24 News Update उदयपुर। आज राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने ग्रीष्मावकाश में कटौती के निर्णय का कड़ा विरोध जताते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर सीताराम जाट को टॉउन हॉल में कार्यक्रम के दौरान ज्ञापन सौंपकर तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश के हजारों शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है तथा विद्यालयों में शिक्षकों, व्याख्याताओं एवं प्रधानाचार्यों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। साथ ही कई विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। चौहान ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए समय बढ़ाना समाधान नहीं, बल्कि पर्याप्त स्टाफ नियुक्ति और भौतिक संसाधनों का निर्माण आवश्यक है। ग्रीष्मावकाश में कटौती को प्रदेश की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के विपरीत बताते हुए कहा कि 21 जून से 30 जून के बीच राजस्थान में तापमान 45 से 50 डिग्री तक रहता है और तेज लू चलती है, जो विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि
21 जून से विद्यालय खोलने के आदेश को तत्काल वापस लिया जाए, शिविरा पंचांग में संशोधन कर पूर्व की भांति 1 जुलाई से विद्यालय संचालन प्रारंभ किया जाए साथ ही सात सूत्रीय मांग पत्र में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण, डीपीसी, रिक्त पदों की भर्ती, जर्जर विद्यालयों के पुनर्निर्माण, ओपीएस को यथावत, 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट की अनिवार्यत से मुक्त रखने सहित अन्य महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
संगठन ने आह्वान किया है कि यदि सरकार द्वारा मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 17 मई को जयपुर में राज्यस्तरीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान एवं प्रदेश महामंत्री गोपाल मीणा ने सरकार से ज्ञापन की सभी मांगों का शीघ्र निस्तारण कर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के हित में संवेदनशील निर्णय लेने की मांग की है
ज्ञापन के दौरान कमलेश शर्मा , सतीश जैन , भैरूलाल कलाल ,सुरेश खंड़ारिया, प्रेम सिंह भाटी व अशोक मीणा मौजूद थे ၊
ग्रीष्मावकाश में कटौती के विरोध में पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ का आक्रोश, 17 मई को जयपुर में धरना की चेतावनी

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