उदयपुर, 13 अक्टूबर। डिजिटल भुगतान के जरिए कारोबार करने वाले व्यापारियों को UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क से फिलहाल राहत मिली है। 15 अक्टूबर से लागू होने वाला यह प्रस्ताव त्योहारी सीजन को देखते हुए टाल दिया गया है। हालांकि, शुल्क को दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की बात कही गई है, लेकिन नई तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले बड़े कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क देना पड़ सकता है। आम ग्राहकों के लिए UPI लेनदेन पहले की तरह निशुल्क रहने की बात कही गई है।

छोटे भुगतान पर शुल्क नहीं, बड़े ट्रांजैक्शन पर 0.4% का प्रस्ताव

प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क निर्धारित किया गया है। हालांकि, यह शुल्क सभी दुकानदारों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। प्रस्ताव के अनुसार, जिन कारोबारियों का मासिक UPI कलेक्शन एक लाख रुपये तक है, उन्हें इस शुल्क से छूट मिलेगी। एक लाख रुपये से अधिक मासिक कलेक्शन वाले व्यापारियों पर निर्धारित शर्तों के तहत शुल्क लागू होगा। इसके अतिरिक्त 18 प्रतिशत GST का प्रावधान भी बताया गया है।

75,000 रुपये या उससे अधिक के बड़े भुगतान पर प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय अधिकतम 300 रुपये की सीमा प्रस्तावित है। पेट्रोलियम, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और कुछ अन्य श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का शुल्क प्रस्तावित किया गया है। इन प्रावधानों के अंतिम क्रियान्वयन और संबंधित श्रेणियों की पात्रता को लेकर आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी।

व्यापारियों ने QR कोड ढककर जताया था विरोध

MDR शुल्क के प्रस्ताव के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में कारोबारी संगठनों ने आपत्ति जताई थी। व्यापारियों का तर्क था कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत लगने से खासकर छोटे कारोबारियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है। कुछ संगठनों ने आशंका जताई कि व्यापारी इस लागत की भरपाई के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। विरोध के दौरान कई स्थानों पर व्यापारियों ने अपने UPI QR कोड काले कपड़े से ढककर नाराजगी जाहिर की थी। विपक्षी नेताओं ने भी इस प्रस्ताव के संभावित आर्थिक प्रभावों पर सवाल उठाए थे।

संख्या में कम, लेकिन रकम के लिहाज से बड़े भुगतान अहम

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दुकानदारों को मिलने वाले UPI भुगतानों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन की संख्या पांच प्रतिशत से कम बताई गई है। इसके बावजूद कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी काफी बड़ी है। अनुमान के अनुसार, ऐसे भुगतानों से हर महीने करीब छह लाख करोड़ रुपये का लेनदेन होता है। यह आंकड़ा बताता है कि बड़े डिजिटल भुगतानों पर मामूली प्रतिशत का शुल्क भी कारोबारियों के कुल खर्च को प्रभावित कर सकता है।

क्या है MDR और किसे देना होता है शुल्क?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध कराने वाले बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है। कार्ड भुगतान में यह व्यवस्था पहले से प्रचलित है। UPI को व्यापक स्तर पर अपनाने के पीछे ग्राहकों और कारोबारियों के लिए इसकी कम लागत तथा आसान भुगतान व्यवस्था की अहम भूमिका रही है।

सरकार ने UPI को प्रोत्साहित करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 से प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 तक इस योजना के तहत 8,276 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया। जून 2026 तक देश में UPI उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 55.5 करोड़ बताई गई थी।

फिलहाल MDR प्रस्ताव को टालने से व्यापारियों को त्योहारों के दौरान अतिरिक्त लागत की चिंता से अस्थायी राहत मिली है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दिवाली के बाद शुल्क किस तारीख से लागू होता है और अंतिम व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को कितनी छूट मिलती है।


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By desk 24newsupdate

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