— 33 वार्ड अनारक्षित ओपन, 16 अनारक्षित महिला; ओबीसी के 16, एससी के 7 और एसटी के 8 वार्ड आरक्षित

24 News Update उदयपुर, 17 अगस्त। उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों की आरक्षण लॉटरी ने चुनावी राजनीति का पूरा गणित बदल दिया है। लॉटरी निकलने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की अपने वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी धरी रह गई, जबकि कई दावेदारों के लिए किस्मत ने रास्ता खोल दिया है। खास बात यह है कि 33 वार्ड अनारक्षित ओपन हैं, जिसके चलते इन सीटों पर बड़े नेताओं के बीच टिकट की सबसे बड़ी जंग देखने को मिल सकती है।
आरक्षण के बाद अब नेताओं ने अपने-अपने वार्ड से टिकट की कवायद तेज कर दी है। जिनका वार्ड महिला, ओबीसी या एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है, वे दूसरे वार्डों में संभावनाएं तलाश रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में दूसरे वार्डों में पहुंचने वाले नेताओं और वहां पहले से तैयारी कर रहे दावेदारों के बीच सियासी टकराव भी देखने को मिल सकता है।

आरक्षण का पूरा गणित

80 वार्डों की लॉटरी में:

33 वार्ड — अनारक्षित ओपन
16 वार्ड — अनारक्षित महिला
11 वार्ड — ओबीसी ओपन
5 वार्ड — ओबीसी महिला
5 वार्ड — एससी ओपन
2 वार्ड — एससी महिला
5 वार्ड — एसटी ओपन
3 वार्ड — एसटी महिला

यानी कुल 49 वार्ड अनारक्षित वर्ग में हैं, जबकि बाकी 31 वार्ड ओबीसी, एससी और एसटी के लिए आरक्षित हुए हैं। मेयर पद की दौड़ में सबसे प्रमुख नामों में पारस सिंघवी, रवीन्द्र श्रीमाली, प्रमोद सामर और अतुल चंडालिया शामिल हैं। इन चारों के लिए लॉटरी फिलहाल राहत लेकर आई है। पारस सिंघवी जिन वार्ड नंबर 24 और 29 से दावेदारी कर रहे थे, दोनों ही अनारक्षित ओपन निकले हैं। वार्ड 24 और 29 के ओपन रहने से उनके पास दो विकल्प मौजूद हैं। रवीन्द्र श्रीमाली का वार्ड 33 भी अनारक्षित ओपन है। पूर्व यूआईटी चेयरमैन और नगर परिषद सभापति रह चुके श्रीमाली चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अतुल चंडालिया का वार्ड 78 भी अनारक्षित ओपन आया है। इससे उनकी मेयर पद की दावेदारी को मजबूती मिली है।
प्रमोद सामर का वार्ड भी अनारक्षित ओपन है। लेकिन उनके सामने एक अलग पेच है। पार्टी ने उन्हें निकाय कोटा का प्रभारी बनाया है। ऐसे में सवाल यह है कि संगठन उन्हें चुनाव मैदान में उतारता है या निकाय प्रभारी की जिम्मेदारी ही संभालने देता है।

फतहसिंह राठौड़ की अपने वार्ड से उम्मीद खत्म
उदयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ अपने वार्ड से खुद या अपने बेटे को चुनाव लड़ाने की तैयारी में थे। लेकिन उनका वार्ड अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हो गया। ऐसे में राठौड़ परिवार को अब दूसरे वार्ड की तलाश करनी होगी। हालांकि फतहसिंह राठौड़ का पैतृक गांव बेदला वाला क्षेत्र ओपन आने से इसे संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है।
यह बदलाव कांग्रेस के लिए भी अहम है, क्योंकि शहर कांग्रेस अध्यक्ष को अब अपने मूल वार्ड के बजाय दूसरी सीट पर राजनीतिक समीकरण बैठाना होगा।

गोपाल शर्मा का वार्ड ओबीसी ओपन, बहू हितांशी को मिला नया रास्ता
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत गिरिजा व्यास के भाई और उदयपुर शहर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गोपाल शर्मा वार्ड 6 से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। लेकिन वार्ड 6 ओबीसी ओपन हो गया। इसका सीधा असर गोपाल शर्मा की दावेदारी पर पड़ा है। उनकी बहू हितांशी शर्मा भी इसी वार्ड से दावेदारी कर रही थीं। अब उनके लिए वार्ड 73 नया विकल्प बन सकता है, जो अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हुआ है। हालांकि वार्ड 73 से हितांशी के पिता और कांग्रेस नेता केके शर्मा की भी दावेदारी बताई जा रही है। ऐसे में यहां टिकट का समीकरण भी दिलचस्प रहेगा।

अजय पोरवाल को भी बदलना पड़ेगा ठिकाना
कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद अजय पोरवाल मेयर की सीट अनारक्षित आने के बाद वार्ड 6 से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। लेकिन वार्ड 6 के ओबीसी ओपन होने से अब उन्हें दूसरा वार्ड तलाशना होगा। वे अहिंसापुरी के आसपास के किसी ओपन वार्ड को विकल्प बना सकते हैं।

मोहसिन खान और दिनेश श्रीमाली के वार्ड भी आरक्षित
नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष मोहसिन खान का मूल वार्ड महिला के लिए आरक्षित हो गया है। अब वे वार्ड 10 या 20 से टिकट की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन इन वार्डों में पहले से सक्रिय दावेदारों के बीच अपनी जगह बनाना उनके लिए चुनौती होगी। वहीं शहर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रह चुके और पूर्व नेता प्रतिपक्ष दिनेश श्रीमाली वार्ड 17 से तैयारी कर रहे थे। यह वार्ड भी अनारक्षित महिला हो गया है। श्रीमाली नाथद्वारा के पूर्व विधायक सीपी जोशी के करीबी माने जाते हैं।

अरुण टांक को दो संभावित रास्ते
कांग्रेस की ओर से महापौर पद का चुनाव लड़ चुके अरुण टांक के लिए लॉटरी राहत लेकर आई है। वे वार्ड 3 से दावेदारी कर रहे हैं और वार्ड 3 अनारक्षित ओपन आया है। दिलचस्प यह है कि जिस पुराने वार्ड से वे पार्षद बने थे, वह नया वार्ड 6 है, जो ओबीसी ओपन हो गया है। ऐसे में टांक के सामने वार्ड 3 का स्पष्ट विकल्प है।

ताराचंद जैन के वार्ड ने तीन दावेदारों का गणित बदला
शहर विधायक ताराचंद जैन का वार्ड 34 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इससे यहां से दावेदारी कर रहे किरण जैन, रामकृपा शर्मा और जितेन्द्र शास्त्री के चुनावी समीकरण प्रभावित हुए हैं। अब इन तीनों को दूसरे वार्ड में राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी।

अतुल चंडालिया और पिंकी मांड़ावत आमने-सामने
वार्ड 78 अनारक्षित ओपन आने से भाजपा नेता अतुल चंडालिया को राहत मिली है। इसी वार्ड से पिंकी मांड़ावत की भी दावेदारी बताई जा रही है। ऐसे में यदि दोनों ही इसी वार्ड से टिकट चाहते हैं तो पार्टी के सामने स्थानीय समीकरण साधने की चुनौती रहेगी।

कविता जोशी और अलका मुंदड़ा को भी फायदा
कविता जोशी का वार्ड 76 अनारक्षित महिला हुआ है। इससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वहीं भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अलका मुंदड़ा के लिए वार्ड 51 का अनारक्षित ओपन होना राहत की खबर है। वे चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इसी वार्ड से प्रमोद सामर और प्रेम सिंह शक्तावत के नाम भी चर्चा में हैं। इसलिए वार्ड 51 भी भाजपा के भीतर महत्वपूर्ण मुकाबले वाला वार्ड बन सकता है।

नानालाल को तलाशना होगा नया वार्ड
नगर निगम के पूर्व समिति अध्यक्ष नानालाल का वार्ड 74 ओबीसी ओपन हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे वार्ड में जाना पड़ सकता है। दूसरी तरफ वार्ड 74 से जुड़े नए दावेदारों के लिए यह आरक्षण चुनावी टिकट का रास्ता खोल सकता है।

पंकज शर्मा और दिनेश दवे को मनमाफिक वार्ड
कांग्रेस नेता पंकज शर्मा का वार्ड 25 और दिनेश दवे का वार्ड 18 अनारक्षित ओपन आया है। दोनों नेताओं और उनके समर्थकों में इसके बाद उत्साह है और अब टिकट के लिए पार्टी स्तर पर प्रयास तेज होंगे। इसके विपरीत सुरेश श्रीमाली और खूबीलाल मेनारिया का वार्ड 4 अनारक्षित महिला होने से उनकी मूल दावेदारी प्रभावित हुई है।

शंकर चंडेल के वार्ड में खुला रास्ता
कांग्रेस के नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष शंकर चंडेल का वार्ड 7 एससी ओपन के लिए आरक्षित हुआ है। चंडेल पहले पार्षद रह चुके हैं। ब्लॉक अध्यक्ष बनने के बाद अब उनके वार्ड का आरक्षण भी उनके राजनीतिक समीकरण के अनुकूल माना जा रहा है।

राजीव सुहालका को भी तलाशना होगा नया वार्ड
कांग्रेस नेता राजीव सुहालका वार्ड 4 से दावेदारी कर रहे थे, लेकिन यह वार्ड अनारक्षित महिला हो गया। अब उन्हें आसपास के किसी वार्ड में टिकट की कोशिश करनी होगी। सुहालका विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस टिकट की दावेदारी कर चुके हैं और अब निगम चुनाव को लेकर सक्रिय हैं।

अब नजर टिकट की लॉटरी पर
वार्ड आरक्षण की लॉटरी ने भले ही 80 सीटों की तस्वीर साफ कर दी हो, लेकिन असल राजनीतिक लॉटरी अब टिकट वितरण के समय निकलेगी। सबसे बड़ा खेल उन 33 अनारक्षित ओपन वार्डों में होगा, जहां भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ पूर्व पार्षद, संगठन पदाधिकारी और नए दावेदार एक ही सीट पर टिकट मांग सकते हैं।
दूसरी ओर आरक्षित हुए वार्डों से बाहर हुए नेताओं के दूसरे वार्ड में पहुंचने से वहां पहले से तैयारी कर रहे दावेदारों की चिंता बढ़ेगी। यानी आने वाले दिनों में ‘मूल वार्ड बनाम नया वार्ड’ और ‘पुराना दावेदार बनाम पैराशूट दावेदार’ का मुकाबला निगम चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर बन सकता है।


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