24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। एक बार फिर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का चक्की पिसिंग एटीट्यूड सिर्फ और सिर्फ अस्थायी कर्मचारियों के प्रति देखने को मिल रहा है। स्थायी कर्मचारियों को 8 से 1 बजे तक काम करने का कूल कूल आदेश है जबकि स्थायीकरण के लिए लंबा आंदोलन कर रहे एसएफएबी कर्मचारियों से दूज परांत करते हुए 8 से 3 बजे तक का हॉट चक्की पिसिंग शेड्यूल जारी किया गया है जो चर्चा का और गंभीर आलोचना का विषय बन गया है। इस शेड्यूल में किसी भी प्रकार का ब्रेक लेने की भी मनाही कर दी गई है। यह गर्मी क्यों दिखाई जा रही है या इसे समझना मुश्किल नहीं है। ये वे कर्मचारी हैं जो बरसों से संविदा जैसी नौकरी बहुत कम तनख्वाह पर कर रहे हैं। जिम्मेदारियों स्थायी कार्मिको जितनी व कई मामलों में उनसे भी बहुत ज्यादा है। याने काम के बोझ के मारे इन कर्मचारियों को उतना भी वेतन नहीं मिल रहा जितना इस पद पर कार्यरत स्थायी लोगों को मिल रहा है। हर महीने एक ही चिंता सताती है कि पिछले महीने का उनका परिश्रम आखिर कब तक तनख्वाह में तब्दील होकर आएगा और झुलस रही उनकी जिंदगी की गाड़ी को कुछ पलों की ठंडक मिल पाएगी। इनके साथ कोई नहीं है यह आंदोलनों से साबित हो चुका है। जन प्रतिनिधि आंदोलन में कुछ समय के लिए साथ आए मगर जब हाईपावर प्रेशर उपर से आया तो उन्होंने भी अब दस्तूरी सहयोग देते रहने और टरकाने की लॉग टर्म नीति अपना ली है। इसी प्रकार का एटीट्यूट सत्तापक्ष के प्रभावी लोग भी अपना चुके हैं। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठन (संविदा/एसएफएबी) भारतीय मजदूर संघ , उदयपुर की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी समय परिवर्तन प्रातः 8 बजे से 3 बजे तक वाले आदेश का विरोध जताया गया। कहा गया कि स्थाई कर्मचारियों का समय तो 8 बजे से 1 बजे तक रहेगा तो विश्विद्यालय में कार्य कर रहे करीब 300 अस्थाई कर्मचारियों का समय प्रातः 8 से 3 बजे तक क्यों व किस आधार पर किया गया। यह नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत की खुली अवहेलना है। एक तरफ सरकार इस भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों कॉलेजों एवं अन्य विभागों में समय परिवर्तन कर रही हे और पानी ओर भीषण गर्मी से आमजन परेशान न हो पानी एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध करा रही है तो विश्विद्यालय प्रशासन इन 300 कर्मचारियों को भीषण गर्मी में 3 बजे सड़कों पर पैदल चलने, साइकिल व बाइक चलाने पर मजबूर कर रहा हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी इस भीषण गर्मी से आहत होगा उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, विश्विद्यालय प्रशासन या राज्य सरकार। राज्य सरकार ओर स्थानीय संभागीय आयुक्त व कलेक्टर अब इसे गंभीरता से लें। कर्मचारियों की मांग है कि सालभर विश्विद्यालय में समय 10 से 5 का रहता हैं। वह लागू किया जाय। इस भीषण गर्मी में मई व जून में 8 से 3 बजे का समय तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों को अप्रैल माह का भुगतान भी नहीं किया गया है। आज तक ना ही प्रशासनिक स्वीकृति और ना ही वित्तीय स्वीकृति जारी हुई।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या खुन्नस किसी को है कि सेलरी देने के आदेश तो समय पर नहीं आते मगर भीषण गर्मी में समय बदली वाले सख्त आदेश तुरंत जारी हो जाते हैं। उंचे पदों पर बैठा ऐसा कौन है जिसे यह सामान्य अंतर भी नहीं दिखाई देता कि स्थायी कर्मचारियों का समय अलग है व संविदा वालों का अलग। आखिर क्यों है? इस मामले में जब तक उच्च स्तर पर दखल नहीं होता, तब तक यह ढर्रा बदलेगा इसकी संभावना कम ही है। कुछ कर्मचारियों के परिजनों का कहना है कि अब तो घर चलाना तक मुश्किल होता जा रहा है। महीना खत्म होते ही मुश्किलें सताने लगती है। राशन-पानी से लेकर बच्चों की फीस तक पर गहरा संकट खड़ा हो जाता है। यह सिलसिला अंतहीन हो चला है जो मानसिक रूप से गहरा तनाव पैदा कर रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation यूडीए की कार्रवाई: बेडवास में प्राकृतिक नाले से हटाया गया अतिक्रमण, की गई पूरी सफाई आमजन में भय : होटल राधाकृष्ण पर बदमाशों ने बोला धावा, तीन लोग गंभीर घायल, जमकर मचाया उत्पात