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प्रयागराज की POCSO कोर्ट का आदेश : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

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24 News Update प्रयागराज। प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट ने शनिवार को शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश स्पेशल जज (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पारित किया। अदालत ने 13 फरवरी को आदेश सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद तथा 2-3 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

शिकायत और कोर्ट की कार्यवाही
शिकायतकर्ता Ashutosh Brahmachari Maharaj, जो Jagadguru Rambhadracharya के शिष्य बताए जाते हैं, ने 8 फरवरी को स्पेशल POCSO कोर्ट में वाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुल की आड़ में बाल उत्पीड़न किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां कैमरे के सामने उनके बयान दर्ज किए गए। 13 फरवरी को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वयं अपनी पैरवी की। उन्होंने अदालत से कहा कि दो शिष्यों ने उनके पास आकर यौन शोषण की जानकारी दी और FIR दर्ज कर जांच कराए जाने की मांग की। अदालत ने इसके बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

शिकायतकर्ता का बयान
अदालत के आदेश के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि वे पुलिस के पास जाने के बावजूद सुनवाई न होने पर न्यायालय की शरण में आए। उन्होंने दावा किया कि शिष्यों के साथ यौन शोषण हुआ है और अदालत के आदेश से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। साथ ही उन्होंने डिप्टी सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पैदल यात्रा में शामिल होने की चुनौती दी और कहा कि वे वाराणसी स्थित विद्यामठ तक यात्रा करेंगे।

शंकराचार्य की प्रतिक्रिया
अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मामला फर्जी है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। उनका आरोप है कि यह मुकदमा उनके विरोधियों द्वारा प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय की प्रक्रिया में वे पूरा सहयोग करेंगे और निष्पक्ष जांच से “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा।

आगे की प्रक्रिया
अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित थाने में FIR दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी। POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में जांच और सुनवाई विशेष प्रावधानों के तहत की जाती है, जिसमें पीड़ितों की पहचान और बयान की गोपनीयता सुनिश्चित की जाती है।

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