24 News Update उदयपुर, 8 सितम्बर। शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल देहलीगेट पर आखिरकार सड़क पर कब्जा करके खड़े किए जाने वाले वाहनों पर पुलिस की नजर पड़ ही गई। उसके लिए भी एक हादसे का इंतजार किया गया जिसमें गुजराती पर्यटक को रेस्टोरेंट में खाना खाते समय आपसी कहासुनी में चोटिल होना पड़ा। चौराहे पर प्रमुख रेस्टोरेंटों के जलवे की ऐसी तूती बोल रही थी कि पुलिस इनके रसूख के आगे पानी भर रही थी। सामने कंटरोल रूम का जलवा था मगर इनके बाहर तो अवैध पार्किंग का इन्हीं का जलवा था। बरसों से लोग यहां पर पार्किंग को लेकर चोर—पुलिस का खेल देख रहे हैं। ज्यादा शोर होता है तो पुलिस पार्किंग हटवा कर अपनी छवि चमका देती है और शोर कम होते ही यहां रेस्टोरेंटों के वाहन पार्किंग का चौड़ी छाती करके शोर करने लग जाते हैं जिनको हटना नामुमकिन सा हो जाता है। हर बार लोग पूछते हैं कि अवैध पार्किंग का यह फेविकोल से मजबूत जोड़ आखिर बनता कैसे है??? पुलिस और प्रशासन जान बूझकर बार बार क्यों इस जगह की अनदेखी करके गहरी नींद में सोने चले जाते हैं। कोई कहता है कि आर्थिक कारण है तो कोई कहना है कि यहां के खाने की तारीस ही ऐसी है कि जो भी ‘खाता’ है वो बार बार ‘खाता’ चला जाता है।बहरहाल कल से आज तक भोजनालयों के सामने एकदम चकाचक रोड देखकर लोग चौंक रहे हैं व पूछ रहे हैं कि यहां पर भी सड़क का अस्तित्व था, यह उनको आज पता चला है। कई लोगों को तो यह हाल ही में खोजा गया सबसे एडवोंचरस प्वाइंट लग रहा है। ग्राहकों के दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित होने की लगातार शिकायतें थीं मगर मजाल कि इसके बावजूद पुलिस कोई एक्शन ले ले। लेकिन मीरा भोजनालय में गुजराती टूरिस्ट की कुटाई की खबरें आने के बाद अचानक पुलिस अपने असली वाले रोल में कैसे आ गई ये चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस के एक्शन के बाद यहां से वाहन ऐसे गायब हो गए जैसे….सिर से सींग।पुलिस की ताजा कार्रवाई के बाद फिलहाल रेस्टोरेंट के सामने सड़क खाली दिखाई दे रही है। लोग बार बार देख कर भी यकीं नहीं कर पा रहे हैं। मगर सत्य तो सामने है। पुलिस ने भी अबकी बार यह ठान लिया लगता है कि सड़क पर ग्राहकों के वाहन खड़े करवाए गए तो कार्रवाई 100 परसेंट पक्की। सबसे बड़ा सवाल: सामने था ट्रैफिक पुलिस का दफ्तरपूरे मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि देहलीगेट पर रेस्टोरेंट के सामने ही ट्रैफिक पुलिस का दफ्तर मौजूद है। दूरी इतनी कम है कि दफ्तर से कोई दहाड़ मार दे तो बाहर पब्लिक ओर्डर सुधर जाए। मगर इसके बावजूद स्थानीय मिलीभगत के चलते लंबे समय से इस सड़क पर पार्किंग के आनंद लिया जा रहे थे। कभी नेताओं के भरोसे तो कभी अफसरों के भरोसे। और ऐसे स्वादिष्ट भरोसे का सिलसिला लंबे समय से बना हुआ था।स्थानीय लोगों ने मीडिया को बताया कि विशेष आयोजनों, रैली, जुलूस या शोभायात्रा होते ही पार्किंग गायब हो जाती मगर बाकी दिनों में रेस्टोरेंट के सामने वाहनों की कतारें मैनेज कर ली जातीं। अब धानमंडी पुलिस की कार्रवाई हुई है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि ये सुनियोजित यातायात का पुलिस का चक्रव्यूह कितने समय तक सस्टेन कर पाता है। अभी तो हालत ये है कि पुलिस को वाहन खड़ा रख कर निगरानी करनी पड़ रही है कि कहीं फिर पहले जैसे हालात ना बन जाए। याने कि जो भी एप्रोच वाले हैं वे बस मामले के ठंडे होने का इंतजार कर रहे हैं। मौका मिलते ही उसके बाद फिर से मामला रफा दफा करने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाले है।धानमंडी पुलिस तो वैसे भी खुद पुलिस स्टेशन के पास के बाजार में ही हो रहे जबर्दस्त अतिक्रमण से परेशान है। धानमंडी में भी ऐसा ही खेल चलता रहता है। इधर अतिक्रमण हटा, उधर किसी नेताजी के चेल चपाटों के दबाव में फिर हो गया। अब सवाल यही है कि देहलीगेट जैसे महत्वपूर्ण चौराहे पर सड़क को पार्किंग बनने से रोकने की यह कार्रवाई स्थायी व्यवस्था का रूप लेती है या कुछ दिनों बाद फिर वही हालात लौट आते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation लेकसिटी के व्योम बने लेफ्टिनेंट, कठिन ट्रेनिंग पूरी कर उदयपुर लौटे, भव्य उम्र 65 पार मगर जज्बा शानदार, राष्ट्रीय मास्टर तैराकी में प्रतिनिधित्व करेंगे त्रिलोकी पालीवाल और इंदु शेखर व्यास