उदयपुर, 29 सितंबर। नवरात्र के नौ दिनों में जब मेवाड़ की धरती शक्ति आराधना में डूबी होगी, उसी दौरान उदयपुर में भगवान श्रीराम की मर्यादा, त्याग, पराक्रम और लोकमंगल की गाथा मंच पर जीवंत होगी। लंबे अंतराल के बाद शहर में बड़े स्तर पर दस दिवसीय रामलीला का आयोजन होने जा रहा है। श्री रामलीला समिति, उदयपुर के तत्वावधान में 9 से 18 अक्टूबर तक सूरजपोल बाहर स्थित निम्बार्क महाविद्यालय मैदान में प्रतिदिन शाम 7 से रात 10 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर सेक्टर-14 स्थित कल्लाजी बावजी चौराहे पर रावण दहन और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।
समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने बताया कि उदयपुर में पहली बार हो रहे इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य रामकथा का मंचन करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना भी है। इस आयोजन में वृंदावन से आने वाले पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान के करीब 40 कुशल कलाकार अभिनय और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर साकार करेंगे। जोशी ने बताया कि दिल्ली में उन्होंने रामलीला का बड़े व भव्य स्तर पर मंचन देखा तो मन में भाव आया कि उदयपुर में इसी प्रकार का आयोजन होना चाहिए। समिति की ओर से रामलीला के लिए विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसमें श्रीराम के जन्म से लेकर वनगमन, सीता हरण, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और अयोध्या वापसी तक की कथा को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

9 अक्टूबर से नारद मोह के साथ होगी शुरुआत

रामलीला का शुभारंभ 9 अक्टूबर को नारद मोह, अवतार प्रयोजन और रामकथा की पृष्ठभूमि के प्रसंगों से होगा। इसके माध्यम से दर्शकों को यह बताया जाएगा कि किस प्रकार भगवान श्रीराम के अवतार की भूमिका तैयार होती है।

10 अक्टूबर को रावण की तपस्या, पृथ्वी की पुकार और भगवान श्रीराम के जन्म का मंचन होगा। राम जन्म का प्रसंग रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में रहेगा।

11 अक्टूबर को विश्वामित्र के आगमन के साथ ताड़का और सुबाहु वध तथा अहिल्या उद्धार के प्रसंग मंचित किए जाएंगे। इसके बाद 12 अक्टूबर को पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ और श्रीराम-जानकी विवाह का भव्य मंचन होगा।

राम विवाह से वनगमन तक भावनाओं से भरे प्रसंग

13 अक्टूबर की रामलीला में दशरथ की प्रतिज्ञा, कैकेयी द्वारा वरदान मांगना और भगवान श्रीराम का वनगमन दिखाया जाएगा। यह प्रसंग रामलीला के सबसे भावुक हिस्सों में शामिल रहेगा।

इसके अगले दिन 14 अक्टूबर को श्रीराम-केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत मिलन का मंचन होगा। वहीं 15 अक्टूबर को श्रीराम का ऋषियों से मिलन, गिद्धराज जटायु, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध और सीता हरण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।

16 अक्टूबर को शबरी मिलन, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, सीता अन्वेषण और लंका दहन के प्रसंग मंच पर आएंगे। इसके बाद 17 अक्टूबर को श्रीराम की सेना का प्रस्थान, विभीषण शरणागति, सेतु बंध एवं रामेश्वरम् स्थापना, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति का मंचन होगा।

18 अक्टूबर को रावण वध और श्रीराम का राज्याभिषेक

रामलीला के अंतिम दिन 18 अक्टूबर को कथा अपने चरम पर पहुंचेगी। इस दिन कुंभकरण वध, मेघनाद वध और रावण वध के साथ भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक का मंचन किया जाएगा।

इस तरह दस दिनों तक चलने वाली रामलीला में दर्शकों को रामकथा के प्रमुख प्रसंग एक क्रम में देखने को मिलेंगे। समिति का कहना है कि नवरात्र के दौरान होने वाला यह आयोजन उदयपुर के सांस्कृतिक वातावरण को राममय करने का प्रयास है।

दशहरे पर कल्लाजी बावजी चौराहे पर होगा रावण दहन

समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि रामलीला के बाद दशहरे के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को शाम 6 बजे सेक्टर-14 स्थित कल्लाजी बावजी चौराहे पर रावण दहन किया जाएगा। इसके साथ ही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होगा।

शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन पिछले वर्ष भी किया गया था और इस बार इसे और व्यवस्थित रूप में आयोजित करने की तैयारियां की जा रही हैं।

रामलीला के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम

आयोजन समिति के पदाधिकारियों के अनुसार रामलीला और दशहरा कार्यक्रम को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे शहर की सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वृंदावन के कलाकारों की रामलीला, स्थानीय विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां और पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों का कार्यक्रम पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंग देगा।

समिति की ओर से आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए अलग-अलग आयोजन एवं व्यवस्था समितियों का गठन किया गया है।

समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, महासचिव भंवरलाल शर्मा, संयोजक डॉ. विजय विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल और प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा ने कहा कि व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है व खास तौर पर नई पीढ़ी को सजीव रामयण मंचन देखने को प्रेरित किया जा रहा है। पार्किंग के लिए फतह स्कूल में भी व्यापक व्यवस्थाएं की गईं हैं।


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