्रम संवत का प्रारंभ कलि संवत के 3044 वर्ष पश्चात माना जाता है। शक संवत, ईसवी संवत और युगाब्द संवत भी भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण कालगणनाएं हैं।
इतिहास के अनुसार चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शकों को परास्त कर भारत से खदेड़ा और इसी विजय के उपलक्ष्य में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत का प्रारंभ हुआ।
मान्यता है कि इसी तिथि के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। भगवान विष्णु का प्रथम अवतार, भगवान श्रीराम तथा धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है।
चैत्र नवरात्रा भी इसी दिन से प्रारंभ होती है और शक्ति आराधना का पर्व मानी जाती है। सिंध प्रांत के आराध्य झूलेलाल का प्राकट्य, गुरु अंगद देव जी का जन्म तथा आर्य समाज की स्थापना भी इसी तिथि से संबंधित मानी जाती है।
वसंत ऋतु में नवसंवत्सर के आगमन से प्रकृति में नव ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है, इसलिए भारतीय नववर्ष को नवआरंभ और नवचेतना का प्रतीक माना जाता है।
पत्रकार वार्ता में गुरुमैया महंत श्री कुलम आश्रम सेगरा धुनि रकमपुरा भुवनेश्वरी दीदी मां, संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्रह्मचारी गुरु गुलाबदास महाराज, सहित समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे। समिति ने उदयपुरवासियों से भारतीय नववर्ष उत्सव में सहभागिता कर पंच परिवर्तन के संदेश को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

