24 News update उदयपुर, 8 सितम्बर। किसी बच्चे के बचपन का सपना जब परिवार की आंखों के सामने हकीकत बनकर लौटता है, तो वह पल सिर्फ खुशी का नहीं, गर्व का भी होता है। उदयपुर में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब व्योम भट्ट ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने घर लौटे।व्योम के घर पहुंचते ही माहौल उत्सव में बदल गया। परिजनों, रिश्तेदारों, मित्रों और शुभचिंतकों ने पुष्पमालाओं से उनका स्वागत किया, मिठाई खिलाई और सैन्य जीवन की नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। परिवार के लिए यह वह क्षण था, जिसका इंतजार वर्षों से था। सपना बचपन का था, रास्ता एनसीसी ने दिखायापिता जयदीप कुमार भट्ट और माता पल्लवी भट्ट बताते हैं कि व्योम ने विद्यार्थी जीवन में ही अपना लक्ष्य तय कर लिया था। पढ़ाई के साथ वे वाद-विवाद, गायन और मंच संचालन जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहे। इन गतिविधियों ने जहां उनके आत्मविश्वास और संवाद क्षमता को मजबूत किया, वहीं नेतृत्व करने का गुण भी विकसित किया।लेकिन सेना में जाने के सपने को दिशा तब मिली, जब उन्होंने स्कूली जीवन में एनसीसी ज्वॉइन की। एनसीसी उनके लिए महज एक अतिरिक्त गतिविधि नहीं रही। यहां से उन्हें अनुशासन, समय की पाबंदी, टीम के साथ काम करने और जिम्मेदारी निभाने की वास्तविक सीख मिली। एनसीसी का ‘सी’ प्रमाण-पत्र हासिल करना उनके सैन्य सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। यही वह दौर था, जब सेना में अधिकारी बनने का सपना और मजबूत होता गया। फिर आया असली इम्तिहान। सपना देखना आसान है, लेकिन उसे वर्दी तक पहुंचाना आसान नहीं। व्योम ने भारतीय सेना में अधिकारी बनने की राह पर आगे बढ़ते हुए ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया में कठिन सैन्य प्रशिक्षण लिया। यहां केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं हुई, बल्कि मानसिक मजबूती, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता को भी लगातार परखा गया।कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब व्योम ने लेफ्टिनेंट की जिम्मेदारी हासिल की तो उनके वर्षों के प्रयास को मंजिल मिल गई। बेटे को वर्दी में देख भावुक हुआ परिवारमाता पल्लवी भट्ट के लिए बेटे की यह उपलब्धि भावुक कर देने वाली रही। परिवार के मुताबिक व्योम ने सेना में जाने के लक्ष्य को कभी महज सपना नहीं रहने दिया। पढ़ाई के साथ खुद को तैयार किया और लगातार उसी दिशा में आगे बढ़ते रहे। परिवार के लिए सबसे गर्व का क्षण तब आया, जब सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद व्योम लेफ्टिनेंट की वर्दी में घर लौटे।माता-पिता के लिए बेटे की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, उम्मीद और विश्वास का परिणाम है। ‘जिम्मेदारी बड़ी है, पूरी निष्ठा से निभाऊंगा’स्वागत से अभिभूत लेफ्टिनेंट व्योम भट्ट ने परिवार और शुभचिंतकों के स्नेह के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा करना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। देश की सेवा और रक्षा के इस दायित्व को वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उदयपुर के युवाओं के लिए एक मिसालव्योम भट्ट की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। बचपन का सपना, एनसीसी का अनुशासन, पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास, कठिन सैन्य प्रशिक्षण और आखिरकार सेना की वर्दी— यह पूरा सफर बताता है कि लक्ष्य स्पष्ट हो तो तैयारी भी उसी स्तर की करनी पड़ती है। व्योम की उपलब्धि ने उनके परिवार को गौरवान्वित करने के साथ उन युवाओं के सामने भी एक उदाहरण रखा है, जो सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मल्लातलाई फायरिंग का मुख्य आरोपी शेरा गिरफ्तार, बाल अपचारी डिटेन, तीन दिन से फरार आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा, बाल अपचारी से पिस्टल और वारदात में प्रयुक्त बाइक जब्त देहलीगेट पर पार्किंग के चक्रव्यूह में पुलिस ने किया प्रवेश!!! लोग बोले—देखते हैं कितनी दिन रहता है जलवा!!