रिपोर्ट- जयवंत भैरविया 24 News Update उदयपुर। उदयपुर की पहाड़ियों कि किसे चिंता है। नगर निगम को, नेताओं को, खान विभाग को, जिला प्रशासन को या फिर किसी को नहीं। जनता रो रही है रोज—रोज, पहाड़ मत काटो हत्यारों!!! अब तो दया करो। विधानसभा में बेबस होकर विधायक महोदय कह रहे हैं कि पहाड़ बचा लो, हर साल बोल रहे हैं पहाड़ बचा लो। मगर उनकी बात सुन कौन रहा है?? अधिकारी पहाड़ देखने जा रहे हैं, कह रहे हैं कि पत्ता नहीं हिलने देंगे मगर मौके पर स्थितियां भयानक से भी भयानक है। कोई ईमानदारी से ड्रोन उड़ा कर पिक्चर बना दे तो सबकी पिक्चर एक साथ बन जाए। सब नंगे नजर आ जाए। जमीन माफिया के चरणों में पूरा प्रशासन पड़ा है। नेता दलाल बनकर दुम हिला रहे हैं। खाकी खैरख्वाह बन रही है। बचे हुए लोग बेबस देख रहे हैं। हालत विकट है। इस बीच पहाड़ों पर हो रहे निर्माण, रिसोर्ट आदि की सूचनाओं पर यूडीए कुंडली मार कर बैठा है। हर हाल में नहीं देंगे सूचना, चाहे सो कर लो। क्योंकि पहुंच उपर तक है, सेटिंग इतनी तगड़ी है कि सबको हिस्सा मिल रहा है। लोगों में चर्चा है कि कांग्रेस के एक नेता ने दो दिन पहले प्रदर्शन के दौरान जो जो नाम लिए थे, कहीं वे सच तो नहीं है।अब ताजा बात ये हुई है कि जिला कलेक्टर को नहीं पता कि कहां पहाडियों पर काम चल रहा है, खनन हो रहा है। यूडीए को नहीं पता, बोल रहा है कि खनन विभाग से पूछो। ऐसी लोलीपॉप आरटीआई में देने पर भी अफसर शर्मसार नहीं हो रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि नेता बेकअप कर लेगा उनके झूठ का। अफसरों को हर हाल में सूचनाओं से पर्देदारी का निर्देश आखिर क्यों है।झीलों की नगरी उदयपुर के चारों ओर पसरी अरावली की पहाड़ियां विनाश की आरी पर चढ़ी दिखाई दे रही हैं। पोकलेन और जेसीबी की गर्जना के बीच पहाड़ समतल होते जा रहे हैं वजूद खोते जा रहे हैं। उनकी छाती पर अवैध रिसॉर्ट-विला खड़े हो रहे हैं, अदालतों के आदेशों के कागज़ी परिंदों के बीच।उपर तक सेटिंग हो गई लगती हैमोहनपुरा, सरे और कैलाशपुरी में अवैध होटल-रिसॉर्ट सीज कर भूमि आवंटन निरस्त करने की खबरें आईं। फाइलें जिला कलेक्टर नमित मेहता को भेजी गईं, संख्या बताई गई छह। लेकिन जब सूचना का अधिकार में जवाब मांगा तो जवाबों की गेंद दफ्तर-दर-दफ्तर उछलती रही। कलेक्टर कार्यालय से मामला उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) पहुंचा, और UDA ने इसे खनन विभाग का बताकर पल्ला झाड़ लिया। सवाल उठता है—जब 22 रिसॉर्ट-विला सीज करने और 25 से सात दिन में जवाब मांगने का दावा किया गया, तो आज तक अंतिम कार्रवाई कहाँ है? गोवर्धन विलास, बलीचा, अम्बेरी, काया, सीसारमा, एकलिंगजी, सरे, मोहनपुरा और कैलाशपुरी—सूची लंबी है, मशीनें और लंबी। शहर के बाहरी इलाकों में अरावली की ढलानों पर कटान जारी है। प्रशासन से पूछा गया कि अवैध खनन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? कितने क्षेत्र संरक्षित घोषित हैं? वर्तमान स्थिति का सत्यापित रिकॉर्ड क्या है?—तो जवाबों से ज्यादा खामोशी मिली।जैन साहब आखिर कब तक विधानसभा में बोलते रहेंगेइधर शहर विधायक ताराचंद जैन ने विधानसभा में कड़ा कानून बनाने और पहाड़ियों को ‘नॉन कंस्ट्रक्शन जोन’ घोषित करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि पिछली बार 43 पहाड़ियों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 15 को खुर्द-बुर्द किया जा चुका है। कार्रवाई छुटपुट रही—और पहाड़ लगातार छोटे। इसका डेटा संधारण जरूर होना चाहिए। एक भी पत्थर नहीं हिलना चाहिए। सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि क्या जिला प्रशासन और UDA के पास अरावली कटान और अवैध रिसॉर्ट-विला का समेकित, अद्यतन रिकॉर्ड है? अगर है तो सार्वजनिक क्यों नहीं? और अगर नहीं है, तो फिर संरक्षण की नीति किस आधार पर बनेगी? हालत ये हैं कि जनता मांगती है तो कहते हैं सूचना नहीं है। कोर्ट मांगता है तो पता नहीं कहां से सूचना आ जाती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation कायड़ कूच की रणनीति: मेवाड़ से ‘मोदी महासभा’ में हजारों कदम बढ़ाने का संकल्प एमबी अस्पताल में 70 वर्षीय बुजुर्ग के घुटनों का सफल जटिल ऑपरेशन