उदयपुर, 22 सितंबर। सूरजपोल थाना क्षेत्र के स्वराज नगर बीड़ा स्थित शिव मंदिर में शिवलिंग खंडित किए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद जमीन के मालिकाना हक और दस्तावेजों की जांच तक पहुंच गया है। दाऊदी बोहरा जमात ने संबंधित भूमि को अपना कब्रिस्तान बताते हुए जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। समाज का दावा है कि यह जमीन ‘सैफी बाग’ कब्रिस्तान के नाम से जानी जाती है और लंबे समय से बोहरा समुदाय के कब्जे एवं उपयोग में है।दाऊदी बोहरा जमात के लीगल कन्वीनर अल्ताफ हुसैन खारा की ओर से आज प्रेसवार्ता में बताया गया कि गृह मंत्री, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक, एसडीओ गिरवा, नगर निगम आयुक्त और तहसीलदार गिरवा को दिए गए ज्ञापन में घटनाक्रम की एसओजी अथवा विशेष टीम से जांच कराने की मांग की गई है। समाज ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि जब तक भूमि के स्वामित्व और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विवादित स्थल पर किसी भी तरह का नया निर्माण नहीं कराया जाए। बोहरा समाज ने बताया अपनी निजी संपत्तिसमाज की ओर से दिए गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि मोगरावाड़ी-सैफी बाग, खांजीपीर क्षेत्र की यह भूमि बोहरा समुदाय की निजी संपत्ति है। समाज का कहना है कि यह संपत्ति मेवाड़ रियासत के समय समुदाय ने खरीदी थी और 1931 से अब तक समुदाय का इस पर कब्जा रहा है। इसे सैफी बाग कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता है और समाज के अनुसार यह राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ में भी पंजीकृत है। समाज ने दावे के समर्थन में प्रशासन को पूर्व में दिए गए पत्रों का भी उल्लेख किया है। ज्ञापन के अनुसार 9 जनवरी 2022 और 17 सितंबर 2025 को कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर इस संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में कार्रवाई का आग्रह किया गया था। अतिक्रमण के पुराने विवाद का भी हवालाबोहरा समाज ने कहा है कि इस भूमि पर पहले भी अतिक्रमण के प्रयास हुए हैं। समाज के अनुसार पूर्व में कुछ लोगों ने यहां टीनशेड और कच्ची सड़क बनाने का प्रयास किया था, जिस पर नगर निगम की ओर से हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। समाज का आरोप है कि अब मंदिर निर्माण और शिवलिंग खंडित किए जाने की घटना को लेकर पैदा हुए माहौल के बीच उसी भूमि पर दोबारा निर्माण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। समाज ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी सुनियोजित साजिश की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। कहा गया कि देवकी काका व भू माफिया धार्मिक आड़ में अशांति फैला कर जमीन पर विवार करना चाहते हैं। 2019 के ड्रोन वीडियो का दिया हवालाबोहरा समाज ने वर्ष 2019 में तहसीलदार की अनुमति से बनाए गए ड्रोन वीडियो का भी हवाला दिया है। समाज का दावा है कि उस समय बनाए गए वीडियो में संबंधित परिसर में कोई मंदिर मौजूद नहीं था। इसी आधार पर समाज ने प्रशासन से पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नगर निगम के दस्तावेज, मौके की स्थिति और पूर्व के फोटो-वीडियो सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में सवाल भी उठाया गया है कि यदि संबंधित स्थान तक आने-जाने का कोई स्थापित रास्ता नहीं था तो वहां मंदिर का निर्माण कब और किसकी अनुमति से हुआ। समाज ने मंदिर निर्माण, मूर्ति स्थापना, बाद में शिवलिंग खंडित किए जाने और इसके बाद बने साम्प्रदायिक तनाव—इन सभी घटनाक्रम को एक साथ जोड़कर जांच करने की मांग की है। धार्मिक स्थल निर्माण के नियमों का दिया हवालाबोहरा समाज ने अपनी शिकायत में राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम, 1954 का भी उल्लेख किया है। इस कानून के तहत सार्वजनिक धार्मिक भवन के निर्माण के लिए कलेक्टर की लिखित अनुमति का प्रावधान है और आवेदन से पहले संबंधित स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति लेने की प्रक्रिया निर्धारित है।समाज का कहना है कि विवादित भूमि यदि उसके स्वामित्व वाली संपत्ति है तो उसके दस्तावेजों और अधिकारों की जांच किए बिना वहां निर्माण को लेकर कोई निर्णय नहीं किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उसने प्रशासन से पहले भूमि की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। गिरफ्तार व्यक्ति और घटनाक्रम की भी जांच की मांगबोहरा समाज ने ज्ञापन में शिवलिंग खंडित करने के मामले में गिरफ्तार किए गए मुस्लिम युवक की भूमिका और उसके घटनास्थल तक पहुंचने की परिस्थितियों की भी जांच की मांग की है। समाज का सवाल है कि यदि संबंधित संपत्ति में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध और रास्ते की स्थिति स्पष्ट है, तो आरोपी वहां कैसे पहुंचा। ज्ञापन में मोबाइल टावर लोकेशन, घटनास्थल पर मौजूदगी, सीसीटीवी या अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच की मांग भी की गई है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि मंदिर निर्माण किसके निर्देश या अनुमति से हुआ और घटना से पहले वहां धार्मिक ढांचा या मूर्ति वास्तव में मौजूद थी या नहीं। जांच पूरी होने तक निर्माण रोकने की मांगबोहरा समाज ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि के स्वामित्व और सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच पूरी होने तक विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जाए। समाज ने प्रशासन से पहले से दी गई मंदिर निर्माण और रास्ता बनाने संबंधी अनुमति की भी समीक्षा करने का आग्रह किया है।समाज ने कहा है कि वह कानून में विश्वास रखता है और पूरे मामले का समाधान दस्तावेजों और जांच के आधार पर चाहता है। दूसरी ओर, शिवलिंग खंडित किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर विरोध भी सामने आया था। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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