आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक उदयपुर में शुरू
उदयपुर, 16 फरवरी। आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की दो दिवसीय बैठक आज गुजराती समाज भवन, उदयपुर में प्रारंभ हुई। बैठक की अध्यक्षता मंच के सभा अध्यक्ष एवं त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी कर रहे हैं। बैठक में राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम, केरल और पश्चिम बंगाल सहित देशभर से आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
बैठक की शुरुआत में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्के ने संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि रांची में हुई पिछली राष्ट्रीय बैठक के बाद महाराष्ट्र में वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर दो लंबी पदयात्राएं आयोजित की गईं। ओडिशा में आदिवासियों के अवैध विस्थापन के खिलाफ संघर्ष के दौरान साल मरांडी को जेल जाना पड़ा। वहीं राजस्थान के डूंगरपुर और उदयपुर क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के खिलाफ आरएसएस की गतिविधियों का संगठित प्रतिरोध किया गया। त्रिपुरा में गण शक्ति मुक्ति परिषद के नेतृत्व में भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ विशाल रैली आयोजित की गई।
“नारे कुछ, नीतियां कुछ” – जितेंद्र चौधरी
दोपहर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जितेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार का नारा भले ही “सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास” हो, लेकिन वैचारिक और नीतिगत फैसलों में सरकार आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों के खिलाफ खड़ी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी लगभग 8.6 प्रतिशत है, जबकि केंद्रीय बजट 2026–27 में उनके लिए मात्र 2.58 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है। इससे भी गंभीर तथ्य यह है कि केंद्र सरकार वर्ष 2025–26 में आदिवासियों के लिए आवंटित बजट में से करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं कर पाई।
उन्होंने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली मनरेगा योजना को खत्म कर उसके स्थान पर नए अधिनियम के तहत 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है, लेकिन बजट आवंटन यह साफ दर्शाता है कि सरकार मनरेगा जितना रोजगार देने के लिए भी तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा एक जुमला साबित हुआ है और जल–जंगल–जमीन को 50–60 वर्षों के लिए अंबानी–अडानी जैसे कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने आरक्षण नीति का सख्ती से पालन करते हुए सरकारी विभागों में रिक्त पद भरने की मांग की।
“जनगणना से आदिवासी पहचान मिटाई जा रही” – पुलिन बास्के
राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्के ने कहा कि आरएसएस–भाजपा सरकार आदिवासी अधिकारों पर बुलडोजर चलाकर आदिवासी पहचान मिटाने में लगी है। उन्होंने कहा कि जनगणना में आदिवासी आस्था से संबंधित कॉलम शामिल नहीं किया जाना गंभीर साजिश है, जिसके खिलाफ देशभर में संघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने भारत सरकार की आयात–निर्यात नीति और मुक्त व्यापार समझौतों को आदिवासी, दलित और किसानों के खिलाफ बताया। हालिया भारत–अमेरिका व्यापार समझौतों में कपास, सोयाबीन, तेल और फलों पर शून्य टैरिफ को उन्होंने देश के किसानों के लिए घातक करार दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय अंग्रेजी शासन काल से ही साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष करता आया है और आज भी कॉरपोरेट लूट के खिलाफ संघर्ष करेगा।
राजस्थान में आदिवासियों पर “अघोषित युद्ध” – वृंदा करात
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वृंदा करात ने कहा कि राजस्थान की डबल इंजन सरकार ने आरक्षण में छेड़छाड़, विस्थापन और निजीकरण के जरिए आदिवासियों के खिलाफ एक अघोषित युद्ध छेड़ रखा है। उन्होंने कहा कि चाहे सेकंड ग्रेड भर्ती हो, फर्स्ट ग्रेड या डी-ग्रुप—हर स्तर पर अनुसूचित जनजाति आरक्षण का खुला उल्लंघन हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बांध, डैम, परमाणु बिजलीघर और अन्य परियोजनाओं के नाम पर बिना नोटिस, बिना मुआवजा और बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए पुलिस बल के सहारे विस्थापन किया जा रहा है। झाड़ोल तहसील के अम्बासा गांव में वन विभाग और पुलिस द्वारा आदिवासी महिलाओं पर किए गए हमले को उन्होंने अमानवीयता की पराकाष्ठा बताया।
“अरावली हमारे जीवन और आत्म का सवाल” – दुलीचंद
आदिवासी जनाधिकार एका मंच, राजस्थान के अध्यक्ष दुलीचंद ने कहा कि अरावली पर्वतमाला को 100 मीटर की परिभाषा में सीमित करने की कोशिश केंद्र सरकार की खतरनाक साजिश थी, जिसे जनआंदोलन के दबाव में फिलहाल रोका गया है। उन्होंने कहा कि यह अरावली को खनन माफिया और कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की योजना थी। अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है, इसलिए मंच पूरे अरावली क्षेत्र को संरक्षित घोषित करने और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करता है।
कल भी जारी रहेगी बैठक, सेमिनार का आयोजन
आदिवासी जनाधिकार एका मंच के राज्य सचिव विमल भगोरा ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक कल भी जारी रहेगी। बैठक के बाद दोपहर 1 बजे “डबल इंजन सरकार और आदिवासियों की स्थिति” विषय पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। सेमिनार को जितेंद्र चौधरी, वृंदा करात और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भागचंद मीणा संबोधित करेंगे।

