24 News Update निंबाहेड़ा कविता पारख। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि संस्कृत सिर्फ भाषा नहीं, भारत की आत्मा, ज्ञान की गंगा और सनातनी चेतना की संवाहक भी हैं। संस्कृति और संस्कारों का संरक्षण केवल संस्कृत से ही हो सकता हैं।देवनानी गुरूवार को संस्कृत शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार की ओर से नगर निगम उदयपुर के सुखाड़िया रंगमंच सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय विद्वतजन सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। देवनानी ने कहा कि संस्कृत विश्व की सभी भाषाओं की जननी है। यह मनुष्य के व्यक्तित्व को भीतर से निखारती और पल्लवित करती हैं। इसमें ऋषियों की अनुभूति और वेदों की वाणी निहित हैं। हमारी संस्कृति और संस्कारों को बचाना हैं तो संस्कृत को बचाना अति आवश्यक हैं। इस बात का संतोष हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें संस्कृत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। संस्कृत निदेशालय स्थापित करने वाला राजस्थान प्रथम राज्य हैं। इससे संस्कृत के संरक्षण और संवर्द्धन को बल मिल रहा हैं।देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः विश्वगुरू बनाने का परिकल्पना के साथ आगे बढ़ रहा हैं। विश्वगुरू बनाने की क्षमता और सामर्थ्य संस्कृत में निहित हैं। संस्कृत सिर्फ वेदवाणी ही नहीं, विज्ञान वाणी भी हैं। यह केवल शास्त्रों की ही भाषा नहीं, एआई की भाषा भी हैं, अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा भी हैं। यह सिद्ध हो चुका हैं कि संस्कृत कम्प्यूटर विज्ञान की श्रेष्ठ भाषा हैं। सभी विषयों का प्रारंभिक और मूल ज्ञान संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध हैं। दुनिया में जितने भी आविष्कार हुए हैं, उनका मूल भारतीय वेदों में हैं, जो संस्कृत में लिखित हैं। केंद्र व राज्य सरकारें लगातार संस्कृत के संवर्धन के लिए कार्य कर रही हैं।देवनानी ने विश्वविद्यालयों का आह्वान करते हुए कहा कि समय के साथ संस्कृत समझने वालों की कमी हुई हैं। यहां तक की पूजा पाठ, कर्मकाण्ड करने वाले भी नहीं मिलते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को ज्योतिष, कर्मकाण्ड जैसे विषयों पर छरू माह अथवा 9 माह के पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए, ताकि युवा अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ें। उन्होंने कहा कि संस्कृत में केरियर की भी अपार संभावनाएं हैं। देवनानी ने समारोह में सम्मानित होने वाले विद्वतजनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी संस्कृत के प्रति साधना और समर्पण का हैं। इनसे प्रेरित होकर अन्य लोग भी संस्कृत की सेवा में आगे आएंगे।संस्कृत में छिपा हैं अथाह ज्ञानसमारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि संस्कृत का गहन अध्ययन करें, संस्कृत में ज्ञान का अथाह भंडार छिपा हुआ हैं। महाभारत में संजय आंखों देखा हाल बताते थे यह सब संस्कृत के माध्यम से मंत्रों की तकनीक से संभव था।शिक्षा मंत्री ने स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुएं प्रायः विदेशी ब्रांड की होती हैं, हमें इस आदत को छोड़कर स्वदेशी को अपनाना होगा। स्वदेशी अपनाने से ही देश मजबूत होगा। दिलावर ने कहा कि आज भारत में हर वस्तु का निर्माण हो रहा हैं। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे देश के हथियारों ने दुनिया के बड़े से बड़े हथियार मार गिराए। अमेरिका ने जब सुपर कंप्यूटर देना बंद कर दिया था तो हमने स्वयं का सुपर कंप्यूटर बना दिया। इसीलिए हमारी क्षमताओं को कम नहीं आंके, विदेशी कंपनियों का सामान खरीदकर हम जाने अनजाने दुश्मन देश को समृद्ध करते हैं, यदि हमें मातृभूमि के प्रति प्रेम हैं तो संकल्प लें कि विदेशी वस्तुओं का उपयोग नहीं करेंगे। दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने हरियालो राजस्थान अभियान के तहत अब तक 5 करोड़ पौधे लगाए हैं। इस अवसर पर उन्होंने पॉलिथीन का उपयोग न करने का भी आह्वान किया।संस्कृत से आता जीवन में अनुशासन समारोह में माकड़ादेव आश्रम झाड़ोल के संत गुलाबदास का भी सान्निध्य मिला। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति को समझाना हैं तो संस्कृत सहायक हो सकती हैं। वेद-पुराणों, उपनिषदों में न केवल जीवन का मर्म अपितु प्रकृति के गूढ़ रहस्य तक समाहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत से जीवन में अनुशासन आता हैं।शिक्षक समाज के सहयोग से ही परिवर्तन संभव- समारोह के सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के निदेशक वाई एस रमेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति से परिवर्तन का शुभारंभ हुआ हैं। शिक्षक समाज के सहयोग के बिना इसमें सफलता संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत संस्कृत शिक्षा में पैटर्न लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य हैं। संस्कृत शिक्षा में बाल वाटिका की पुस्तिकाएं तैयार करने वाला भी राजस्थान पहला राज्य हैं।मुख्यमंत्री के संदेश का वाचनराज्य स्तरीय सम्मान समारोह के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुभकामना संदेश प्रेषित किया। संस्कृत शिक्षा संभागीय कार्यालय के उपनिरीक्षक राममोहन शर्मा ने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। समारोह में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी भी बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन रही।वेद विद्यालय के लोगों व विभागीय पत्रिका का विमोचनसमारोह में विधानसभा अध्यक्ष देवनानी, शिक्षा मंत्री दिलावर सहित अन्य अतिथियों ने उदयपुर में प्रस्तावित राजकीय आदर्श वेद विद्यालय के लोगों का अनावरण किया। साथ ही संस्कृत शिक्षा विभाग की वार्षिक पुस्तिका श्रावणी का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में बाल वाटिका पुस्तकों तथा संस्कृत शिक्षा विभाग की एसएससीआईटी के पंचांग का भी विमोचन किया गया।विद्वतजनों का किया सम्मानसमारोह में कुल चार वर्गों में 56 सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। इस वर्ष संस्कृत साधना शिखर सम्मान चित्तौड़गढ़ के कैलाश चंद्र मूंदड़ा को प्रदान किया गया। इसमें एक लाख रूपए की सम्मान राशि प्रदान की गई। दो व्यक्तियों को संस्कृत साधना सम्मान, सात संस्कृत विद्वत्सम्मान पुरस्कार, 11 संस्कृत युवा प्रतिभा पुरस्कार सहित मंत्रालयिक सेवा सम्मान तथा विभिन्न अकादमिक स्तर के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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