24 News Update जोधपुर . जोधपुर हाईकोर्ट ने साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों में बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार, पुलिस और बैंकों को व्यापक निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने 84 वर्षीय जोधपुर के बुजुर्ग दंपती से 2.02 करोड़ रुपए की ठगी मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह रिपोर्टेबल जजमेंट सुनाया।कोर्ट ने कहा कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग से होने वाले साइबर अपराध समाज, अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। कोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिए कि वे केंद्र के I4C मॉडल की तर्ज पर राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) स्थापित करने के लिए अधिसूचना जारी करें। इस केंद्र को साइबर अपराध रोकने, जांच और समन्वय के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना होगा।‘डिजिटल अरेस्ट’ और SOPकोर्ट ने कहा कि डिजिटल फ्रॉड की रकम मिनटों में कई खातों के जरिए क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेज दी जाती है, जिसे आम पुलिस अधिकारी ट्रेस नहीं कर सकते। इस कारण हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी बैंक, फिनटेक कंपनियां और ATM ऑपरेटर RBI के ‘Mule Hunter’ AI टूल्स का अनिवार्य उपयोग करें। इसके साथ ही संदिग्ध या कम लेनदेन वाले खातों की KYC दोबारा कराई जाए और बुजुर्ग या संवेदनशील ग्राहकों के अकाउंट से बड़े लेनदेन पर 48 घंटे के भीतर भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए।कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचाव के लिए SOP बनाने के निर्देश दिए। इसके तहत बुजुर्गों या संवेदनशील ग्राहकों के अकाउंट से अचानक बड़े लेनदेन होने पर बैंक अधिकारी उनके घर जाकर वेरिफिकेशन करेंगे। साथ ही निगरानी, काउंसलिंग और साइबर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाने होंगे। विशेष IT इंस्पेक्टर और डिजिटल नियंत्रणहाईकोर्ट ने गृह और कार्मिक विभाग को निर्देश दिए कि DG साइबर के अधीन विशेष IT इंस्पेक्टर नियुक्त किए जाएँ, जो केवल साइबर मामलों की जांच करेंगे। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के नाम पर 3 से अधिक SIM कार्ड जारी करने पर नियंत्रण हेतु SOP बनाए जाएँ। राज्य में बिकने वाले सभी डिजिटल डिवाइस और प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (जैसे ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो) की रजिस्ट्रेशन और निगरानी DG साइबर के अधीन की जाएगी।यह आदेश गुजरात के आरोपियों अदनान हैदर और राहुल जगदीश जाधव पर दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोपियों ने खुद को मुंबई साइबर पुलिस, ईडी और सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और 9 बैंक खातों में कुल 2.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और गंभीर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव डाल रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए तकनीकी समाधान, SOP और विशेष एजेंसियों का गठन अनिवार्य है, ताकि राज्य में डिजिटल फ्रॉड पर कड़ा नियंत्रण स्थापित किया जा सके। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भगवान मौन रहते हैं पर उपदेश गुरु ही देते हैं : आर्यिका सुप्रज्ञमती गाउन पहनकर घर में घुसा बदमाश, 58 वर्षीय महिला से 7 मिनट जद्दोजहद, संडासी से सिर फोड़ा, फिर भी नहीं झुकी