पटना। पटना की राजनीति में आज का दिन असाधारण हलचल से भरा साबित हो रहा है। बिहार की सत्ता के सबसे लंबे अध्यायों में से एक लिखने वाले मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अचानक ऐसा संकेत दे दिया, जिसने राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। खुद मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर घोषणा करते हुए बताया कि वे राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।

अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों—विधानसभा और विधान परिषद—के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी क्रम में वे इस बार राज्यसभा के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा समर्थन रहेगा।

राजनीतिक गलियारों में इस घोषणा को सिर्फ एक चुनावी औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में संभावित बड़े बदलाव की प्रस्तावना के रूप में देखा जा रहा है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर निर्णायक प्रभाव रखने वाले ‘सुशासन बाबू’ का राज्य की सक्रिय सत्ता राजनीति से संसद की ओर बढ़ना कई संकेतों को जन्म दे रहा है।

नामांकन की तैयारी, दिल्ली से पटना तक हलचल

सूत्रों के मुताबिक विधानसभा सचिवालय में मुख्यमंत्री Nitish Kumar, Ramnath Thakur, निशांत कुमार और मनीष वर्मा के नाम से नॉमिनेशन रिसीप्ट (NR) कट चुका है। संभावना है कि मुख्यमंत्री स्वयं गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे।

राजनीतिक कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि नामांकन के समय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय महत्व देने की कोशिश होगी। चर्चा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी इस अवसर पर पटना पहुंच सकते हैं।

मुख्यमंत्री आवास बना राजनीतिक भावनाओं का केंद्र

मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की खबर सामने आते ही जदयू कार्यकर्ताओं में भावनात्मक उबाल देखने को मिला। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ता जमा होने लगे। कई कार्यकर्ता रोते नजर आए और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “नीतीश कुमार बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे।”

स्थिति इतनी भावनात्मक हो गई कि मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रहे कुछ नेताओं को कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। भाजपा कोटे के मंत्री सुरेंद्र मेहता, जदयू के एमएलसी संजय गांधी और विधायक प्रेम मुखिया को कार्यकर्ताओं ने आवास के भीतर जाने से रोक दिया। कई जगह नारेबाजी भी हुई और जदयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ विरोध के स्वर सुनाई दिए।

मुख्यमंत्री आवास के बाहर कार्यकर्ताओं ने Rajiv Ranjan Singh (Lalan Singh), संजय झा और विजय चौधरी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए, जिससे साफ संकेत मिला कि पार्टी के भीतर भी इस फैसले को लेकर बेचैनी है।

अंदर रणनीति, बाहर भावनाएं

इधर शाम छह बजे से मुख्यमंत्री आवास पर एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और वरिष्ठ मंत्री Vijay Kumar Chaudhary मौजूद रहे। बैठक के बीच मीडिया से बातचीत करते हुए विजय चौधरी ने साफ कहा कि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री का ही होगा और पार्टी उनके निर्णय का सम्मान करेगी।

इस बीच बिहार के पुलिस महानिदेशक Vinay Kumar भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। आईजी जितेंद्र राणा ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कार्यकर्ताओं की भीड़ और बढ़ते राजनीतिक तापमान को देखते हुए सुरक्षा भी बढ़ा दी गई।

उत्तराधिकार की चर्चा भी तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और राजनीतिक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है—मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश की। राज्यसभा की संभावित उम्मीदवारी को लेकर उनका नाम भी चर्चाओं में है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी नेतृत्व ने अब तक इस संभावना का औपचारिक खंडन नहीं किया है।

हाल ही में हुई पार्टी बैठक में भी कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की राजनीति में एक नए नेतृत्व संक्रमण की पटकथा भी लिखी जा सकती है।

सत्ता से संसद तक—एक लंबी राजनीतिक यात्रा

अगर Nitish Kumar वास्तव में राज्यसभा का रास्ता चुनते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण होगा। छात्र राजनीति से लेकर लोकसभा, फिर मुख्यमंत्री पद और अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने की उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की सबसे लंबी और जटिल राजनीतिक यात्राओं में से एक मानी जाएगी।

RJD बोली- बीजेपी के दबाव में राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा है कि, बीजेपी काफी दिनों से यह खेल करना चाह रही थी। नीतीश कुमार पर काफी वक्त से दबाव था। भूंजा पार्टी के लोग और बीजेपी के दबाव में नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला किया है।

कांग्रेस बोली- बीजेपी जबरन नीतीश को राज्यसभा भेज रही है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा प्रत्याशी होने पर कांग्रेस के प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर नीतीश कुमार के विश्वास पात्र मंत्रियों ने उन्हें सीएम हाउस में कैद कर लिया है। भाजपा का ऑपरेशन लोटस का खाका अब सामने आ गया है। नीतीश कुमार की पार्टी अब भाजपा की गिरवी हो चुकी है। बीजेपी जबरन नीतीश को राज्यसभा भेज रही है।


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