24 News Update निम्बाहेडा कविता पारख। आम तौर पर पहाड़ी क्षेत्र की आबादी पर आवासीय पट्टा जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि ग्राम पंचायत केवल अपने स्वामित्व वाली आबादी भूमि के ही पट्टे जारी कर सकती है और पहाड़ी भूमि अक्सर गैर-आबादी या किसी अन्य भूमि के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होती है। लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले की गंगरार पंचायत समिति के पुठोली ग्राम पंचायत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सरपंच-सचिव की मिलीभगत से अवैध खनन करने वालो और पहाड़ी भूमि को हड़पने वालो के वारे न्यारे हो रहे है। या यू कहे की इसकी बदौलत सुन्दर प्राकृतिक पहाड़ी अवैध खनन की भेंट चढ़ गई।
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड क्षेत्र में सक्रिय खनन माफियाओं पर पुख्ता कार्यवाही नही होने का असर यह हो रहा है कि अब छोटे स्तर पर भी खनन माफिया अपने काम को अंजाम दे रहे है। इसकी एक बानगी भर यह है कि उपखंड क्षेत्र की पुठोली ग्राम पंचायत में सरपंच और सचिव की मिलीभगत से यह अवैध कार्य जोर शोर से चल रहा है।
कहने को तो सरपंच का यह भी कहना है कि खनन हो रहा है वो आवासीय भूखंड है, लेकिन सरपंच यह बताना भूल गए कि भूखंड का आवासीय पट्टा जारी हुआ है जिसकी कोई खनन लीज नही। रही बात सचिव की तो उनका कहना है कि हम पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही करने वाले है और भूखंड स्वामी को नोटीस भी देंगे। जानकारों का कहना है कि ग्राम पंचायत ने जिस जरूरतमंद को आवासीय पट्टा जारी किया था, वो नियमों के विपरीत जा कर दिया था। लेकिन उस भूखण्ड को उसने अन्य किसी महिला को बेच दिया है। लेकिन कानूनन ऐसा नही किया जा सकता।
यह भी जानकारी मिली है कि वर्तमान में जिस महिला के नाम पर यह भूखण्ड स्थान्तरित हुआ है, वो रसूखदार परिवार से है। मामले की जानकारी उच्च स्तरीय अधिकारियों को भी है, लेकिन राजनीतिक दबाव में प्रशासन कोई कार्यवाही करने से कतरा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिलेभर में कई पंचायतो में सरपंच सचिवों की मिलीभगत से प्राकृतिक सुंदर पहाड़िया यू ही उजड़ती रहेगी या इस पर समय पर कोई कार्यवाही होगी, यह तो समय के गर्त में है।
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