24 News Update नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने ‘वक्फ बाय यूजर’ की अवधारणा को समाप्त करने पर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने कहा, “यदि आप ‘वक्फ बाय यूजर’ को डिनोटिफाई करते हैं, तो यह एक मुद्दा होगा।” उन्होंने केंद्र से पूछा कि 14वीं और 16वीं शताब्दी की मस्जिदों को कैसे रजिस्टर किया जाएगा, जिनके पास सेल डीड नहीं है।
बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल
कोर्ट ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र से पूछा कि क्या मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति दी जाएगी।
कानून के खिलाफ याचिकाएं और विरोध
इस कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लगभग 100 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं, जिनमें AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, RJD सांसद मनोज झा, AAP विधायक अमानतुल्ला खान और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी शामिल हैं।
Murshidabad में हिंसा पर चिंता
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में हुई हिंसा पर भी चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह “परेशान करने वाला” है, खासकर जब अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई गुरुवार, 17 अप्रैल को दोपहर 2 बजे फिर से करेगा। अदालत ने संकेत दिया है कि वह ‘वक्फ बाय यूजर’ सहित पहले से घोषित वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाई करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित कर सकती है।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को 4 अप्रैल को संसद में पारित किया गया और 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इसके बाद 8 अप्रैल से यह अधिनियम लागू हुआ। इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर मुस्लिम समुदाय में व्यापक असंतोष है।
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