24 News Update उदयपुरः स्ट्रोक की पहचान और समय पर प्रतिक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक प्रमुख कम्युनिटी आउटरीच पहल के रूप में पारस हेल्थ उदयपुर ने न्यूरोसाइंस डिपार्टमेंट के अंतर्गत एक जानकारी भरा “स्ट्रोक अवेयरनेस हेल्थ टॉक का आयोजन किया। इस सेशन का उद्देश्य प्रतिभागियों को स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करने और “गोल्डन हॉवर” के अंदर कार्रवाई करने के लाइफसेविंग महत्व को समझने में मदद करना था।
डॉ. तरुण माथुर और डॉ. मनीष कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, पारस हेल्थ उदयपुर के नेतृत्व में इस सेशन में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त F.A.S.T मेथड पर जोर दिया गया। F से चेहरा लटकना, A से हाथ की कमजोरी, S से बोलने में कठिनाई, और T से टाइम फॉर कॉल इमरजेंसी होता है। यह एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण चेकलिस्ट है जो कुछ सेकंड में जीवन बचाने में मदद कर सकती है।
हाल ही में हुए रिसर्च में पता चला है कि भारत में हर साल 1.5 मिलियन नए स्ट्रोक के केस रिपोर्ट होते हैं फिर भी 4 में से केवल 1 व्यक्ति ही समय पर स्ट्रोक रेडी उस हॉस्पिटल पहुंच पाता है जहां हॉस्पिटल एडवांस्ड इंटरवेंशन के लिए लैस होते हैं। ज्यादातर मरीज लक्षणों की पहचान करने में या चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने में देरी के कारण महत्वपूर्ण इलाज़ का मौका गंवा देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कमी को प्रारंभिक जागरूकता और सामुदायिक शिक्षा के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।
पारस हेल्थ उदयपुर के न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ तरुण माथुर ने कहा, “स्ट्रोक समय के ख़िलाफ़ एक रेस की तरह होता है। हर बीतते मिनट का मतलब और ज़्यादा मस्तिष्क कोशिकाओं का नुकसान होता है। जब मरीज़ स्ट्रोक के पहले घंटे के अंदर हॉस्पिटल पहुँच जाता है, तो हमारे पास उसकी सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने और लॉन्गटर्म जटिलताओं को रोकने का सबसे अच्छा मौका होता है। लोग अक्सर यह नहीं समझ पाते कि समय की शुरुआत लक्षण दिखाई देने के साथ ही हो जाती है, न कि अस्पताल पहुँचने पर। यही जागरूकता, तुरंत कार्रवाई करने की यह तत्परता, एक संभावित जानलेवा स्थिति को जीवित रहने के मौके में बदल सकती है।
पारस हेल्थ उदयपुर के न्यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ मनीष कुलश्रेष्ठ ने कहा, “बहुत सारी जानें देरी की वजह से गवां दी जाती है। स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना न केवल मेडिकल जानकारी है बल्कि यह स्ट्रोक जैसे मुश्किल समय में तेज कार्रवाई के लिए यही जानकारी मजबूत टूल के रूप में काम आती है। हेल्थ टॉक जैसी पहलों के जरिए हमारा लक्ष्य झिझक को जागरूकता से बदलना है, परिवारों और समुदायों को तेजी से स्ट्रोक होने पर कार्रवाई करने, मदद के लिए कॉल करने और नुकसान को अपरिवर्तनीय होने से पहले जीवन बचाने के लिए सशक्त बनाना है।”
यह हेल्थ टॉक काफी इंटरैक्टिव था और लोगों ने बड़ी उत्सुकता से इसमें हिस्सा लिया। उन्हें स्ट्रोक से बचाव, जोखिम कम करने और स्वस्थ जीवनशैली से स्ट्रोक का खतरा कैसे घटता है, आदि चीजों के बारे में इस सेशन में उपयोगी जानकारी मिली।
यह पहल पारस हेल्थ उदयपुर की रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और न्यूरोलॉजिकल जागरूकता के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है। हॉस्पिटल का उद्देश्य समुदाय को सही जानकारी देना है ताकि वे मेडिकल इमरजेंसी के समय जल्दी और सही तरीके से प्रतिक्रिया कर सकें।


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By desk 24newsupdate

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