24 News Upadte नई दिल्ली। देश में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार ने एक नया और स्पष्ट खाका खींच दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा दिशानिर्देशों के बाद अब सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और औपचारिक आयोजनों में राष्ट्रगीत की प्रस्तुति सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तयशुदा प्रोटोकॉल के तहत होगी।28 जनवरी को जारी यह आदेश भले ही प्रशासनिक फाइलों में दर्ज था, लेकिन 11 फरवरी को इसके सार्वजनिक होने के साथ ही देशभर में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जहां भी ‘वंदे मातरम’ बजाया या गाया जाएगा, वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का सावधान मुद्रा में खड़ा रहना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था के तहत अगर किसी आयोजन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों की प्रस्तुति हो, तो क्रम स्पष्ट रहेगा—पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन। यह पहली बार है जब दोनों के आपसी क्रम को लेकर आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट की गई है। स्कूलों में बदलेगी सुबह की तस्वीरदिशानिर्देशों का सबसे सीधा असर स्कूलों पर पड़ेगा। अब हर स्कूल दिवस की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ से होगी, और खास बात यह है कि इसके सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है। अब तक अधिकांश स्कूलों में केवल शुरुआती दो अंतरों तक ही सीमित परंपरा चली आ रही थी।राष्ट्रपति से राज्यपाल तक, हर बड़े मंच पर अनिवार्यतानए प्रोटोकॉल के अनुसार, तिरंगा फहराने,राष्ट्रपति के आगमन,राष्ट्र के नाम उनके संदेश और भाषण,तथा राज्यपालों के आगमन और संबोधन जैसे अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ का बजना अनिवार्य होगा।इतना ही नहीं, पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों और उन सभी कार्यक्रमों में, जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, राष्ट्रगीत की प्रस्तुति तय मानी जाएगी। मंत्रियों या अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण आयोजनों में भी सामूहिक गायन की अनुमति दी गई है—बशर्ते मर्यादा और सम्मान का पूरा पालन हो। सिनेमा हॉल को मिली छूटहालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि सिनेमा हॉल इन नियमों के दायरे में नहीं आएंगे। यानी फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा।इसी तरह, अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत आता है, तो दर्शकों के लिए खड़े होने की बाध्यता नहीं होगी, क्योंकि इससे अव्यवस्था पैदा हो सकती है।सिर्फ आधिकारिक संस्करण ही मान्यगृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब से ‘वंदे मातरम’ का केवल आधिकारिक संस्करण ही बजाया या गाया जाएगा और वह भी सामूहिक प्रस्तुति के रूप में। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आरपीटीसी किशनगढ़ में डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा का प्रेरक प्रवास संसाधनों का निरीक्षण और बेहतर प्रशिक्षण के निर्देश काम निकलते ही टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया” पाक संसद में अमेरिका पर फूटा रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का गुस्सा