उदयपुर, 15 अक्टूबर। डॉक्टर बनने का सपना, विदेश की मेडिकल डिग्री और भारत में प्रैक्टिस की राह में अटकी FMGE परीक्षा। आरोप है कि जब बार-बार परीक्षा पास नहीं हुई तो कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों ने मेहनत और योग्यता की जगह लाखों रुपये का रास्ता चुना। दलालों के जरिए 27 से 30 लाख रुपये तक देकर FMGE पास करने के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और उन्हीं के आधार पर राजस्थान के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप तक कर ली। अब एसओजी ने इस कथित फर्जीवाड़े में चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं, बल्कि मेडिकल रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, इस मामले में 4 फरवरी को एसओजी थाना जयपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के बाद भारत भूषण शर्मा (26), निवासी डीग; सौरव शर्मा (29), निवासी वैर; हिमांशु शर्मा (26), निवासी हलैना और शिवम चौधरी (28), निवासी पहाड़ी, जिला डीग को गिरफ्तार किया गया है। किसने कहां पढ़ाई की, किसने कितने लाख दिए? एसओजी के आईजी अजयपाल लांबा के मुताबिक, भारत भूषण शर्मा ने किर्गिस्तान से MBBS किया और 2022 में भारत लौटा। FMGE में कई बार असफल होने के बाद उसने दौसा निवासी शुभम गुर्जर के माध्यम से 30 लाख रुपये देकर कथित फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप की। शुभम गुर्जर इस मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा ने 2017 से 2023 के बीच रूस में MBBS की पढ़ाई की थी। दोनों 2023 में भारत लौटे, लेकिन FMGE परीक्षा पास नहीं कर सके। आरोप है कि दोनों ने वैर निवासी गजेंद्र के माध्यम से 27-27 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल किए। सौरव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर और हिमांशु ने महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जयपुर में इंटर्नशिप की। दोनों ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए भी आवेदन किया। सौरव और हिमांशु आपस में मामा-बुआ के बेटे हैं। चौथे आरोपी शिवम चौधरी ने 2016 से 2021 तक कजाकिस्तान में MBBS किया था। 2021 में भारत लौटने के बाद FMGE में सफल नहीं होने पर उसने कथित तौर पर गजेंद्र के जरिए 30 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप की और RMC में पंजीयन के लिए आवेदन किया। जांच के अनुसार, गजेंद्र कजाकिस्तान में हॉस्टल चलाने के साथ भारतीय विद्यार्थियों को विदेश में मेडिकल शिक्षा दिलाने के काम से भी जुड़ा था। 100 से ज्यादा विदेशी मेडिकल स्नातक जांच के घेरे में इस मामले का दायरा चार गिरफ्तारियों से कहीं बड़ा बताया जा रहा है। एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, जांच एजेंसियों ने 100 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातकों को चिह्नित किया है। संदेह है कि इन लोगों ने FMGE पास किए बिना फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप या पंजीयन हासिल करने की कोशिश की। एसओजी इस प्रकरण में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा समेत अब तक 33 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दे चुकी है। पूर्व में गिरफ्तार लोगों में काउंसिल के कर्मचारी और कथित मुख्य आरोपी भानाराम माली सहित अन्य लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, भानाराम माली, शुभम गुर्जर, इंद्रराज गुर्जर और अन्य पर प्रमाण पत्र बनवाने तथा पंजीयन कराने के नाम पर प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक लेने के आरोप हैं। सवाल सिर्फ फर्जी सर्टिफिकेट का नहीं, मरीजों की सुरक्षा का भी FMGE विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर भारत में प्रैक्टिस करने के इच्छुक पात्र विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा पास किए बिना फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे इंटर्नशिप और पंजीयन हासिल करने के आरोप चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इंटर्नशिप और पंजीयन की प्रक्रिया में दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ, कथित फर्जी प्रमाण पत्रों को किस स्तर पर स्वीकार किया गया और क्या इसमें संबंधित कर्मचारियों या अधिकारियों की मिलीभगत थी—एसओजी इन पहलुओं की जांच कर रही है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भीलों का गुड़ा के पांच मंदिरों में चोरी का खुलासा, करीब 10 किलो चांदी चुराने वाले आरोपी गिरफ्तार उदयपुर में अगले तीन घंटे बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट, 30-40 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं