अशोक नगर में चातुर्मासिक धर्मसभा में उमड़ रहा है सकल दिगम्बर जैन समाज– मुनिश्री का पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट सहित हुए विविध धार्मिक अनुष्ठान24 News Update उदयपुर, 22 अगस्त। श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति एवं वर्षायोग समिति के तत्वावधान में श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, उदासीन आश्रम, अशोक नगर में मुनि अरहसागर महाराज एवं मुनि सुहित सागर महाराज के सान्निध्य में चातुर्मास के तहत विभिन्न धार्मिक आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जारी हैं। मंदिर परिसर में आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने धर्मलाभ लिया।चातुर्मास समिति अध्यक्ष महेंद्र टाया ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके पश्चात आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री का पाद-प्रक्षालन कर श्रीफल एवं शास्त्र भेंट किए तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। आहारचर्या भी सानंद संपन्न हुई। चातुर्मास के दौरान नित्य नियम पूजन, जलाभिषेक एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।धर्म प्रभावना समिति अध्यक्ष कुंथु कुमार जैन एवं मीडिया प्रभारी रमेश वैद ने बताया कि धर्मसभा में मुनि श्री अरहसागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के 16वें श्लोक का भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक विवेचन किया। उन्होंने बताया कि संसार का दीपक बाहर प्रकाश करता है, जबकि प्रभु का ज्ञान-दीप जीव के भीतर आत्मप्रकाश जगाता है। मुनिश्री ने कहा कि श्लोक में भगवान को अनोखे दीपक की उपमा दी गई है। संसार का सामान्य दीपक तेल, बाती और अग्नि के सहारे जलता है, लेकिन प्रभु का ज्ञान-प्रकाश किसी बाहरी साधन पर निर्भर नहीं होता। उनका प्रकाश अनंत, निर्मल और स्वयं प्रकाशित है। जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर कर चारों ओर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार भगवान का सम्यक् ज्ञान संसार के अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करता है। उन्होंने कहा कि प्रभु के ज्ञान का प्रकाश किसी एक व्यक्ति या स्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समस्त जीवों को सत्य, अहिंसा एवं आत्मकल्याण का मार्ग दिखाता है। प्रभु के चरणों का आश्रय लेने वाला जीव मोह, अज्ञान और भ्रम के अंधकार से निकलकर आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है। प्रभु स्वयं किसी से कुछ लेते नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और वीतरागता के माध्यम से जीव को अपने भीतर के प्रकाश को पहचानने की प्रेरणा देते हैं। मुनिश्री ने कहा कि “तन मिला है तो तप करो, कर्मों का नाश करो। रवि-शशि से भी अधिक दिव्य प्रकाश प्रभु के ज्ञान में है।” वीतराग प्रभु की ज्ञान-ज्योति से जगमगाता आत्मकल्याण का पथ जीव को अपने वास्तविक स्वरूप की पहचान कराता है। प्रभु का ज्ञान-दीप आत्मा के अंधकार में आशा की किरण बनकर जीवन को सत्य एवं कल्याण की दिशा प्रदान करता है। शाम 6.30 बजे गुरु भक्ति का आयोजन हुआ। इसके बाद छहढाला जी का प्रवचन एवं आरती संपन्न हुई।पंडित भुवनेश शास्त्री ने बताया कि इस अवसर पर धर्म प्रभावना समिति अध्यक्ष कुंथु कुमार गणपतोत, चातुर्मास समिति अध्यक्ष महेंद्र टाया, प्रकाश अखावत, राजेंद्र अखावत, मीडिया प्रभारी रमेश वैद, शशिकांत शाह, कैलाश गंगवाल, नरेंद्र टाया, जगदीश जैन, मनोज कमावत, पारस शाह, हेमंत बोहरा, मनीष गोदावत, अशोक डवारा, दिनेश सोनी, अर्चना पटवारी, सर्वेश जैन, प्रभा टाया, इंदिरा डवारा, कल्पना गागांवत, निर्मला वेद, मंजू शाह, सरोज बोहरा, संगीता डवारा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर नगर निगम चुनाव में माकपा ने कसी कमर, 6 वार्डों में उम्मीदवार उतारने का प्रस्ताव, भाजपा को हराने के लिए वामपंथी और प्रगतिशील ताकतों को एकजुट करने का फैसला जोगपोल मंडी के नाल उदयपुर स्थित सगस जी बावजी के जन्मोत्सव पर भक्तों की दर्शनों के लिए लगी लंबी कतार