उदयपुर, 22 फरवरी। राजस्थान मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन की वार्षिक साधारण सभा में लेबर कोड्स, दवा उद्योग की चुनौतियों और जीएसटी जैसे मुद्दों पर तीखे स्वर सुनाई दिए। बैठक में श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि नए लेबर कोड्स मेहनतकश वर्ग पर “नरसहारक हमला” हैं। “लेबर कोड्स आर्थिक ही नहीं, राजनीतिक हमला” – राजेश सिंघवी सीटू के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने कहा कि लेबर कोड्स लागू करना सिर्फ आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि श्रमिकों पर राजनीतिक हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रम कानूनों को कमजोर कर मजदूरों के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। सिंघवी ने कहा कि अब तक के श्रम कानूनों ने मालिकों को खुली लूट की छूट नहीं दी, लेकिन वर्तमान बदलावों से स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने दवा उद्योग में एआई जैसी नई तकनीकी चुनौतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि विज्ञान समाजवाद में मानव जीवन को बेहतर बनाता है, जबकि पूंजीवादी व्यवस्था में वह चुनौती बन जाता है। “हड़ताल शौक नहीं, अंतिम हथियार” – पी.एस. खींची ट्रेड काउंसिल के संयोजक पी एस खींची ने कहा कि हड़ताल कोई शौक नहीं, बल्कि तब उठाया जाने वाला कदम है जब श्रमिकों की सुनवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग का आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है। खींची ने आर्थिक विकास के सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। “दवा पर जीएसटी 0% किया जाए” – प्रीतम सिंह राजस्थान मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन के राज्य संयुक्त सचिव प्रीतम सिंह ने दवाओं पर जीएसटी को शून्य प्रतिशत करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जीएसटी दर घटाने के बावजूद कंपनियों ने दवाओं की कीमतें पहले ही बढ़ा दीं, जिससे आम जनता को राहत नहीं मिली। उन्होंने दवा मूल्य निर्धारण के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की और कहा कि कई कंपनियां हर वर्ष 10% तक मूल्य वृद्धि कर रही हैं। साथ ही मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स पर टारगेट आधारित वेतन व्यवस्था को भी अनुचित बताया। अन्य वक्ताओं के विचार सीटू सचिव हीरालाल सालवी ने कहा कि दवा प्रतिनिधियों पर अधिक कार्य घंटे और लक्ष्य का दबाव मानसिक तनाव बढ़ा रहा है।पूर्व नेता दिनेश जोशी ने कहा कि संगठन को जनता के मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और दवा की गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी है। उन्होंने यूनियन के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय प्रतिनिधियों का वेतन उच्च प्रशासनिक पदों से भी अधिक हुआ करता था। सभा की अध्यक्षता यूनियन के वरिष्ठ साथी अजय तिवारी ने की तथा वार्षिक प्रतिवेदन नितिन जैन ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में वरुण भारद्वाज, प्रदीप सिंह, बृजेश चौधरी, दीपेश राठौड़, कांति बी. रावल और एम.बी. माथुर सहित अन्य सदस्यों ने भी विचार व्यक्त किए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर: 4.5 किलो चरस तस्करी में प्रयुक्त कार का मालिक गिरफ्तार उदयपुर में ‘रॉकवुड्स ब्लेज़िंग स्ट्राइकर्स क्रिकेट कप 2026’ का आगाज़, रोमांचक मुकाबलों से छाया उत्साह