24 News Upate. udaipur राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान के नेतृत्व में शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल जनजाति आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़ से मिला और अपनी व्यथा ज्ञापन के माध्यम से प्रस्तुत की। उनकी मांग स्पष्ट थी—1903 समायोजित शिक्षकों और 1172 वंचित शिक्षकों को उनके गृह जिले में वापस भेजा जाए।
अधिशेष शिक्षकों की दुर्दशा: वेतन संकट और अधिकारों से वंचित
पिछले वर्ष राज्य सरकार ने इन 1903 शिक्षकों को उदयपुर संभाग के नॉन-टीएसपी क्षेत्र में समायोजित किया था, लेकिन कई विद्यालयों में पहले से ही पर्याप्त शिक्षक मौजूद होने के कारण ये शिक्षक अधिशेष की स्थिति में आ गए।
अधिशेष शिक्षकों की यह स्थिति न केवल उनकी पेशेवर असुरक्षा को दर्शाती है, बल्कि उनके वित्तीय संकट को भी उजागर करती है। वेतन का अनियमित भुगतान, ऑनलाइन आवेदन की असुविधा और अन्य प्रशासनिक अड़चनें इन्हें मानसिक व आर्थिक रूप से कमजोर बना रही हैं। कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो महीनों से अपने वेतन के इंतजार में संघर्ष कर रहे हैं।
स्थानीय युवाओं की नाराजगी: रोजगार के अवसरों पर संकट
वर्तमान में चल रही तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत स्थानीय युवाओं को अपने ही संभाग से बाहर जाना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि टीएसपी क्षेत्र से समायोजित शिक्षकों को पद रिक्त न होने के बावजूद गैर-टीएसपी क्षेत्र में पदस्थापित कर दिया गया। इससे स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं, जिससे वे आक्रोशित हैं।
शिक्षक संघ का मानना है कि यदि समायोजित शिक्षकों को उनके गृह जिले में भेजा जाता है, तो इससे न केवल शिक्षकों की समस्या हल होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
सरकार से न्याय की गुहार
शिक्षकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें उनके गृह जिलों में समायोजित किया जाए ताकि वे अपनी सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रख सकें और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें। इसके अतिरिक्त, संगठन ने मांग की है कि टीएसपी क्षेत्र के मूल निवासी शिक्षक, जो नॉन-टीएसपी क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें पुनः टीएसपी क्षेत्र में भेजा जाए ताकि बालकों के शैक्षणिक हित सुरक्षित रह सकें।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के प्रमुख सदस्य रहे उपस्थित
इस ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया के दौरान राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन व्यास, उदयपुर जिला अध्यक्ष सतीश जैन, राम अवतार गुर्जर, सुभाष बिश्नोई, नरेंद्र अवाना, नरेश राव, हितेन्द्र दवे, सुनील, अमित कल्याण, भानु प्रताप सिंह, सुनीता शर्मा, सीमा शर्मा, गार्गी चौधरी, बबीता चौधरी समेत कई शिक्षक नेता मौजूद रहे।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इन शिक्षकों की मांगों पर ध्यान देगी? क्या वे अपने गृह जिले में लौट सकेंगे? या फिर यह आंदोलन लंबा खिंचता रहेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

