24 News Update जयपुर। रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर पश्चिम रेलवे के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष निर्णायक साबित होने जा रहा है। रेल विकास को गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सर्वाधिक बजट आवंटन किया है, जिससे नई लाइन, दोहरीकरण और गेज परिवर्तन से जुड़ी परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे क्षेत्र में क्षमता विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी हैं। वर्ष 2024-25 में जहां 70 किलोमीटर रेल परियोजनाएं पूरी की गईं, वहीं वर्ष 2025-26 में अब तक 94 किलोमीटर नई लाइन और दोहरीकरण का कार्य संपन्न हो चुका है। मार्च 2026 तक अतिरिक्त 29 किलोमीटर कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद वर्ष 2026-27 में 350 किलोमीटर से अधिक नई लाइन, दोहरीकरण और गेज परिवर्तन कार्यों को पूर्ण करने की महत्वाकांक्षी योजना तय की गई है।
रेलवे के लिए वर्ष 2026-27 का कुल बजट 2.78 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। इसी बजट में राजस्थान को पहली बार 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक—कुल 10,228 करोड़ रुपये—की सौगात मिली है। इस आवंटन से उत्तर पश्चिम रेलवे की निर्माण परियोजनाओं को वित्तीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और धन की कमी किसी भी कार्य में बाधा नहीं बनेगी।
फिलहाल उत्तर पश्चिम रेलवे में जयपुर–सवाई माधोपुर दोहरीकरण, आरडीएसओ का डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक, तरंगा हिल–आबू रोड नई लाइन सहित करीब 1500 किलोमीटर लंबाई के कार्य निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा अनुपगढ़–बीकानेर, रास–बिलाड़ा नई लाइन और बठिंडा–हनुमानगढ़–सूरतगढ़–बीकानेर दोहरीकरण जैसी परियोजनाएं, जिनकी कुल लंबाई 1500 किलोमीटर से अधिक है, स्वीकृति के विभिन्न चरणों में हैं।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सर्वेक्षण स्तर पर भी काम तेज कर दिया है। बीकानेर बाईपास, खाटू श्यामजी–सालासर–सुजानगढ़, देवगढ़–मदारिया–मारवाड़ सहित 2000 किलोमीटर से अधिक लंबाई की नई लाइन और दोहरीकरण परियोजनाओं के सर्वे जारी हैं।
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