24 News Update निंबाहेड़ा (कविता पारख)। पूर्व नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री तथा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने विधानसभा में प्रस्तुत राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन लोकतंत्र को और अधिक व्यापक एवं समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की पहली सीढ़ी हैं और यहाँ अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होना आवश्यक है। विधानसभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कृपलानी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक स्वरूप गाँवों में दिखाई देता है। पंचायतों के माध्यम से आम नागरिक सीधे शासन व्यवस्था में भागीदारी करता है। इसी उद्देश्य से वर्ष 1992 में लागू हुए तिहत्तरवें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के तहत पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देकर ग्राम स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाया गया था। कृपलानी ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. भैरोंसिंह शेखावत के द्वारा राजस्थान में वर्ष 1995 में पंचायत चुनावों के लिए दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकने का नियम बनाया गया था, जिसका उद्देश्य उस समय जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जनसंख्या से जुड़े आँकड़ों और सामाजिक बदलावों को देखते हुए इस नियम की समीक्षा आवश्यक हो गई थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में राज्य की कुल प्रजनन दर में उल्लेखनीय कमी आई है और यह लगभग दो के आसपास पहुँच चुकी है। ऐसे में पुराने नियम को यथावत बनाए रखना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। कृपलानी ने इस अवसर पर सुझाव देते हुए कहा कि पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक न्यायसंगत व प्रभावी बनाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण का प्रावधान भी इस विधेयक में जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य को भी अधिक अधिकार प्रदान करने का आग्रह किया, ताकि जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधि अधिक प्रभावी तरीके से विकास कार्यों को गति दे सकें। विधायक कृपलानी ने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से लोकतांत्रिक अधिकारों का विस्तार होगा तथा समाज में अनुभव रखने वाले और विकास कार्यों में सक्रिय लोगों को भी पंचायत चुनावों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण परिवार बड़े होते हैं, ऐसे में केवल इस आधार पर लोगों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं था। उन्होंने विश्वास जताया कि संशोधन लागू होने से पंचायतों में अधिक योग्य और अनुभवी नेतृत्व सामने आएगा, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पंचायतों की भूमिका और मजबूत होगी। कृपलानी ने सदन के सभी सदस्यों से इस विधेयक का समर्थन करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह संशोधन लोकतंत्र को सीमित करने के बजाय उसे और अधिक व्यापक व सशक्त बनाने का प्रयास है, जिससे पंचायतें मजबूत होंगी और राजस्थान विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation वंडर सीमेंट में हर्षोल्लास से मनाया गया महिला दिवस महिला दिवस पर पद्मिनी की वीराओ ने दिया सेवा, संवेदना और करुणा का संदेश