24 न्यूज अपडेट, प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ की पहचान बन चुकी हींग अब सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला और रिसर्च सेंटर, दिल्ली में कराई गई जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि प्रतापगढ़ में बिक रही गांधी ब्रांड और कोरिया ब्रांड की हींग में भारी मिलावट पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 38.52 प्रतिशत स्टार्च, 11.42 प्रतिशत राख और 1.81 प्रतिशत एसिड में अघुलनशील गंदगी मौजूद है। यह मिलावट न केवल हींग की गुणवत्ता को खत्म करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए धीमे ज़हर का काम करती है।
गांधी ब्रांड की तरल हींग में सबसे अधिक मिलावट सामने आई है। इसमें मिला स्टार्च सस्ती और नकली सामग्री है जो शुद्ध हींग की जगह प्रयोग की जा रही है। इसका नियमित सेवन ब्लड शुगर के स्तर को असंतुलित कर सकता है और फैटी लिवर, मोटापा तथा मेटाबॉलिक विकार जैसे गंभीर प्रभाव छोड़ सकता है। इसके अतिरिक्त 11.42 प्रतिशत राख की उपस्थिति, जो अनुमेय 10 प्रतिशत से अधिक है, लीवर सिरोसिस, क्रॉनिक इनफ्लेमेशन और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका को बढ़ाती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस हींग में 1.81 प्रतिशत ऐसी गंदगी पाई गई है जो पेट के अम्ल में भी नहीं घुलती। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गंदगी शरीर के विभिन्न अंगों में जमा हो जाती है—जैसे आंत, फेफड़े और यकृत—और समय के साथ गैस्ट्रिक अल्सर, कोलन कैंसर और पाचनतंत्र की स्थायी क्षति का कारण बन सकती है। वहीं, कोरिया ब्रांड की क्रिस्टल हींग में 0.14 प्रतिशत स्टिल कंटेंट पाया गया है, जो पाचन प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और पेट में जलन, गैस और एसिडिटी को जन्म देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हींग को पारंपरिक रूप से पाचन सुधारक और औषधीय गुणों वाला मसाला माना जाता है। लेकिन जब इसमें स्टार्च, राख, मिट्टी और सिंथेटिक तेल जैसी हानिकारक वस्तुएं मिला दी जाती हैं, तो यह शरीर के लिए धीरे-धीरे असर करने वाला ज़हर बन जाती है। एमडी डॉ. हरीश कटारा ने इसे केवल खाद्य सुरक्षा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य आपदा करार दिया। उनके अनुसार, इस प्रकार की मिलावटी हींग के नियमित सेवन से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, उच्च रक्तचाप, आंतों में घाव और यहां तक कि हृदयाघात तक हो सकता है।
बाजार में यह हींग बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से घातक है। नियमित सेवन से शरीर के पाचन तंत्र, लीवर और किडनी पर स्थायी नुकसान हो सकता है। पाचन संबंधी गड़बड़ियां, गैस, कब्ज, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे लक्षण इस मिलावट के दुष्परिणाम हैं।
प्रतापगढ़ का हींग बाजार हर महीने लगभग 50 किलो हींग सप्लाई करता है, जिसकी अनुमानित बिक्री 15 लाख रुपये मासिक तक पहुंचती है। इस व्यापार का विस्तार देशभर में है, लेकिन ‘शुद्ध हींग’ के नाम पर लोगों को गंभीर रूप से गुमराह किया जा रहा है।
ब्रांड संचालकों का पक्ष:
गांधी किराणा (निचला बाजार) के संचालक रोहित गांधी का कहना है, “हमारी हींग 99 प्रतिशत शुद्ध है। हर साल इसकी सरकारी लैब से जांच कराई जाती है। रिपोर्ट में कोई त्रुटि आई होगी तो वह लेबलिंग से जुड़ी होगी।” दूसरी ओर, कोरिया ब्रांड के संचालक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली और उनका फोन स्विच ऑफ मिला।
हींग की असली पहचान और बेहतर विकल्प:
हींग की शुद्धता को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में घरेलू मसालों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की की हींग को शुद्ध और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, जो बिना मिलावट के उपलब्ध होती है। भारत में भी राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक तौर पर उगाई जा रही हींग को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित माना जाता है।
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