24 News Update अहमदाबाद। मकर संक्रांति आते ही अहमदाबाद में पतंगबाजी सिर्फ शौक नहीं, बल्कि पूरा टूरिज्म मॉडल बन चुकी है। शहर के पोल, खाडिया और रायपुर इलाकों में इस बार पतंग उड़ाने के लिए छतों का किराया 20 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गया है। 14 और 15 जनवरी को होने वाली पतंगबाजी के लिए ऊंची छतों की पहले ही बुकिंग हो चुकी है। नियम साफ है—जितनी ऊंची छत, उतना ज्यादा किराया।
गुजरात में मकर संक्रांति का मतलब ही पतंगों से है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में अहमदाबाद में ‘टेरेस टूरिज्म’ तेजी से उभरा है। खास तौर पर ओल्ड सिटी के पोल इलाके, जहां पुरानी हवेलियां और आपस में जुड़ी छतें पतंगबाजी का अलग ही माहौल बनाती हैं। बड़ी संख्या में एनआरआई और विदेशी पर्यटक इन इलाकों में होटल छोड़कर स्थानीय लोगों की छतों पर रहना पसंद कर रहे हैं, ताकि त्योहार को नजदीक से महसूस कर सकें।
पोल इलाके के निवासी अजय मोदी बताते हैं कि इस साल उनकी छत पंजाब से आई एक फैमिली ने किराए पर ली है, जबकि आसपास की कई छतें एनआरआई पहले ही बुक करा चुके हैं। किराए में सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि पतंगें, डोर, उंधियू-पूरी, जलेबी, भजिया, तिल की चिक्की, मिनरल वाटर, बैठने के लिए सोफे-कुर्सियां और बुजुर्गों-बच्चों के लिए कमरे भी शामिल होते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ट्रेंड से सिर्फ मकान मालिक ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारी, नाश्ते के ठेले, पतंग और डोर बेचने वाले तथा घरेलू स्नैक्स बनाने वाली महिलाएं भी दो दिनों में 2 से 5 हजार रुपए तक कमा लेती हैं।
पोल इलाके के जिग्नेशभाई रामी के अनुसार, छत किराए पर देने का चलन पिछले 4–5 वर्षों में आम हो गया है। सामान्य दिनों में एक छत का किराया 20–25 हजार रुपए रहता है, लेकिन मकर संक्रांति के समय यह लाखों में पहुंच जाता है। इस दौरान सुबह से रात तक खाने-पीने की पूरी व्यवस्था भी दी जाती है।
वहीं, गीताबेन राणा बताती हैं कि मकर संक्रांति उनके लिए आर्थिक सहारा भी बन गई है। दिव्यांग दंपती होने के कारण वे केवल छत किराए पर देते हैं और प्रति दिन 2 हजार रुपए लेते हैं, जिससे हर साल उन्हें 20–30 हजार रुपए की मदद मिल जाती है।
शाम ढलते ही अहमदाबाद की छतों पर रोशनी, आतिशबाजी और रंग-बिरंगी पतंगों का नजारा किसी त्योहार से कम नहीं लगता। यही वजह है कि पतंगों का यह पर्व अब संस्कृति के साथ-साथ रोजगार और पर्यटन का भी बड़ा जरिया बन चुका है।
अहमदाबाद में मकर संक्रांति पर छतें उगल रही सोना, 1.5 लाख तक पहुंचा टेरेस किराया

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