पांच पूर्व कुलगुरुओं की रहेगी गरिमामयी उपस्थिति, अनुसंधान उपलब्धियों से जुड़े प्रकाशनों का होगा विमोचन 24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर का 26वां स्थापना दिवस समारोह आगामी 1 नवम्बर, शनिवार को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन राजस्थान कृषि महाविद्यालय के नूतन सभागार में प्रातः 11 बजे प्रारंभ होगा। समारोह से पूर्व मुख्य अतिथि द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप एवं डॉ. ए. राठौड़ की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। समारोह के समन्वयक एवं राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एम. के. महला ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत उपस्थित रहेंगे।विशिष्ट अतिथियों में एमपीयूएटी के पूर्व कुलगुरु डॉ. वी. वी. सिंह, डॉ. एस. एल. मेहता, डॉ. यू. एस. शर्मा, डॉ. एन. एस. राठौड़ एवं डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक शामिल होंगे।कार्यक्रम की अध्यक्षता एमपीयूएटी के नवनियुक्त कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह करेंगे।इस अवसर पर विशेष व्याख्यान, शैक्षणिक प्रस्तुतियाँ, तथा विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं विस्तार उपलब्धियों से जुड़े प्रकाशनों का विमोचन किया जाएगा। समारोह में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, परिषद् सदस्य, सभी डीन, डायरेक्टर, पूर्व प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ भाग लेंगे। सात दशक से कृषि की अलखराज्य में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राजस्थान में पहला कृषि महाविद्यालय जोबनेर स्थित एस. के. एन. कृषि महाविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ था। इसके पश्चात वर्ष 1955 में उदयपुर में राजस्थान कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई। राज्य का दूसरा कृषि विश्वविद्यालय महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), जिसे प्रारंभ में कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर के नाम से जाना जाता था, 1 नवम्बर 1999 को राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के विभाजन से अस्तित्व में आया।राजस्थान सरकार का अध्यादेश संख्या 6 (1999), जो बाद में मई 2000 में अधिनियम के रूप में पारित हुआ, इस विश्वविद्यालय की स्थापना का आधार बना। एमपीयूएटी देश के सबसे बड़े राज्य की भौगोलिक विविधता — फसल, जलवायु, मिट्टी और फसल चक्र जैसे मापदंडों — को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से दक्षिणी राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों के लिए केंद्रित अनुसंधान और विकास कार्यक्रम संचालित करता है। विश्वविद्यालय ने 1 दिसम्बर 1999 से पूर्ण रूप से कार्य प्रारंभ किया। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न घटक महाविद्यालय, कृषि अनुसंधान केन्द्र (एआरएस), अनुसंधान उपकेन्द्र (एआरएसएस), पशुधन अनुसंधान केन्द्र, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) शामिल हैं, जो उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों में सक्रिय हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation अवैध बायोडीजल पंप पर बड़ी कार्रवाई, एक गिरफ्तार — 1350 लीटर बायोडीजल जब्त,डी.एस.टी. व थाना बेकरिया पुलिस की संयुक्त टीम की कार्रवाई झाड़ोल में बस से कुचलकर मासूम की मौत पर हंगामा, अस्पताल में धरना—करणी सेना की कड़ी चेतावनी के बाद 17.21 लाख का मुआवजा तय