24 News Update चित्तौड़गढ़। सूचना के अधिकार के तहत एक बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले के सभी पुलिस थानों में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं की जाती है और न तो बायोमेट्रिक व्यवस्था है। न ही कोई उपस्थिति रजिस्टर ही है। इसके बावजूद पुलिस कर्मियों का वेतन समय पर जारी हो रहा है। यह खबर न केवल सामान्य जनता के लिए चौंकाने वाली है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या सरकार बिना काम के वेतन देकर करोड़ों का आर्थिक नुकसान कर रही है।हम अपनी ओर से कुछ नहीं कह रहे हैं, यह तो खुद पुलिस ने RTI में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा है। चित्तौड़गढ़ पुलिस ने आरटीआई में खुलासा किया कि जिले के किसी भी थाने में पुलिसकर्मियों की उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाती और बायोमेट्रिक प्रणाली भी लागू नहीं है। याने पुलिस हाजिर ता है हर जगह हर समय पर मगर हाजिरी के अते पते नहीं हैं।सीटीएनएस में केवल एक कार्मिक गिनता है उपस्थितिआवेदन में 11 जुलाई 2025 को प्राप्त हुआ और प्रथम अपील अधिकारी जिले के पुलिस अधीक्षक हैं। पुलिस विभाग ने अपने तर्क में कहा कि सीटीएनएस (Centralized Training & Notification System) पर हाजरी दर्ज की जाती है, लेकिन इसमें केवल एक कर्मी द्वारा गिनती की जाती है, जबकि अन्य कर्मचारियों के हस्ताक्षर शामिल नहीं होते। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह से अविश्वसनीय जैसा है। जब हाजिरी का कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, तो वेतन कैसे बनता है। ऐसे में विभाग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ड्यूटी पर उपस्थिति तय कैसे हो पाती है।पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्रRTI खुलासे के बाद जागरूक पत्रकार जयवंत भेरविया ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है और मांग की है कि चित्तौड़गढ़ पुलिस विभाग में बायोमेट्रिक प्रणाली से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, विधि विपरीत जारी वेतन की वसूली और भविष्य में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह खुलासा केवल चित्तौड़गढ़ तक सीमित नहीं है। राजस्थान के कई जिलों में पुलिस विभाग की इसी तरह की लापरवाही का अंदेशा है। सरकार ने पहले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक हाजरी और सख्त नियम लागू किए हैं। लेकिन पुलिस विभाग को इन नियमों से अलग आखिर क्यों रखा गया है। सवाल ये नहीं कि पुलिस में उपस्थिति होती है या नहीं क्योंकि सब जानते हैं कि पुलिसकर्मी हमेशा तय घंटों से कहीं अधिक घंटे काम करते हैं व कई कई बार तो महीनों तक बिना अवकाश के काम करते हैं मगर उस काम का कोई तो बायो मेट्रिक या रजिस्टर आदि में अंकन होना ही चाहिए। यह मामला प्रशासनिक सुस्ती का भी उदाहरण है। जवाबदेही के अभाव का भी सबूत है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करेगी, या पुलिस विभाग के बिना हाजरी वेतन का यह मॉडल यूँ ही चलता रहेगा।RTI एक्टिविस्ट के अनुसार, यदि तत्काल सुधार नहीं किया गया तो यह प्रणाली भ्रष्टाचार और आर्थिक नुकसान को बढ़ावा दे सकती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation कन्नौज गांव में युवक की मौत से तनाव, बाजार बंद, आरोपियों की गिरफ्तारी व मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण दस हजार रुपये का ईनामी बदमाश गिरफ्तार’ ’एमपी के नीमच जिले में एनडीपीएस तस्करी में आठ साल से था फरार’