— हाईवे किनारे ‘बीमार’ बनकर बैठते थे आरोपी; मदद के लिए रुकते ही शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल 24 News Update उदयपुर। राह चलते किसी अनजान व्यक्ति की मदद करना इंसानियत मानी जाती है, लेकिन उदयपुर में एक गैंग ने इसी भरोसे को अपराध का हथियार बना लिया। हाईवे के किनारे मुंह से झाग निकालकर घायल या नशे में पड़े व्यक्ति का नाटक, मदद के लिए रुकने वाले राहगीर को निशाना बनाना, फिर उसे जबरन कार में बैठाकर सुनसान जगह ले जाना और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर पैसे ऐंठना—प्रतापनगर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है।पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान देवेन्द्र विश्नोई (25), मनीष जोशी (25), नरेन्द्र रेबारी (28) और ओम प्रकाश जाट (38) के रूप में हुई है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार, मोबाइल फोन और पीड़ित से डराकर वसूली गई रकम भी बरामद की है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जिससे इस तरह की अन्य वारदातों के बारे में भी जानकारी सामने आने की संभावना है। मदद के लिए रुका था, खुद शिकार बन गयापुलिस के अनुसार घटना 1 अगस्त 2026 की है। हिन्दुस्तान जिंक के जिंक स्मेल्टर देबारी में ड्यूटी पूरी करने के बाद पीड़ित अपने घर ढिकली की तरफ जा रहा था। रास्ते में हाईवे पर उसे एक व्यक्ति पड़ा दिखाई दिया। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। स्थिति देखकर पीड़ित ने उसे मदद की जरूरत समझी और अपनी गाड़ी रोक दी। यही रुकना उसके लिए मुसीबत बन गया।पुलिस के मुताबिक जैसे ही वह व्यक्ति के पास पहुंचा, वहां तीन अन्य लोग भी आ गए। आरोप है कि जमीन पर पड़े व्यक्ति ने पीड़ित के ऊपर कोई स्प्रे कर दिया। इसके बाद उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। इसी दौरान चारों आरोपियों ने उसे पकड़ लिया और जबरन स्विफ्ट डिजायर कार में डालकर अम्बेरी रोड की ओर ले गए। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाया। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे डराया गया।आरोपियों ने पीड़ित से उसके Paytm के जरिए करीब 25 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए। इतना ही नहीं, उसे धमकी दी गई कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को बताया या पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। पीड़ित को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। इस घटना ने केवल लूट या मारपीट का मामला नहीं, बल्कि डिजिटल ब्लैकमेलिंग और अपहरण के जरिए वसूली के एक खतरनाक तरीके की तस्वीर सामने रखी। रिपोर्ट मिलते ही पुलिस ने शुरू की पड़तालपीड़ित की रिपोर्ट पर प्रतापनगर थाने में प्रकरण संख्या 427/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 140(3), 119(1), 308(2) और 3(5) के तहत जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा और नगर पूर्व की वृत्ताधिकारी छवि शर्मा के सुपरविजन में प्रतापनगर थानाधिकारी अजय सिंह राव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी सहायता और मुखबिर तंत्र के जरिए आरोपियों की पहचान की। इसके बाद चारों को डिटेन कर पूछताछ की गई और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। चारों आरोपी डीडवाना-कुचामन क्षेत्र केपुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में— देवेन्द्र विश्नोई, उम्र 25 वर्ष, निवासी बडलो का वास, कुचामन सिटी, जिला डीडवाना-कुचामन। मनीष जोशी, उम्र 25 वर्ष, निवासी बेसरोली, थाना बडू, जिला डीडवाना-कुचामन। नरेन्द्र रेबारी, उम्र 28 वर्ष, निवासी बांसा, थाना मोलासर, जिला डीडवाना-कुचामन।ओम प्रकाश जाट, उम्र 38 वर्ष, निवासी निमोद, थाना मोलासर, जिला डीडवाना-कुचामन। पुलिस ने इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा पीड़ित से डराकर वसूली गई रकम भी बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। गैंग का तरीका वारदात सबसे बड़ा सुरागपुलिस के अनुसार आरोपी नशे के आदी बताए जा रहे हैं और राहगीरों को फंसाने के लिए एक खास तरीका अपनाते थे। वे सड़क किनारे कार खड़ी कर देते और उनमें से एक व्यक्ति मुंह से झाग निकालकर बीमार या घायल होने का नाटक करता था। राहगीर मदद के लिए जैसे ही अपनी गाड़ी रोककर उनके पास आता, बाकी साथी सक्रिय हो जाते। इसके बाद मदद करने वाले व्यक्ति को काबू कर अपहरण, मारपीट और लूट की जाती। पुलिस के अनुसार आरोपियों का मकसद केवल नकदी तक सीमित नहीं था, बल्कि मौका मिलने पर जेवरात भी छीनने की बात सामने आई है। आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और कार की गतिविधियों की जांच से पुलिस को अन्य संभावित वारदातों की कड़ियां मिल सकती हैं। यही जांच यह भी स्पष्ट कर सकती है कि गैंग ने कितने लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया और कहीं ऐसे पीड़ित तो नहीं हैं जिन्होंने बदनामी या वीडियो वायरल होने के डर से पुलिस में शिकायत ही नहीं की। पुलिस टीमकार्रवाई में प्रतापनगर थानाधिकारी अजय सिंह राव, सहायक उप निरीक्षक भगवत सिंह, हेड कांस्टेबल जितेन्द्र सिंह (2801), कांस्टेबल मांगीलाल (1096) और सुरेन्द्र (1528) शामिल रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 94.58 लाख में चलेंगी उदयपुर की 4 एंटी-स्मॉग गन, निगम ने निकाला टेंडर जरूरतमंद बच्चों को भोजन, मिठाई और तिरंगे बांटे