उदयपुर/बैंकॉक, 26 सितंबर। मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत और भारत-थाईलैंड के ऐतिहासिक संबंधों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर उदयपुर के इतिहासकार प्रो. अजातशत्रु सिंह शिवरती को मिला है। वे 28 से 30 सितंबर तक थाईलैंड के बैंकॉक स्थित सिलपाकोर्न विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। ग्लोबल संस्कृत फोरम, संस्कृत स्टडी सेंटर, सिलपाकोर्न विश्वविद्यालय, बैंकॉक और ग्लोबल कल्चर लॉज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का विषय “भारतीय ज्ञान परंपराएं : संस्कृतियों के बीच ज्ञान परंपराओं के माध्यम से सेतु” रखा गया है। कार्यक्रम का आयोजन सिलपाकोर्न विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में होगा। थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल के अनुसार यह संगोष्ठी भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को सामने लाने का प्रयास है। दोनों देशों के साझा संबंधों में संस्कृत, इतिहास, साहित्य, दर्शन, कला और आध्यात्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मेवाड़ की परंपराओं और थाई संस्कृति पर रखेंगे विचार ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संस्थापक महासचिव एवं इतिहासकार प्रो. अजातशत्रु सिंह शिवरती अपने संबोधन में थाई संस्कृति और मेवाड़ की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच समानताओं तथा ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालेंगे। शिवरती के अनुसार बैंकॉक और मेवाड़ दोनों समृद्ध एवं जीवंत ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बैंकॉक में आधुनिकता के साथ बौद्ध और हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं का समन्वय दिखाई देता है, जबकि मेवाड़ अपनी वीरता, त्याग, स्वाभिमान और गौरवशाली राजपूत परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों संस्कृतियों के बीच मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सूत्रों को समझना भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ग्लोबल संस्कृत फोरम के संस्थापक महासचिव एवं आयोजन सचिव डॉ. राजेश कुमार मिश्र ने बताया कि संगोष्ठी में भारत और थाईलैंड के अलावा विभिन्न देशों के विद्वान, शिक्षाविद्, इतिहासकार और संस्कृति विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत तथा भारत-थाईलैंड के साझा सांस्कृतिक संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। प्रो. अजातशत्रु सिंह शिवरती ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संस्थापक महासचिव हैं। संगोष्ठी में उनकी भागीदारी को मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बिंदुमाधव जोशी की पुण्यतिथि पर ग्राहक पंचायत ने दी श्रद्धांजलि बाल रंग उत्सव में बच्चों ने मंच पर जीवंत किया रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य