24 News Update उदयपुर। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले बुधवार को जिला कलेक्टरी पर शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ आक्रोश जताया। प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान के आह्वान पर जिलाध्यक्ष (उदयपुर प्रथम) कमलेश शर्मा और (द्वितीय) अरविन्द मीणा के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं एकत्रित हुए और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिविरा पंचांग में इस बार एक जुलाई के बजाय 21 जून से स्कूल खोलने का निर्णय प्रदेश की भौगोलिक विषमताओं की अनदेखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के दौर में विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। राजस्थान जैसे राज्य में जून माह में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है और लू के थपेड़ों के बीच विद्यालय संचालन का निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक है।
शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि विभाग छुट्टियों में कटौती जैसे फैसले तो तेजी से लागू कर रहा है, लेकिन वर्षों से लंबित मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्रदेशभर के सरकारी विद्यालयों में व्याख्याताओं, वरिष्ठ अध्यापकों और प्राचार्यों के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं। चार वर्ष पूर्व क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक विद्यालयों और महात्मा गांधी स्कूलों में आज भी स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है, वहीं पदोन्नत प्रधानाचार्य एक वर्ष से पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले 12 वर्षों से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं किए गए हैं और आज तक पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं हो पाई है। शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संगठन ने ग्रीष्मावकाश में कटौती के आदेश वापस लेने, पारदर्शी तबादला नीति लागू करने, स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने, तृतीय श्रेणी शिक्षकों की लंबित डीपीसी कराने, रिक्त पदों को शीघ्र भरने और जर्जर विद्यालय भवनों के निर्माण व मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग उठाई। इसके अलावा शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना को यथावत बनाए रखने और वर्ष 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए केंद्र स्तर पर कानून बनाने की मांग भी रखी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि सरकार 21 जून से विद्यालय संचालन पर अड़ी रहती है, तो विद्यार्थियों को गर्मी और लू से बचाने के लिए ठोस व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं तथा शिक्षकों को घटाए गए अवकाश के बदले न्यूनतम 30 पीएल देने का प्रावधान किया जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके तहत 17 मई को राजधानी जयपुर में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान नवीन व्यास, भेरूलाल कलाल, सुभाष बिश्नोई, सोहन गरासिया, चंद्रशेखर परमार, रूपलाल मीणा, गोपी कुमावत, सीमा शर्मा, लीला प्रजापत, ईश्वर सिंह राठौड़, प्रेम बैरवा, सत्यनारायण गुर्जर, प्रेम सिंह भाटी, चेतराम मीणा, गोपाल लक्ष्यकार, हितेश लबाना, लोकेश डामोर, निकेश मीणा सहित संगठन के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
छुट्टियों में कटौती के खिलाफ शिक्षकों का उग्र प्रदर्शन: रिक्त पदों, जर्जर स्कूलों और लंबित मांगों पर सरकार को घेरा

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