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कफ सिरप पर केंद्र की बड़ी चेतावनी: दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की दवा न दें, मध्यप्रदेश-राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद हेल्थ एडवाइजरी जारी

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24 News Update नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देशभर में एक अहम स्वास्थ्य परामर्श (Health Advisory) जारी करते हुए दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को कफ सिरप या खांसी-जुकाम की दवाएं न देने की सलाह दी है। यह कदम मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से जुड़े 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद उठाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच में सिरप में कोई जहरीला रसायन नहीं मिला। मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) ने कहा कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से बचना चाहिए। यदि बड़े बच्चों को यह दवा दी जाए, तो उन्हें कड़ी चिकित्सकीय निगरानी में और सीमित अवधि के लिए ही दवा दी जानी चाहिए।
DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य संस्थान, क्लिनिक और चिकित्सा केंद्र सिर्फ प्रमाणित कंपनियों की फार्मास्युटिकल-ग्रेड दवाएं ही खरीदें और उपयोग करें। यह दिशा-निर्देश देशभर के सरकारी अस्पतालों, जिला चिकित्सा केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल स्टोर्स में लागू होंगे।

सिरप के नमूनों में खतरनाक केमिकल नहीं मिला
मंत्रालय ने बताया कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में हुई मौतों की जांच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे विषैले रसायन नहीं पाए गए। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO)** ने संयुक्त रूप से सिरप, खून और अन्य सैंपल की जांच की।
इसके अलावा NIV, पुणे ने एक मामले में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की पुष्टि की है।

तमिलनाडु सरकार की त्वरित कार्रवाई
मध्यप्रदेश से सूचना मिलने के बाद तमिलनाडु सरकार ने 24 घंटे में जांच पूरी कर ली। वहां कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) में 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसके बाद तमिलनाडु में इस सिरप के निर्माण और बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया। राज्य में थोक और खुदरा स्टॉक जब्त कर सील किए गए हैं।

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